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GST 2.0: जीएसटी में हुए सुधारों का आने वाले दो महीनों में दिखेगा असर, क्या-क्या बदल सकता है जानें

Wed, 24 Sep 2025 01:43 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 24 Sep 2025 01:43 PM IST
सार

नई जीएसटी दरें 22 सितंबर से लागू हो गई हैं। FMCG कंपनियों ने एक अस्थायी उपाय के रूप में, उन्होंने सरकारी निर्देशों का पालन करने के लिए लोकप्रिय मूल्य पैकों की अधिकतम खुदरा कीमत कम कर दी है। बता दें कि पहले ₹5 में मिलने वाला पारले-जी बिस्किट पैक अब ₹4.5 में बिक रहा है। वहीं, ₹2 वाला शैम्पू पाउच अब ₹1.75 का हो गया है।

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The impact of GST reforms will be visible in the coming two months; find out what changes are possible
नई जीएसटी दरें - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद FMCG कंपनियों ने अपने लोकप्रिय पैक के दाम घटा दिए हैं। लेकिन पैकेजिंग और उत्पादन से जुड़ी दिक्कतों के चलते उपभोक्ताओं को अब ₹2, ₹5 और ₹10 जैसी मैजिकल प्राइस पॉइंट्स की जगह ₹1.75, ₹4.5 और ₹4.45 जैसे गैर-गोल दाम चुकाने पड़ रहे हैं।

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कंपनियों ने अपनाया यह अस्थायी उपाय

बता दें कि पहले ₹5 में मिलने वाला पारले-जी बिस्किट पैक अब ₹4.5 में बिक रहा है। वहीं, ₹2 वाला शैम्पू पाउच अब ₹1.75 का हो गया है। कंपनियों का कहना है कि पैक का वजन तुरंत बदलना संभव नहीं था, क्योंकि पैकेजिंग पहले से प्रिंट हो चुकी थी। ऐसे में जीएसटी लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए उन्हें अस्थायी तौर पर यह कदम उठाना पड़ा। एक अस्थायी उपाय के रूप में, उन्होंने सरकारी निर्देशों का पालन करने के लिए लोकप्रिय मूल्य पैकों की अधिकतम खुदरा कीमत कम कर दी है।

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बदलाव करने में लगेगा डेढ़ से दो महीने

पारले प्रोडक्ट्स के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा कि हां, यह 100 प्रतिशत अस्थायी उपाय है। आम तौर पर, जब भी आप बदलाव या इस तरह की किसी चीज के बारे में बात करते हैं, तो पैक के वजन में किसी भी तरह के अंतर आदि के संदर्भ में किसी भी बदलाव के लिए लगभग डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। कंपनियां आमतौर पर डेढ़ से दो महीने के समय के साथ काम करती हैं।

वजन बढ़ाकर पुराने दाम पर लौटेंगी कंपनियां

उन्होंने कहा कि अक्टूबर-नवंबर के रैपर पहले ही प्रिंट हो चुके हैं। ऐसे में तुरंत बदलाव संभव नहीं था। कंपनियां जल्द ही पैक का वजन बढ़ाकर ₹2, ₹5 और ₹10 जैसे मूल्य बिंदुओ पर लौटेंगी। छोटे भुगतान करते समय ग्राहकों को होने वाली कठिनाइयों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि खरीदारों के पास कई बार खरीदारी करने या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने का विकल्प है।

यह उपाय व्यवहारिक नहीं

इक्विटी रिसर्च फर्म नुवामा के अबनीश रॉय ने कहा कि ₹4.5 या ₹4.6 जैसे दाम व्यवहारिक नहीं हैं। कंपनियां जल्दी ही वॉल्यूम बढ़ाकर गोल दाम पर वापस लौटेंगी। यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म उपाय है। 



डाबर के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि हमने भी अपने पैक्स की कीमतें जीएसटी कटौती के अनुरूप घटाई हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सामर्थ्य कभी भी गुणवत्ता की कीमत पर नहीं आना चाहिए। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण और मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के लिए ये मैजिकल प्राइस पॉइंट्स बेहद अहम हैं, क्योंकि इन्हीं छोटे पैक्स से कंपनियों की बड़ी बिक्री होती है। दो महीने के भीतर ₹2, ₹5 और ₹10 वाले पैक फिर से बाजार में लौटने की उम्मीद है।

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