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Budget 2026: मजबूत विकास और कम महंगाई के बीच संतुलन सरकार की सबसे बड़ी चुनौती, जानें बजट से देश को क्या उम्मीद

Sat, 24 Jan 2026 02:17 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 24 Jan 2026 02:17 PM IST
सार

भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है और महंगाई भी नियंत्रण में है। ऐसे माहौल में आने वाले केंद्रीय बजट में सरकार का फोकस आर्थिक स्थिरता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर रहेगा। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता, व्यापार समझौतों की जरूरत, राज्यों का बढ़ता घाटा और निवेश की धीमी गति जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

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Strong growth and low inflation are the biggest challenges facing the gov; expert's opinion on the budget
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश की अर्थव्यवस्था में अनुमान से तेज वृद्धि और नियंत्रित महंगाई के माहौल में आने वाले केंद्रीय बजट में स्थिरता और वित्तीय संतुलन पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का मानना है कि सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजारों की अस्थिरता के बीच सार्वजनिक वित्त की मजबूती बनाए रखना होगा।

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जोशी के मुताबिक इस बार बजट अपेक्षाकृत अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों में तैयार किया जा रहा है। आर्थिक वृद्धि अनुमान से बेहतर रही है और महंगाई भी अपेक्षा से कम दर्ज हुई है। इससे नीति निर्माण में सरकार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात अभी भी जोखिम पैदा कर रहे हैं।
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नाममात्र GDP से बढ़ेगा राजस्व आधार

जोशी के मुताबिक 2026-27 वित्त वर्ष में नाममात्र जीडीपी के बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कर संग्रह में सुधार और कॉरपोरेट सेक्टर की स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य बेहद अनिश्चित और अस्थिर है, इसलिए सरकार को वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होगा।

सरकार ने जीडीपी का अनुमान कितना बढ़ाया?

सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर लगभग 7.3-7.4 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.3 प्रतिशत था। आईएमएफ ने भी इसी तरह का अनुमान लगाया है। जोशी के अनुसार अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि करीब 6.7 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि 27 फरवरी को होने वाली जीडीपी री-बेसिंग से अर्थव्यवस्था के आकार और गति को लेकर नई तस्वीर सामने आ सकती है।

अमेरिका और यूरोप से व्यापार समझौते पर जोर

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संदर्भ में जोशी ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को अहम बताया। उनका कहना है कि इससे भारतीय निर्यातकों को स्थिरता मिलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर लागू उच्च टैरिफ का असर और अधिक बढ़ सकता है, अगर अमेरिका के साथ समझौता नहीं हुआ।

राजकोषीय मोर्चे पर राज्यों की चिंता

जोशी के मुताबिक केंद्र सरकार अपने राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने की स्थिति में है, लेकिन राज्यों का बढ़ता घाटा चिंता का विषय है। राज्यों द्वारा बजट से अधिक उधारी लेने से सरकारी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है। वहीं निजी निवेश में सुधार तो हुआ है, लेकिन यह अभी व्यापक स्तर पर नहीं पहुंचा है।

विकसित भारत लक्ष्य के अनुरूप सुधारों की उम्मीद

आगामी बजट में 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के अनुरूप सुधारों को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है। जोशी के अनुसार सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड केमिकल सेल (ACC) बैटरी जैसे नए क्षेत्रों को प्रोत्साहन दे सकती है।

कर नीति में स्थिरता पर जोर

कर व्यवस्था को लेकर जोशी ने कहा कि बार-बार बदलाव करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि आयकर प्रणाली में नया कोड, दरों का युक्तिकरण और जीएसटी दरों में कमी पहले ही की जा चुकी है, इसलिए अब स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।

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