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Report: टैक्स संग्रह के मामले में दुनिया के बड़े देशों के मुकाबले कहां खड़ा भारत? इस रिपोर्ट में बड़ा दावा

Sat, 24 Jan 2026 01:16 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 24 Jan 2026 01:16 PM IST
सार

भारत का संयुक्त टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात बढ़कर 19.6% हो गया है, जो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है, लेकिन अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों से अभी भी कम है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स सुधारों, डिजिटलीकरण और नए आयकर कानून से कर संग्रह बढ़ने की संभावना है।

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Where does India stand in terms of tax collection compared to major countries? Learn about the BOB report's
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

भारत का संयुक्त टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात (केंद्र और राज्यों को मिलाकर) बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है। यह स्तर कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बराबर है, जबकि केंद्र सरकार का सकल कर राजस्व अनुपात 11.7 प्रतिशत पर बना हुआ है। संयुक्त आंकड़ा हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे उभरते बाजारों से अधिक है, लेकिन जर्मनी (38%) और अमेरिका (25.6%) जैसे विकसित देशों से अभी भी काफी पीछे है। टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात का मतलब है कि देश की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) के मुकाबले सरकार कितने प्रतिशत टैक्स वसूल रही है।

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अनुकूल जनसांख्यिकी और आर्थिक संभावनाओं से कर संग्रह बढ़ने की उम्मीद

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतर भारत के लिए एक बड़ा नीतिगत अवसर है। अनुकूल जनसांख्यिकी और आर्थिक संभावनाओं के कारण भारत में कर संग्रह बढ़ाने की क्षमता अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार टैक्स सुधारों पर जोर दे रही है, जिसमें कर प्रणाली का सरलीकरण, युक्तिकरण और डिजिटलीकरण शामिल है। इससे निकट भविष्य में टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात में और सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर अधिनियम 2025 और कॉरपोरेट टैक्स ढांचे के युक्तिकरण जैसे नियामकीय बदलाव पारदर्शिता बढ़ाने और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। इन सुधारों का लक्ष्य कर आधार का विस्तार और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक ढांचे में लाना है।

विश्लेषण में क्या आया सामने?

ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि कर संग्रह और नाममात्र जीडीपी के बीच संबंध मजबूत हुआ है। वित्त वर्ष 1993 से वित्त वर्ष 2002 के दौरान संकीर्ण कर आधार के कारण अस्थिरता रही, लेकिन वित्त वर्ष 2014 के बाद से कर राजस्व और नाममात्र जीडीपी के बीच स्पष्ट अभिसरण देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023 के बाद यह प्रवृत्ति और मजबूत हुई है। वर्तमान में टैक्स इलास्टिसिटी 1.1 है, जो दीर्घकालिक औसत से अधिक है।

 

  • रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कर घटकों और व्यापक आर्थिक संकेतकों के बीच मजबूत सकारात्मक संबंध है।
  • आयकर संग्रह का नाममात्र जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय के साथ उच्च सहसंबंध पाया गया है।
  • वहीं, कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार का असर कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह पर सकारात्मक रूप से पड़ा है, जिससे कर उछाल दीर्घकालिक औसत से बेहतर बना हुआ है।

नया आयकर अधिनियम कर संग्रह को और मजबूत कर सकता है

रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला आयकर अधिनियम 2025 कर संग्रह को और मजबूत कर सकता है। यह कानून अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को लक्ष्य बनाकर दक्षता बढ़ाने और कर आधार को व्यापक बनाने में मदद करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में भारत के टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात में और सुधार की उम्मीद जताई गई है।


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