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Startup Funding: स्टार्टअप के लिए बेहतर वर्ष रहा 2025, आईपीओ से पूंजी जुटाने में मिली मदद
Thu, 25 Dec 2025 04:38 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 25 Dec 2025 04:38 AM IST
सार
Startup Funding: 2025 भारतीय स्टार्टअप के लिए बेहतर साल रहा, जहां कुल फंडिंग घटी लेकिन सौदों का औसत आकार दोगुना हुआ और आईपीओ से रिकॉर्ड पूंजी जुटी। 18 स्टार्टअप के आईपीओ से 41,000 करोड़ रुपये से अधिक आए और रिटेल, फिनटेक व एंटरप्राइज सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
लंबे समय तक फंडिंग में आई मंदी के बाद 2025 भारतीय स्टार्टअप के लिए बेहतर वर्ष बनकर उभरा है। हालांकि, कुल फंडिंग जुटाने में जरूर कमी आई, लेकिन सौदों का आकार दोगुना बढ़कर 14 लाख डॉलर पर पहुंच गया है। 2024 में यह आकार 7 लाख डॉलर था। इस साल इस क्षेत्र को आईपीओ के जरिये अच्छी खासी पुंजी जुटाने में मदद मिली है।
आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रौद्योगिकी स्टार्टअप ने 2025 में 10.5 अरब डॉलर जुटाए। यह 2024 के 12.7 अरब डॉलर से 17 फीसदी और 2023 के 11 अरब डॉलर से 4 फीसदी कम है। 10 करोड़ डॉलर से अधिक के फंडिंग राउंड की संख्या 2024 के 19 की तुलना में घटकर 14 रह गई। हालांकि, बड़े सौदों में एरिशा ई-मोबिलिटी (एक अरब डॉलर), जेप्टो (45 करोड़ डॉलर) और ग्रीनलाइन (27.5 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।
कम फंडिंग के बावजूद स्टार्टअप आईपीओ में तेजी के चलते नकदी में जबरदस्त उछाल आया। लेंसकार्ट, ग्रो, मीशो और फिजिक्सवाला समेत 18 स्टार्टअप भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हुए। इन्होंने कुल मिलाकर 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जुटाई। 2024 में स्टार्टअप कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 29,000 करोड़ रुपये की रकम जुटाई थी।
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ये भी पढ़ें: चांदी की कीमत रिकॉर्ड ₹2.27 लाख प्रति किलोग्राम पर, जानिए सोने की कीमतों में क्या बदला
रिटेल और फिनटेक का अच्छा प्रदर्शन
आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक टैरिफ व्यवधानों और देशों के बीच तनावों से प्रभावित इस वर्ष रिटेल, फिनटेक, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और त्वरित वाणिज्य सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र बनकर उभरे। एंटरप्राइज एप्लिकेशन (2.6 अरब डॉलर), रिटेल (2.4 अरब डॉलर) और फिनटेक (2.2 अरब डॉलर) ने फंडिंग को मजबूती प्रदान करना जारी रखा।
ब्लॉकबस्टर आईपीओ का साल रहा 2025
2025 मजबूत नकदी और ब्लॉकबस्टर आईपीओ का साल रहा है। इस वर्ष में रिकॉर्ड संख्या में वेंचर कैपिटल और पीई समर्थित कंपनियों ने शेयर बाजार में कदम रखा। यह इस लिहाज से एक रिकॉर्ड वर्ष था।
उदाहरण के लिए, पीक एक्सवी, एलिवेशन जैसे फंड को देखें तो उनके पोर्टफोलियो में कई आईपीओ शामिल थे। लिस्टिंग में कुछ कंपनियों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अर्बन कंपनी का शेयर लिस्टिंग पर 58.26 फीसदी बढ़ा। मीशो का 53 फीसदी ज्यादा भाव पर लिस्ट हुआ। हालांकि, लेंसकार्ट और ब्लूस्टोन जैसी कंपनियों को कम रिस्पांस मिला।
ये भी पढ़ें: क्यूआर कोड आधारित क्वालिटी मार्क लॉन्च, अब एक स्कैन में पता चलेगी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं की सच्चाई
इस वर्ष 44,000 नए स्टार्टअप बने
देश की स्टार्टअप गाथा उल्लेखनीय घरेलू विकास की मिसाल है। लगभग 200,000 डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं। इनमें से अकेले इस वर्ष 44,000 नए जुड़े हैं। 11 नए यूनिकॉर्न और आईपीओ के जरिये 18 कंपनियों की 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने के साथ भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
15% की रफ्तार से हो रही वृद्धि
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कारोबार सुगमता, सरकार की सकारात्मक नीतियों और फंडिंग के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन से देश में स्टार्टअप तंत्र को बढ़ावा मिल रहा है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, भारत अब दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम का मेजबान है। इसके हर साल 12-15 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है।
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आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रौद्योगिकी स्टार्टअप ने 2025 में 10.5 अरब डॉलर जुटाए। यह 2024 के 12.7 अरब डॉलर से 17 फीसदी और 2023 के 11 अरब डॉलर से 4 फीसदी कम है। 10 करोड़ डॉलर से अधिक के फंडिंग राउंड की संख्या 2024 के 19 की तुलना में घटकर 14 रह गई। हालांकि, बड़े सौदों में एरिशा ई-मोबिलिटी (एक अरब डॉलर), जेप्टो (45 करोड़ डॉलर) और ग्रीनलाइन (27.5 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।
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कम फंडिंग के बावजूद स्टार्टअप आईपीओ में तेजी के चलते नकदी में जबरदस्त उछाल आया। लेंसकार्ट, ग्रो, मीशो और फिजिक्सवाला समेत 18 स्टार्टअप भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हुए। इन्होंने कुल मिलाकर 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जुटाई। 2024 में स्टार्टअप कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 29,000 करोड़ रुपये की रकम जुटाई थी।
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रिटेल और फिनटेक का अच्छा प्रदर्शन
आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक टैरिफ व्यवधानों और देशों के बीच तनावों से प्रभावित इस वर्ष रिटेल, फिनटेक, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और त्वरित वाणिज्य सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र बनकर उभरे। एंटरप्राइज एप्लिकेशन (2.6 अरब डॉलर), रिटेल (2.4 अरब डॉलर) और फिनटेक (2.2 अरब डॉलर) ने फंडिंग को मजबूती प्रदान करना जारी रखा।
ब्लॉकबस्टर आईपीओ का साल रहा 2025
2025 मजबूत नकदी और ब्लॉकबस्टर आईपीओ का साल रहा है। इस वर्ष में रिकॉर्ड संख्या में वेंचर कैपिटल और पीई समर्थित कंपनियों ने शेयर बाजार में कदम रखा। यह इस लिहाज से एक रिकॉर्ड वर्ष था।
उदाहरण के लिए, पीक एक्सवी, एलिवेशन जैसे फंड को देखें तो उनके पोर्टफोलियो में कई आईपीओ शामिल थे। लिस्टिंग में कुछ कंपनियों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अर्बन कंपनी का शेयर लिस्टिंग पर 58.26 फीसदी बढ़ा। मीशो का 53 फीसदी ज्यादा भाव पर लिस्ट हुआ। हालांकि, लेंसकार्ट और ब्लूस्टोन जैसी कंपनियों को कम रिस्पांस मिला।
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इस वर्ष 44,000 नए स्टार्टअप बने
देश की स्टार्टअप गाथा उल्लेखनीय घरेलू विकास की मिसाल है। लगभग 200,000 डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं। इनमें से अकेले इस वर्ष 44,000 नए जुड़े हैं। 11 नए यूनिकॉर्न और आईपीओ के जरिये 18 कंपनियों की 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने के साथ भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
15% की रफ्तार से हो रही वृद्धि
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कारोबार सुगमता, सरकार की सकारात्मक नीतियों और फंडिंग के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन से देश में स्टार्टअप तंत्र को बढ़ावा मिल रहा है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, भारत अब दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम का मेजबान है। इसके हर साल 12-15 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है।