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Solar Power Generation: विशाल आबादी को कैसे मिलेगी साफ-स्वच्छ ऊर्जा, क्या ये उपाय होंगे असरदार?

Thu, 18 May 2023 07:26 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 18 May 2023 07:26 PM IST
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सार
Solar Power Generation: भारत ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है। यहां वर्ष में लगभग 250-300 दिन पूरे दिन सूरज पूरी चमक के साथ आसमान में दिखाई पड़ता है, भारत में सौर ऊर्जा के सफल होने की संभावना बहुत ज्यादा है। अच्छी धूप के कारण यहां प्रति वर्ग मीटर पांच से सात किलो वाट ऊर्जा प्रति घंटा प्राप्त की जा सकती है...
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Solar Power Generation: How will the vast population get clean energy, will these measures be effective?
Solar Power Generation - फोटो : Istock

विस्तार

वर्तमान में देश में सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता 66.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। देश ने 2030 तक अपने लिए 500 गीगा वाट बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा के माध्यम से हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन भारत के लिए चिंताजनक बात यह है कि यहां सौर-पवन ऊर्जा की बढ़त आबादी के कारण बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की एक चौथाई भी पूरा करने में समर्थ नहीं है। सौर ऊर्जा क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा स्टार्टअप को अवसर देकर इस कमी को भरने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस मोर्चे पर भी वित्त वर्ष 2022-23 में सौर ऊर्जा उपकरणों की स्थापना में आठ फीसदी की गिरावट चिंता का कारण है। हालांकि पवन ऊर्जा के क्षेत्र में 105 फीसदी की वृद्धि अच्छा अनुभव देने वाला है। ऐसे में भारत के लिए अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरा करने में कई चुनौतियां हैं। सरकार इन चुनौतियों से पार पाते हुए लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई कदम उठा रही है जिसका आने वाले समय में असर दिखाई पड़ेगा।

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बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग

दुनिया में पेट्रोल-डीजल और नाभिकीय ऊर्जा की तुलना में सौर-पवन ऊर्जा का उपयोग सबसे तेज गति से बढ़ रहा है। भारत भी इस ट्रेंड से अछूता नहीं है। केंद्र-राज्य सरकारों के विशेष आर्थिक सहयोग के कारण कई क्षेत्रों में सौर ऊर्जा खपत में अच्छी वृद्धि देखी जा रही है। लेकिन चिंता की बात यह है कि यह वृद्धि देश के कुछ राज्यों-क्षेत्रों में ही ज्यादा है। शेष भारत इस तेजी में बहुत पीछे है। जबकि ऊर्जा की खपत हर क्षेत्र में बढ़ रही है और इस कारण सभी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्रों में पर्याप्त वृद्धि किया जाना आवश्यक है।  

कैसे पूरा होगा ये लक्ष्य

नवीकरणीय एवं सौर ऊर्जा मंत्रालय के सचिव बीएस भल्ला ने कहा है कि इन बदलावों से निजी सेक्टर को इस सेक्टर में आने के लिए आकर्षित किया जा सकेगा। सौर ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार किया जा सकेगा। नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन मंत्रालय (MNRE) ने इसके लिए विशेष पहल की है। इसके लिए सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों के लिए आवेदन शुल्क में 80 फीसदी कमी कर दी गई है। साथ ही सौर पैनल उत्पादन के लिए आवेदन के बाद यदि कोई निर्माता अपना आवेदन वापस लेना चाहता है, तो उसका आवेदन शुल्क 90 फीसदी तक वापस करने जैसी सहूलियतें देकर निजी क्षेत्र को सौर ऊर्जा पैनल और बैटरी उत्पादन में लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से इस क्षेत्र में ज्यादा निवेश आने की संभावना है।

भारत की सौर ऊर्जा उपलब्धता

भारत ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है। यहां वर्ष में लगभग 250-300 दिन पूरे दिन सूरज पूरी चमक के साथ आसमान में दिखाई पड़ता है, भारत में सौर ऊर्जा के सफल होने की संभावना बहुत ज्यादा है। अच्छी धूप के कारण यहां प्रति वर्ग मीटर पांच से सात किलो वाट ऊर्जा प्रति घंटा प्राप्त की जा सकती है, इससे किसी भी अच्छी ऊर्जा आवश्यकता वाले संस्थान या संयंत्र की ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी की जा सकती हैं।

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कुल ऊर्जा का 9 फीसदी सौर माध्यम से उत्पादन

सौर ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत संस्था अंबर (EMBER) के एक आंकड़े के अनुसार, दुनिया के लगभग 60 देश अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 10 फीसदी सौर-वायु ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं। 165 टेरा वाट घंटा उत्पादन के साथ भारत अभी अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग नौ प्रतिशत सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त करता है। यदि प्रतिशत की दृष्टि से देखें तो यह आंकड़ा कम है, लेकिन भारत की विशाल आबादी के लिए भारी ऊर्जा खपत की दृष्टि से देखें तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। केंद्र सरकार इस मात्रा को लगातार आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।

इन राज्यों का प्रदर्शन अच्छा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इस प्रदर्शन के बाद भी देश के कई राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। देश के कुछ राज्य वैश्विक औसत से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अंबर के आंकड़ों के अनुसार, गोवा 78 फीसदी, राजस्थान 36 फीसदी, गुजरात 30 फीसदी, कर्नाटक 28 फीसदी, तमिलनाडु 22 फीसदी और आंध्र प्रदेश 19 फीसदी के साथ वैश्विक स्तर से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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