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Housing Loan Insurance: होम लोन लिया, क्या उसका बीमा कराया है? दस्तखत से पहले सवाल करें, गलतियां करने से बचें

Mon, 24 Aug 2026 05:41 AM IST
ज्योति भास्कर शिल्पा अरोड़ा, (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, इंश्योरेंस समाधान)
शिल्पा अरोड़ा, (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, इंश्योरेंस समाधान) Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 24 Aug 2026 05:41 AM IST
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Housing Loan Insurance aspect Ask questions before signing and avoid making mistakes
होम लोन को लेकर सावधानी जरूरी (सांकेतिक) - फोटो : ani

अशोक शर्मा ने अपने सपनों का घर खरीदने के लिए बैंक से 50 लाख रुपये का होम लोन मंजूर कराया। वे आश्वस्त थे कि उन्होंने लोन के साथ सुरक्षा बीमा भी ले लिया है, ताकि उनके न रहने पर परिवार पर कोई आंच न आए। पांच साल बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने से अशोक का असामयिक निधन हो गया।

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मातम के बीच जब परिवार ने राहत की सांस लेने की कोशिश की, तो बैंक से एक ऐसा झटका लगा, जिसने उनके होश उड़ा दिए। बीमा कंपनी ने बैंक को केवल 47 लाख रुपये का क्लेम चुकाया और बैंक ने बाकी बचे 3 लाख रुपये की वसूली के लिए परिवार को नोटिस थमा दिया। जिस वक्त परिवार को संबल चाहिए था, उस वक्त उन्हें 3 लाख रुपये की देनदारी चुकाने के लिए अपनी बचत खाली करनी पड़ी।
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अशोक जी ने तो 50 लाख रुपये का लोन लिया था, फिर परिवार को अपनी जेब से 3 लाख रुपये क्यों चुकाने पड़े?

लोन काउंटर पर सिंगल प्रीमियम का खेल

  • अशोक जी के साथ जो हुआ, वह देश भर में लोन लेने वाले लाखों ग्राहकों के साथ रोज हो रहा है।
  • लोन मंजूर करते समय बैंक अधिकारी ग्राहक से करीब 70 दस्तावेजों पर दस्तखत करवाते हैं। इसी भीड़ में बिना पूरी जानकारी दिए एक इंश्योरेंस फॉर्म पर भी दस्तखत करा लिए जाते हैं।
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  • बैंक ने अशोक जी को 50 लाख का पूरा लोन हाथ में नहीं दिया। उन्होंने 3 लाख सिंगल प्रीमियम के काट लिए और सिर्फ 47 लाख रुपये का लोन वितरित किया, जबकि बीमा कवर भी सिर्फ 47 लाख रुपये पर ही जारी हुआ।

अशोक जी 20 साल तक 50 लाख रुपये के हिसाब से ईएमआई भरते रहे। यानी वे कटे हुए 3 लाख रुपये के बीमा प्रीमियम पर भी 8-9 फीसदी का होम लोन ब्याज चुका रहे थे, जबकि बैंक एजेंट ने उस 3 लाख पर तुरंत अपना मोटा कमीशन कमा लिया।

  • इतना ही नहीं, कई बार एजेंट भारी कमीशन कमाने के चक्कर में रेगुलर सेविंग लिंक्ड पॉलिसी बेच देते हैं। इसके लिए वे लोन की प्रोसेसिंग फीस में 10,000 रुपये की छूट का लालच भी देते हैं।  

आपके साथ ऐसा न हो, इसलिए ध्यान दें

  • लोन सुरक्षा के लिए एकमुश्त (सिंगल प्रीमियम) बीमा न लें जिसे लोन राशि में जोड़ दिया जाए। हमेशा रेगुलर प्रीमियम चुनें, जिसमें हर साल प्रीमियम भुगतान किया जाता है।
  •  एक अच्छा और समझदार वित्तीय सलाहकार आपको मॉर्गेज रिडेम्पशन ग्रुप टर्म इंश्योरेंस लेने की सलाह देगा। यह विशेष रूप से होम लोन के लिए डिजाइन होता है और घटते लोन बैलेंस पर काम करता है।
  • ग्रुप इंश्योरेंस होने के कारण यह बेहद सस्ता होता है। 35 वर्ष का व्यक्ति महज 15,000 रुपये सालाना प्रीमियम पर एक करोड़ रुपये तक का कवर ले सकता है।

बीमा क्यों जरूरी है?
होम लोन 20–30 साल की लंबी देनदारी है। इस दौरान मुख्य कमाने वाले के साथ अगर कोई अनहोनी हो जाए, तो आय रुकते ही परिवार पर ईएमआई का बोझ आ जाता है।

  •  होम लोन बीमा होने पर क्लेम की रकम से बैंक का पूरा बकाया चुक जाता है और परिवार पर वित्तीय संकट नहीं आता। 

जानना जरूरी है: दस्तखत से पहले जांचें...

  •  क्या मिलने वाला क्लेम कुल लोन राशि के बराबर या उससे अधिक है?
  •  क्या यह लोन की पूरी मियाद कवर करता है?
  •  पॉलिसी सर्टिफिकेट के सभी नियम व शर्तों को खुद दोबारा जांचें।
  •  वजन, ऊंचाई, स्मोकिंग/ड्रिंकिंग की आदतें, पेशा और मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी खुद भरें, ताकि बाद में क्लेम न अटके।
  •  यदि बैंक ने धोखे से सिंगल प्रीमियम या महंगी सेविंग/यूलिप पॉलिसी जोड़ दी है, तो पॉलिसी दस्तावेज मिलने के 30 दिनों के भीतर उसे रद्द कराकर पूरा रिफंड मांगें।
  •  लोन भले माता-पिता के साथ संयुक्त हो, लेकिन बीमा हमेशा परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य के नाम पर होना चाहिए। 
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