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उधार से सतर्क: बाय नाउ, पे लेटर की आसान किस्तें फंसा न दें कर्ज के जाल में, उपभोक्ता क्या करें, क्या न करें?

Mon, 24 Aug 2026 09:45 AM IST
द बोनस द बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
द बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: द बोनस Updated Mon, 24 Aug 2026 09:45 AM IST
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Beware of Credit Buy Now Pay Later Easy Installments Debt Trap Dos and Don't for EMI Consumers
ईएमआई ट्रैप - फोटो : amarujala.com

डिजिटल दौर में खरीदारी जितनी आसान हुई है, उधारी का जाल उतना ही अदृश्य और घातक बन चुका है। अधिकांश वयस्क अब 'बाय नाउ, पे लेटर' (BNPL) का इस्तेमाल कर रहे हैं। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग इसके चंगुल में हैं। लोग गैजेट्स या कपड़ों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के दूध, राशन और ग्रॉसरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी किस्तों का सहारा ले रहे हैं।

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BNPL  कैसे काम करता है?
पारंपरिक किस्त प्रणाली का यह डिजिटल रूप ई-कॉमर्स चेकआउट पर एक क्लिक में उपलब्ध होता है:

  • बिना किसी लंबी क्रेडिट जांच के खरीदारी के वक्त ही पूरी राशि को 3 से 4 छोटी किस्तों में बांट दिया जाता है।
  • रिटेलर्स इसे इसलिए बढ़ावा देते हैं, क्योंकि इससे बिक्री और औसत ऑर्डर वैल्यू में बढ़ोतरी होती है।
  • पहली नजर में इसे जीरो इंटरेस्ट या बिना किसी ब्याज के मिलने वाली सुविधा के रूप में पेश किया जाता है।

यह कैसे बनता है कर्ज का जाल 

  • ऋण का ढेर:
    • 60 फीसदी उपभोक्ता एक ही समय में कई बीएनपीएल लोन चला रहे हैं। एक-तिहाई लोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स से उधार लेते हैं।
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  • छोटी किस्तों का भ्रम:
    • 300 से 500 रुपये की कई किस्तें मिलकर महीने के बजट को पूरी तरह असंतुलित कर देती हैं।
  • जीरो इंटरेस्ट का सच:
    • 4 किस्तों वाले प्लान में देरी होते ही भारी लेट फीस और बैंक ओवरड्राफ्ट चार्ज लग जाते हैं। लंबी अवधि वाले लोन में 30% से अधिक का सालाना ब्याज वसूला जाता है।
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  • डिफॉल्ट की ऊंची दर:
    • 47% बीएनपीएल यूजर्स समय पर भुगतान में चूके। 68% मानते हैं कि इसने उन्हें गैर-जरूरी खर्च पर मजबूर किया।

उपभोक्ता क्या करें?

  • हर BNPL ऑफर को एक वास्तविक लोन समझें, जो भविष्य की कमाई पर गिरवी है।
  • सभी किस्तों, देय तारीखों और मासिक देनदारी का अलग से हिसाब रखें।
  • खाते में जरूरी राशि रखें ताकि बैंक पेनल्टी से बचा जा सके।
  • कई एप्स से एक साथ छोटी-छोटी उधारी लेने से पूरी तरह बचें।

क्या न करें?

  • यह मानकर खरीदारी न करें कि सैलरी आते ही किस्तें निपट जाएंगी।
  • राशन, ग्रॉसरी या खाने-पीने की चीजों के लिए किस्तों का सहारा लेने से बचें; यह गंभीर वित्तीय संकट का पहला संकेत है।
  • जब तक मर्चेंट से रिफंड कन्फर्म न हो, किस्त का भुगतान न छोड़ें।
  • शर्तें पढ़े बिना बाय नाउ पे लेटर विकल्प को पूरी तरह मुफ्त न समझें।
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