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Tea: छोटे चाय उत्पादकों ने की एमएसपी जैसी व्यवस्था की मांग, कहा- हो मूल्य निर्धारण में सुधार

Thu, 10 Jul 2025 01:23 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 10 Jul 2025 01:23 PM IST
सार

छोटे चाय उत्पादकों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसे व्यवस्था की मांग की है। वे पुरानी मूल्य प्राप्ति चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिससे उन्हें लागत से कम कीमत मिल रही है। उन्होंने इस मांग को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखा है। 

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Small tea producers demanded a system like MSP, said - there should be improvement in pricing
चाय (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

देश के छोटे चाय उत्पादकों ने निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्य निर्धारण तंत्र स्थापित करने की मांग की है। इससे उन्हें पत्तियों को बेचकर उचित मूल्य मिलेगा। यह छोटे उत्पादक देश के चाय उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं। 

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वाणिज्य मंत्री को लिखा पत्र

इस मांग को लेकर उन्होंने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखा। पत्र में भारतीय लघु चाय उत्पादक संघों के परिसंघ (सीआईएसटीए) ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत मूल्य संरक्षण योजना का सुझाव दिया है। इसमें कहा गया कि चाय बोर्ड को छोटे उत्पादकों और कारखानों के बीच समान मूल्य-साझाकरण अनुपात निर्धारित करने के लिए गहरा अध्ययन करना चाहिए। 

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उत्पादकों के सामने ये चुनौतियां

सीआईएसटीए के अध्यक्ष बिजॉय गोपाल चक्रवर्ती ने कहा कि छोटे उत्पादकों को लगातार कम कीमत की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इससे इस क्षेत्र की स्थिरता को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे उत्पादक देश के चाय उत्पादन में 52 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं, और उचित मूल्य प्राप्ति तंत्र होना चाहिए ताकि आजीविका बनी रहे।चक्रवर्ती ने कहा कि एसोसिएशन ने मई 2023 में ही वाणिज्य मंत्रालय को एक विस्तृत स्थिति पत्र प्रस्तुत किया था। जिसमें इस क्षेत्र के सामने आने वाली संरचनात्मक बाधाओं को रेखांकित किया गया है, जो पुरानी मूल्य प्राप्ति चुनौतियों से जूझ रहा है।

श्रीलंकाई मॉडल का किया समर्थन 

उन्होंने कहा कि न्यूनतम बेंचमार्क मूल्य की अवधारणा को कुल बिक्री मूल्य से जुड़ी एक नई पद्धति से प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए। इससे उत्पादकों को उचित और लाभकारी मूल्य प्राप्त होगा। सीआईएसटीए ने श्रीलंकाई मॉडल का समर्थन किया है। इसके तहत नीलामी औसत से अधिक अधिशेष आय को कारखानों और उत्पादकों के बीच समान रूप से बांटा जाता है।

मिलता है लागत से कम दाम

छोटे उत्पादकों के लिए मूल्य संरक्षण योजना का प्रस्ताव करते हुए, इसमें कहा गया है कि वर्तमान में हरी पत्तियों की औसत कीमत 22 रुपये से 25 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है। वहीं उत्पादन लागत 17 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है। चक्रवर्ती ने कहा कि मामूली मार्जिन पर उत्पादकों को 5 रुपये प्रति किलोग्राम की उपज प्राप्त होती है। दूसरी ओर, एजेंट आमतौर पर 2 रुपये प्रति किलोग्राम लेते हैं। सीआईएसटीए ने कहा कि यह एक बड़ी बाधा है और उत्पादक सीधे कारखानों को बेचने में सक्षम होने चाहिए।

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