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SEBI: 'हितों के टकराव पर नई प्रणाली बनेगी, FPI नियम होंगे आसान', बाजार में गिरावट के बीच सेबी प्रमुख का एलान

Fri, 07 Mar 2025 03:29 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 07 Mar 2025 03:29 PM IST
सार

SEBI: पूंजी बाजार नियामक सेबी के नये चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शुक्रवार को बताया कि वह एक ऐसी प्रणाली लेकर आएंगे जिसके तहत सेबी बोर्ड के सदस्यों को हितों के टकराव के बारे में जनता को बताना होगा। 1 मार्च को सेबी के चेयरमैन का कार्यभार संभालने वाले पांडे ने अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।

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SEBI open to discuss and further rationalise regulations for FPIs for ease of operations
तुहिन कांत पांडे - फोटो : एएनआई

विस्तार

पूंजी बाजार नियामक सेबी के नये चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शुक्रवार को बताया कि वह एक ऐसी प्रणाली लेकर आएंगे जिसके तहत सेबी बोर्ड के सदस्यों को हितों के टकराव के बारे में जनता को बताना होगा। 1 मार्च को सेबी के चेयरमैन का कार्यभार संभालने वाले पांडे ने अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाना जरूरी है। इससे बाजार नियामक को पारिस्थितिकी तंत्र का विश्वास हासिल करने में मदद मिलेगी। सेबी प्रमुख ने इस दौरान विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाने की भी बात कही है।

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पिछले साल पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर लगे थे आरोप

पिछले वर्ष, अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने पांडे की पूर्ववर्ती माधबी पुरी बुच के खिलाफ व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों के आधार पर संभावित हितों के टकराव से जुड़े आरोप लगाए थे। इन आरोपों में एक ऑफशोर फंड में उनके (बुच के) निजी निवेश की जानकारी दी गई थी, जिसमें अदाणी समूह की एक सहयोगी कंपनी, जिसकी सेबी जांच कर रही थी, सह-निवेशक थी।

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इसके जवाब में सेबी ने कहा था कि बुच ने "जरूरी खुलासे" किए थे और आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया था और अदाणी समूह के खिलाफ आरोपों की विधिवत जांच की गई थी। "मुझे लगता है कि हमें विभिन्न अन्य उपायों पर अधिक पारदर्शी होने की जरूरत है, उदाहरण के लिए, बोर्ड के हितों के टकराव जैसे मामलों में।" नए सेबी चीफ ने कहा, "हम अपनी योजना के साथ आगे आएंगे, ताकि हितों के टकराव आदि के मामलों को और अधिक पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखा जा सके।"

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नए सेबी चीफ बोले- बाजार में भरोसा और पारदर्शिता जरूरी

ग्लोबल वेल्थ समिट 2025 में बोलते हुए पांडे ने कहा, "मुझे लगता है कि भरोसा और पारदर्शिता जरूरी है। हमें न केवल सभी हितधारकों का भरोसा अपने ऊपर बनाना है, बल्कि हमें उस भरोसे को बनाए भी रखना है।" विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से जुड़ी चिंता के बीच सेबी प्रमुख ने कहा कि पूंजी बाजार नियामक उनके परिचालन को नियंत्रित करने वाले नियमों को और अधिक तर्कसंगत बना रहा है।


उन्होंने कहा, "सेबी में हम विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रति सचेत हैं। हमें एफपीआई और एआईएफ उद्योग प्रतिभागियों के साथ मिलकर उनकी कठिनाइयों का समाधान करने और परिचालन को आसान बनाने के लिए विनियमों को और अधिक युक्तिसंगत बनाने में खुशी होगी।" उन्होंने कहा कि विकास की गति को बनाए रखने के लिए हमें घरेलू और विदेशी दोनों तरह की पूंजी की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दीर्घकालिक निवेश के लिए एक उज्ज्वल स्थान है।

पांडे ने कहा कि देश ने पिछले कुछ वर्षों में इक्विटी, ऋण और निजी इक्विटी क्षेत्रों में वैश्विक निवेश बढ़ा है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह की दीर्घकालिक विदेशी पूंजी की उपस्थिति से भारत में बुनियादी ढांचे के विकास, नवाचार और उद्यमिता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

अर्थव्यवस्था में वृद्धि की गति बनाए रखने के लिए लचीलापन जरूरी

पांडे ने कहा, "चूंकि हम भू-आर्थिक विखंडन, टैरिफ मुद्दों और बढ़ी हुई अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, इसलिए हमें अपनी वृद्धि को बनाए रखने के लिए अपने लचीलेपन और ताकत को बढ़ाने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि सतत विकास का उच्च स्तर, कम चालू खाता घाटा, कम बाह्य सार्वजनिक ऋण, स्वस्थ बैंक बैलेंस शीट, राजकोषीय समेकन रोडमैप, सरकारी पूंजीगत व्यय और बुनियादी ढांचे और विदेशी मुद्रा भंडार बफर पर निरंतर जोर, बाहरी झटकों के खिलाफ भारत के लचीलेपन के लिए समर्थन के कुछ प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने यह भी वादा किया कि सेबी उन अनावश्यक और पुराने नियमों पर पुनर्विचार करने को तैयार है, जो किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रहे हैं।

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