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Adani Row: सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- 2016 से नहीं चल रही अदाणी समूह के कंपनियों की जांच, दावा निराधार

Mon, 15 May 2023 03:04 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 15 May 2023 03:04 PM IST
सार

Adani Row: सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में हिंडनबर्ग मामले की जांच के लिए समय बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। नियामक ने इस हफलनामे में साफ किया है कि वर्ष 2016 से अदाणी समूह की जांच किए जाने की बात तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह निराधार है।

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SEBI denies investigating Adani companies since 2016
सेबी - फोटो : pti

विस्तार

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड(सेबी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने इस बात से इन्कार किया कि वह 2016 से अदाणी समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। शीर्ष अदालत के सामने सेबी ने इस तरह के आरोपों को तथ्यात्मक रूप से निराधार करार दिया।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में शेयर बाजार नियामक सेबी ने कहा कि ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसिप्ट (जीडीआर) से संबंधित उसकी पिछली जांच 51 भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के खिलाफ की गई थी। हालांकि अदाणी समूह की कोई भी लिस्टेड कंपनी उक्त 51 कंपनियों का हिस्सा नहीं थी। सेबी के असिस्टेंट मैनेजर सत्यांश मौर्य की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में उचित प्रवर्तन कार्रवाई की गई। इसलिए यह आरोप कि सेबी 2016 से अदाणी की जांच कर रहा है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
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2020 में पहली बार मांगी जानकारी
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा, अदाणी समूह की कंपनियों के नियामकीय खुलासे की संभावित जांच का कोई भी गलत या समय से पहले निष्कर्ष निकालना कानूनी रूप से अस्थिर होगा। इससे न्याय की सेवा नहीं हो पाएगी। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उसने अदाणी समूह के शेयरों के संबंध में किसी भी नियमों के उल्लंघन की जानकारी मांगने के लिए 11 विदेशी नियामकों से संपर्क किया है और ऐसा पहला अनुरोध अक्तूबर, 2020 में किया गया था।
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मंगलवार को फिर होगी सुनवाई
बेहद जटिल हैं अदाणी के 12 लेन-देन : सेबी ने कहा, हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जिन 12 लेन-देन की बात कही गई है, प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि ये लेन-देन अत्यधिक जटिल हैं। इनकी सख्त जांच के लिए विभिन्न स्रोतों से डाटा या सूचना के मिलान की आवश्यकता होगी, जिसमें कई घरेलू और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बैंकों के विवरण, लेन-देन, अनुबंध और समझौते भी शामिल हैं। इसलिए जांच की समय सीमा छह माह बढ़ाने की मांग की गई है। इस पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

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