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बिजनेस अपडेट्स: आरबीआई ने महाराष्ट्र के मंत्री पाटिल सहित आठ को लातूर डीसीसी बैंक से हटाने का आदेश, जानें सब

Sat, 19 Sep 2026 07:15 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 19 Sep 2026 07:15 PM IST
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RBI Orders Removal of Maharashtra Minister Babasaheb Patil, 7 Others from Latur DCC Bank Board Business News
बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स - फोटो : amarujala.com

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबा साहेब पाटिल और लातूर जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के सात अन्य निदेशकों को उनके पद से हटाने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई निदेशकों द्वारा 10 साल की अधिकतम कार्यकाल सीमा का उल्लंघन करने के कारण की गई है। यह आदेश बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ के निर्देशों के बाद आया है।

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मंत्री बाबा साहेब पाटिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से संबंधित हैं। यह दल उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में है। आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक कपिल गोस्वामी ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया। जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के निदेशकों के लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत अधिकतम 10 साल का कार्यकाल निर्धारित है। इस अधिनियम को बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 द्वारा संशोधित किया गया था। इससे पहले, राज्य सहकारिता विभाग के उप सचिव सुधीर अमृते ने भी पुणे के सहकारिता आयुक्त को पत्र लिखा था। उन्होंने 10 साल से अधिक का कार्यकाल पूरा करने वाले निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

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मामला कैसे सामने आया?

बैंक सदस्य सतीश शेशराव जाधव ने इस मामले को उठाया था। उन्होंने 25 मई, 2026 को RBI के मुख्य महाप्रबंधक को एक शिकायत भेजी। इस शिकायत में लातूर डीसीसी बैंक के आठ निदेशकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। जाधव ने पीटीआई को बताया कि शिकायत की प्रतियां कई अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई थीं। इनमें संभागीय संयुक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, लातूर मंडल और नाबार्ड अनुभाग शामिल थे। आरबीआई ने शुरुआत में इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।

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उच्च न्यायालय ने क्या निर्देश दिए?

आरबीआई द्वारा शिकायत पर कार्रवाई न करने के बाद सतीश जाधव ने कानूनी रास्ता अपनाया। उन्होंने 21 जून, 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 3 अगस्त को अदालत ने RBI को निर्देश दिया कि वह जाधव की 25 मई की शिकायत पर कार्रवाई करे। कोर्ट ने आरबीआई को छह सप्ताह के भीतर इस मामले में आवश्यक कदम उठाने को कहा। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने 4 सितंबर को संबंधित निदेशकों से जवाब मांगा। उन्हें 10 सितंबर तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया गया था।

निदेशकों ने क्या कदम उठाए?

आरबीआई के निर्देश और समय सीमा के बाद सात निदेशकों ने 10 सितंबर को अपने इस्तीफे सौंप दिए। इस्तीफा देने वालों में आशोक शिवाजीराव पाटिल निलांगेकर, श्रीपतराव निरुत्तिराव ककाडे, स्वयंप्रभा धनंजय पाटिल, वैंकटराव धोंडीराव बिराजदार, पृथ्वीराज हरिश्चंद्र शिरसाट, प्रमोद जाधव और नागोराव पाटिल शामिल थे। इन निदेशकों ने बैंक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हनुमत जाधव को अपने इस्तीफे दिए। बैंक के कार्यकारी निदेशक ने इन इस्तीफों को मंजूरी दी। उन्होंने इन्हें ईमेल के माध्यम से आरबीआई के महाप्रबंधक को भेज दिया। 18 सितंबर को आरबीआई ने लातूर डीसीसी बैंक को निर्देश दिया कि वह उन निदेशकों को पद से हटाए जो बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 10A(2A)(i) और धारा 56 के तहत अयोग्य हैं।

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