Mumbai: एसबीआई चेयरमैन बोले- आरबीआई के ईसीएल ढांचे के लिए तकनीकी रूप से तैयार, सेबी प्रमुख ने किया यह एलान
SBI: अपेक्षित ऋण हानि यानी ईसीएल ढांचे पर आरबीआई की ओर से पेश मसौदे पर भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने साफ किया है कि देश का सबसे बड़ा बैंक इस मॉडल के लिए तकनीकी रूप से तैयार है। उन्होंने क्या कहा है, आइए जानें।
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अपेक्षित ऋण हानि यानी ईसीएल ढांचे पर आरबीआई की ओर से पेश मसौदे पर भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने साफ किया है कि देश का सबसे बड़ा बैंक इस मॉडल के लिए तकनीकी रूप से तैयार है। हालांकि उन्होंने कहा कि, इसमें अब भी कुछ बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है।
वार्षिक ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) के मौके पर शेट्टी ने मुंबई में कहा, "हमें लगता है कि जो लंबा संक्रमण काल दिया गया है, उसका बैंकों की बैलेंस शीट पर सीमित असर पड़ेगा।" मौजूदा प्रावधान को हटाकर ईसीएल में बदलाव वित्त वर्ष 27 में शुरू लागू होगा। बैकों को इसे पूरी तरह से अपनाने के लिए पांच साल का समय दिया गया है।
क्या है आरबीआई का ईसीएल फ्रेमवर्क?
एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क वह तरीका है जिसके तहत बैंक अपने कर्जों (Loans) और अग्रिम राशियों (Advances) पर होने वाले संभावित नुकसान (Credit Losses) का अनुमान लगाकर प्रावधान (Provision) बनाते हैं। यह तरीका भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान को ध्यान में रखकर प्रावधान बनाता है, न कि केवल वर्तमान नुकसान को। यह तरीका IFRS 9 (International Financial Reporting Standard 9) के अनुरूप है। यह पूर्व के मॉडल की तुलना में अधिक सटीक है।
शेट्टी ने कहा , "हम विदेशी संस्थाओं का अधिग्रहण करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए आउटबाउंड विलय और अधिग्रहण का वित्तपोषण कर रहे हैं। मुझे लगता है कि एसबीआई जैसे बैंक अधिग्रहण के वित्तपोषण में पारंगत हैं।"
कुछ सप्ताह पहले शेट्टी की ओर से किए गए सार्वजनिक अनुरोध के बाद रिजर्व बैंक ने बैंकों को अधिग्रहणों के वित्तपोषण में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। शेट्टी ने यह भी कहा कि बैंकों को एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए दिए गए ऋण के संग्रह के लिए अपनी क्षमता में सुधार करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यूपीआई प्लेटफॉर्म अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति और उपलब्ध डेटा के कारण कई तरह से मजबूत हैं।
कृषि ऋण वितरण में यूपीआई के इस्तेमाल की संभावना तलाशी जा रही
शेट्टी ने बताया कि एसबीआई यूपीआई का उपयोग करने वाले व्यापारियों के लिए वित्तपोषण कर विकल्प विकसित करने पर काम कर रहा है। एसबीआई 52 करोड़ ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराता है। बैंक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) को रुपे यूपीआई क्रेडिट के साथ जोड़कर कृषि ऋण वितरण के लिए यूपीआई के इस्तेमाल की संभावना भी तलाश रहा है।
शेट्टी ने बताया किया बकाया रुपे यूपीआई क्रेडिट कार्डों का 34 प्रतिशत हिस्सा इसकी सहायक कंपनी एसबीआई कार्ड्स की ओर से जारी किया गया है। कुल खर्च का 16 प्रतिशत हिस्सा भी इन्ही कार्ड्स के जरिए खर्च होता है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना के बारे में एसबीआई की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि इसके तहत 15 करोड़ ग्राहकों को जोड़ा गया है। शेट्टी ने कहा कि इन खातों के जरिए ऋण वितरण में उतनी वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि देशभर में मौजूद बिजनेस कॉरेसपोंडेंस (बीसी) नेटवर्क का उपयोग ऋण देने के लिए किया जा सकता है।
शेट्टी ने बताया कि 15 करोड़ खातों में से 99 प्रतिशत से अधिक में कुछ न कुछ राशि जमा है। इनका औसत खाता शेष 4,000 रुपये है। उन्होंने बताया कि इन खातों से प्रतिदिन 35 लाख लेन-देन होते हैं और 56 प्रतिशत खातों का इस्तेमाल महिलाएं करती हैं।
शेट्टी ने यह भी बताया कि उनके लोकप्रिय योनो एप के आगामी संस्करण में पहले दिन 20 करोड़ ग्राहकों को शामिल करने की क्षमता होगी। उन्होंने कहा कि बैंक योनो का नया एप बनाने के लिए 12 वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस ऐप का उपयोग मोबाइल बैंकिंग से कहीं आगे तक जाएगा।
उन्होंने कहा कि योनो एप ने ग्राहक को जोड़ने में लगने वाले समय को घटाकर मात्र 15 मिनट कर दिया है, जो पहले एक घंटे का समय लगता था। शेट्टी ने यह भी कहा कि बैंकिंग प्रणाली में केवाईसी अनुपालन को आसान बनाने के लिए कोशिश करने की जरूरत है। एसबीआई इसके लिए सरकार और नियामकों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
सेबी अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रहा, बोले सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 (GFF) में कहा कि क्वांटम कंप्यूटिक के आने से बड़ी सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। सेबी इसे अपनाए जाने से पहले ही सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर काम कर रहा है। क्वांटम कंप्यूटिंग में ऐसी तकनीक क्षमताएं हैं, जो दुर्भावनापूर्ण तत्वों के लिए पासवर्ड से छेड़छाड़ करना संभव बनाती है। जिसे लंबे समय से बहुत सुरक्षित माना जाता है और इसलिए इस मोर्चे पर सिस्टम को तैयार करना जरूरी है।