S&P Global: 2030 तक जापान को पछाड़कर भारत बनेगा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, एसएंडपी ग्लोबल का अनुमान
अमेरिका वर्तमान में 25.5 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन 18 लाख करोड़ डॉलर के साथ दूसरी और जापान 4.2 लाख करोड़ डॉलर के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
विस्तार
दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत ने 2021 और 2022 में दो वर्षों की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बाद 2023 में भी अपनी निरंतर एवं तेज रफ्तार कायम रखा है। भारत 2030 तक 7.3 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
एसएंडपी ग्लोबल इंडिया विनिर्माण ने अपने नवीनतम खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) में कहा, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में देखें तो 2022 में भारत की नॉमिनल (वर्तमान कीमतों पर) जीडीपी 3.5 लाख करोड़ डॉलर की थी। 2030 तक यह दोगुना से ज्यादा बढ़कर 7.3 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। आर्थिक विस्तार की इस तीव्र गति के कारण 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार जापान की जीडीपी से अधिक हो जाएगा। इस अवधि तक भारत के जर्मनी से भी आगे निकलने की उम्मीद है।
चालू वित्त वर्ष में सबसे तेज रहेगी विकास दर
एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2023-24 में 6.2-6.3 फीसदी रहेगी। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ी। निकट अवधि के आर्थिक दृष्टिकोण में 2023 के बाकी समय और 2024 में निरंतर तीव्र विस्तार का अनुमान है, जो घरेलू मांग में मजबूत वृद्धि पर आधारित है।
1.1 अरब लोगों के पास होगा इंटरनेट, यूनिकॉर्न को बढ़ावा
भारत में वर्तमान में चल रहे डिजिटल परिवर्तन से ई-कॉमर्स के विकास में तेजी आएगी। इससे अगले दशक में खुदरा उपभोक्ता बाजार की तस्वीर बदल जाएगी। 2030 तक 1.1 अरब भारतीयों के पास इंटरनेट होगा, जो 2020 के 50 करोड़ उपभोक्ताओं से दोगुना से अधिक है। ई-कॉमर्स की तीव्र वृद्धि और 4जी-5जी स्मार्टफोन तकनीक में बदलाव से मेन्सा ब्रांड्स, डेल्हीवरी और बिगबास्केट जैसे भारतीय यूनिकॉर्न को बढ़ावा मिलेगा। भारत में एफडीआई प्रवाह में पिछले पांच वर्षों में बड़ी वृद्धि देखी गई है। यह तेजी 2020 से 2022 के दौरान यानी कोरोना काल में भी देखने को मिली थी।
तेज रफ्तार में मध्य वर्ग की अहम भूमिका
एजेंसी ने कहा, पिछले दशक में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को दर्शाती है। इसमें युवा आबादी और तेजी से बढ़ती शहरी घरेलू आय की बड़ी भूमिका है। भारतीय अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को कई प्रमुख विकास कारकों से समर्थन मिल रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कारक भारत का बड़ा व तेजी से बढ़ता मध्य वर्ग है, जो उपभोक्ता खर्च बढ़ाने में मदद कर रहा है।
यह है सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
अमेरिका वर्तमान में 25,500 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके बाद चीन 18,000 अरब डॉलर के साथ दूसरी और जापान 4,200 अरब डॉलर के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं, भारतीय जीडीपी का आकार 2022 तक ब्रिटेन और फ्रांस की जीडीपी से भी बड़ा हो चुका था। 2030 तक भारत की जीडीपी जर्मनी से भी आगे निकलने का अनुमान है।
देश अब घरेलू खर्च पर निर्भर, आर्थिक वृद्धि को लेकर बढ़ी उम्मीद: जयंत वर्मा
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य जयंत आर वर्मा ने मंगलवार को कहा, बेहतर उपभोक्ता विश्वास और विभिन्न संकेतकों के चलते वह दो-चार महीने पहले की तुलना में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर थोड़ा अधिक आशावादी हैं। हालांकि, चिंताएं बनी हुई हैं क्योंकि देश अब घरेलू खर्च पर असाधारण रूप से निर्भर है। मांग के अन्य घटकों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण बाहरी मांग कमजोर है। निजी पूंजी खर्च में सुधार अब भी बहुत अस्थायी और धीमा है। महंगाई के चार फीसदी पर आने के सवाल पर वर्मा ने कहा, अगस्त में महंगाई अधिक थी लेकिन सितंबर में यह सीमित दायरे में आ गई। अक्तूबर में खुदरा महंगाई के कम होने की उम्मीद है।