रूस-यूक्रेन जंग: पुतिन अपने लोगों को खिलाएंगे भारतीय आम और सेब, व्यापार के नए पेमेंट प्लेटफार्म से अभी बाहर रहेगा 'चीन'
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विस्तार
रूस-यूक्रेन जंग के बीच भारत व रूस के संबंध और ज्यादा गहरे हो रहे हैं। दिल्ली पहुंचे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले, तो उन्होंने यूक्रेन के मसले पर भारत के रुख की सराहना की है। उन्होंने कहा, भारत एकतरफा न होकर स्थिति को पूरी तरह से समझ रहा है। इसके साथ ही अब रूस की तरफ से भारतीय सामान की मांग आने लगी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पास रूस से भारतीय उत्पादों के निर्यात के संबंध में एक लंबी चौड़ी सूची आई है।
10 अप्रैल तक नया पेमेंट प्लेटफार्म बनकर तैयार
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने शनिवार को बताया, पुतिन अपने लोगों को भारतीय आम और सेब सहित दर्जनों उत्पादों का स्वाद दिलाना चाहते हैं। इसके लिए रूस और भारत, द्विपक्षीय व्यापार के लिए रुपये-रूबल की नई विनिमय व्यवस्था पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दस अप्रैल तक स्विफ्ट की तर्ज पर व्यापार का नया पेमेंट प्लेटफार्म बनकर तैयार हो जाएगा। बतौर खंडेलवाल, इस नए पेमेंट सिस्टम में अभी 'ड्रैगन' यानी चीन को शामिल नहीं किया गया है। इस नए व्यापारिक सिस्टम से भारत के लिए दूरगामी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
भारतीय सामान की मांग बढ़ी
प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के मद्देनजर कई देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। ऐसे माहौल में अब वहां भारतीय सामान की मांग बढ़ने लगी है। रूस की ओर से कैट को दर्जनों उत्पादों की सूची भेजी गई है। कैट, इस मामले में रूसी व्यापार जगत के लोगों की भारतीय व्यापारियों से मुलाकात कराएगा। ये केवल देश हित में हो रहा है, इसमें कैट का अपना कोई स्वार्थ नहीं है। वह न तो किसी प्लेटफार्म पर होगा और न ही पेमेंट के मामले में कोई हस्तक्षेप करेगा। कैट एक मध्यस्थ एवं मददगार की भूमिका में रहेगा। रूस के व्यापारियों को सुविधा प्रदान की जाएगी। उन्हें जो भी भारतीय उत्पाद चाहिए, उनके पास पांच बड़े भारतीय व्यापारियों की सूची रूस के बिजनेस हाउस को प्रदान कर देंगे। रूस के लोगों की मर्जी होगी कि उन्हें जहां से ठीक लगे, वे सामान का ऑर्डर दे सकते हैं।
रुपये-रूबल में कारोबार
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा, नए पेमेंट सिस्टम का ट्रायल शुरू हो चुका है। अभी चीन को इस सिस्टम से बाहर रखा गया है। आने वाले समय में वह भी नई पेमेंट व्यवस्था का हिस्सा बन जाए, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। मौजूदा स्थिति में भारत-रूस ही नए पेमेंट सिस्टम पर काम करेंगे। पेमेंट सिस्टम के लिए दो मुख्यालय रहेंगे। एक रूस में होगा तो दूसरा मुख्यालय दिल्ली में स्थापित किया जाएगा। ग्लोबल मार्केट में भारत का डंका बजेगा। चूंकि अब रूस ने कह दिया है कि वह डॉलर में कामकाज नहीं करेगा। न किसी से डॉलर में पेमेंट लेगा और न ही देगा। जिसे रूस के साथ कारोबार करना है, उसकी पेमेंट रूबल में करनी होगी। ऐसी भी संभावना है कि भविष्य में यूरोपियन यूनियन के 27 देशों में से कोई कहने लगे कि वह तो भारत के पेमेंट सिस्टम की तर्ज पर रूस के साथ व्यापार करेगा। यानी वह डॉलर से दूर हट जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमत घट सकती है। जब वे देश 'यूरो' में भुगतान करेंगे तो डॉलर का नीचे जाना तय है।
आरबीआई के साथ मिल कर बनाया प्लेटफॉर्म
उन्होंने बताया कि रूस में भारतीय फ्रूट जैम एवं जैली, कॉर्नफ्लैक्स, मूसली, चाय, कॉफी पाउडर, आम, सेब, लीची, चीनी, नमक, काली मिर्च के पाउच, मिल्क पाउडर, फल, सब्जी, चीज, पास्ता का सामान, मक्खन, फ्रूट ड्रिंक, सूप का सामान, मसाले, शहद, बिस्किट्स, अचार, फ्रोजन स्नैक्स, खाद्यान, सॉस, ओट, रेडीमेड खाना, ब्रेड, चावल, बीन्स, कॉर्नफ्लोर पाउडर, सूप स्टिक्स व आलू के चिप्स आदि सामान की विभिन्न पैकिंग में भेजने की मांग सामने आई है। कई दूसरे सामानों की सूची अभी आ रही हैं। अप्रैल 2020 से मार्च 2021 में भारत एवं रूस के बीच कुल 8.1 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था। इसमें भारत से रूस को निर्यात 2.6 बिलियन डॉलर का रहा था। वहीं रूस से आयात 5.48 बिलियन डॉलर का रहा है। वर्तमान हालात में भारत से रूस को निर्यात करने वाले सामान का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। रूस एवं भारत ने स्विफ्ट जैसे एक पेमेंट प्लेटफार्म पर अपना कार्यक्रम पूर्ण कर लिया है। खंडेलवाल ने कहा, यह नया पेमेंट सिस्टम रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया एवं रूस के वीईबी जो रूस का डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन है, के मुख्यालय पर स्थापित होगा।
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