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RBI: ग्राहकों के खातों व लॉकरों से जुड़े दावों के निपटान की प्रक्रिया होगी आसान, गवर्नर बोले- तय होंगे मानक

Wed, 06 Aug 2025 12:12 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 06 Aug 2025 12:12 PM IST
सार

साल 2025 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति का एलान करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बैंक खातों और मृतक बैंक ग्राहकों के सुरक्षित कस्टडी या सुरक्षित जमा लॉकरों में रखी वस्तुओं से जुड़े दावों के निपटान की प्रक्रिया को आसान बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हम इससे जुड़े मानक बनाएंगे। इससे निपटान अधिक सुविधाजनक और सरल होने की उम्मीद है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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RBI to standardise procedure for settlement of claims for accounts, lockers of deceased customers
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक बैंक खातों और लॉकरों के लिए दावा निपटान प्रक्रिया से जुड़े मानक बनाने वाला है। इसका उद्देश्य मृतक ग्राहकों के नामांकित व्यक्तियों के पक्ष में दावों के निपटान की प्रक्रिया को आसान बनाना है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को यह बात कही। मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक आरबीआई रिटेल-डायरेक्ट प्लेटफॉर्म में कार्यक्षमता का विस्तार करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे खुदरा निवेशक भी व्यवस्थित योजनाओं के जरिए ट्रेजरी बिलों में अपना निवेश कर सकेंगे।

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दावों के निपटान की प्रक्रिया को आसान बनाने की हो रही कवायद: संजय मल्होत्रा

साल 2025 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हम बैंक खातों और मृतक बैंक ग्राहकों के सुरक्षित कस्टडी या सुरक्षित जमा लॉकरों में रखी वस्तुओं से जुड़े दावों के निपटान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मानक बनाएंगे। इससे निपटान अधिक सुविधाजनक और सरल होने की उम्मीद है।"

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बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के अंतर्गत जमा खातों, सुरक्षित कस्टडी में रखी गई वस्तुओं या सुरक्षित जमा लॉकरों से जुड़े नामांकन की सुविधा उपलब्ध है। आरबीआई के अनुसार, इसका उद्देश्य ग्राहक की मृत्यु होने पर दावों का शीघ्र निपटान या वस्तुओं की वापसी या सुरक्षित जमा लॉकर की सामग्री को वापस दिलाना व परिवार के सदस्यों को होने वाली कठिनाई को कम करना है।
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मौजूदा निर्देशों के अनुसार बैंकों को सर्वाइवर/नामांकित व्यक्ति/कानूनी उत्तराधिकारियों की ओर से किए गए दावों के शीघ्र और परेशानी मुक्त निपटान की आसान प्रक्रिया अपनाना है। हालांकि विभिन्न बैंकों में प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। एक बयान में कहा गया है, "ग्राहक सेवा से जुड़े मानकों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बैंकों को प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों को मानकीकृत करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में एक मसौदा परिपत्र शीघ्र ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।"

ट्रेजरी बिलों में निवेश के बारे में किया गया यह एलान

वर्तमान में, सभी बैंकों के पास मृतक के आश्रित की ओर से खाते और लॉकर के संबंध में दावों की अपनी-अपनी प्रणाली और प्रक्रियाएं हैं। इन्हें और आसान बनाया जा सकता है। ट्रेजरी बिलों (टी-बिल) में निवेश से जुड़ा भी एलान किया गया है। आरबीआई ने कहा है नई पहलों से निवेशकों को अपने निवेश की व्यवस्थित योजना बनाने में मदद मिलेगी। टी-बिलों के लिए ऑटो-बिडिंग सुविधा, जिसमें निवेश और पुनर्निवेश दोनों विकल्प शामिल हैं, रिटेल डायरेक्ट में सक्षम की गई है। नई कार्यक्षमता से निवेशकों को टी-बिलों की प्राथमिक नीलामी में बोलियों को स्वचालित रूप से लगाने में मदद मिलेगी।



रिटेल डायरेक्ट पोर्टल को नवंबर 2021 में लॉन्च किया गया था ताकि खुदरा निवेशकों को रिटेल डायरेक्ट योजना के तहत रिजर्व बैंक के साथ अपने गिल्ट खाते खोलने में सुविधा हो। यह योजना खुदरा निवेशकों को प्राथमिक नीलामी में सरकारी प्रतिभूतियां (जी-सेक) खरीदने के साथ-साथ द्वितीयक बाजार में जी-सेक खरीदने और बेचने की अनुमति देती है। योजना के शुभारंभ के बाद से, उत्पाद के साथ-साथ भुगतान विकल्पों के संदर्भ में विभिन्न नई सुविधाएं शुरू की गई हैं, जिसके तहत मई 2024 में एक मोबाइल एप भी शुरू किया गया है।

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