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RBI Report: पर्सनल लोन 14 फीसदी बढ़कर 55 लाख करोड़; क्रेडिट कार्ड का बकाया सबसे ज्यादा, गृह ऋण की मांग सबसे कम
Tue, 03 Sep 2024 02:17 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Tue, 03 Sep 2024 02:17 AM IST
सार
भारत में पर्सनल लोन 14.4 फीसदी बढ़कर 55.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। आरबीआई की जारी रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा बकाया क्रेडिट कार्ट धारकों का है।
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आरबीआई (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ओर से आसानी से मिल रहे पर्सनल लोन में भारी तेजी आई है। सालाना आधार पर यह जुलाई के अंत तक 14.4 फीसदी बढ़कर 55.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, गैर खाद्य कर्जों में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी सबसे अधिक 32.9 फीसदी है। इसके बाद सेवाओं की 27.4 फीसदी, उद्योग की 22.2 फीसदी और कृषि एवं इससे संबंधित गतिविधियों की हिस्सेदारी 12.8 फीसदी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के अंत तक क्रेडिट कार्ड का बकाया सबसे तेजी से बढ़ा है। हालांकि, बैंकों की कुल उधारी में इसका हिस्सा एक फीसदी ही है। यह सालाना आधार पर 22 फीसदी तेजी के साथ 2.8 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।
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इसी तरह सोने की जूलरी के एवज में लिया जाने वाला कर्ज 39 फीसदी भारी-भरकम तेजी के साथ बढ़ा है। हालांकि, कुल पर्सनल लोन में इसकी हिस्सेदारी केवल 0.8 फीसदी ही है। इससे पता चलता है कि लोग घंटों में मिल रहे कर्ज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल, सोने के एवज में कर्ज तुरंत मिल जाता है और इसका ब्याज पर्सनल लोन के ही आस-पास होता है।
कृषि पर कर्ज 18.1 फीसदी बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर वृद्धि के बावजूद कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों को दिए जाने वाले कर्ज में 18.1 फीसदी की तेजी आई है। कुल कर्ज 21.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। उद्योग को दिए जाने वाले कर्ज में 13.7 फीसदी की बढ़त आई है।
होम लोन की मांग सबसे कम
आंकड़े बताते हैं कि होम लोन की मांग सबसे कम है। इसकी रफ्तार इस दौरान केवल 12.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। कुल होम लोन का आकार अब 28 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। तमाम आंकड़े बताते हैं कि हाल के समय में शीर्ष 8 शहरों में मकानों की कीमतों में बेतहाशा बढ़त हुई है। हालांकि, बिक्री भी अच्छी खासी हुई है। बावजूद इसके होम लोन की मांग की दर कम ही रही है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, गैर खाद्य कर्जों में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी सबसे अधिक 32.9 फीसदी है। इसके बाद सेवाओं की 27.4 फीसदी, उद्योग की 22.2 फीसदी और कृषि एवं इससे संबंधित गतिविधियों की हिस्सेदारी 12.8 फीसदी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के अंत तक क्रेडिट कार्ड का बकाया सबसे तेजी से बढ़ा है। हालांकि, बैंकों की कुल उधारी में इसका हिस्सा एक फीसदी ही है। यह सालाना आधार पर 22 फीसदी तेजी के साथ 2.8 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।
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इसी तरह सोने की जूलरी के एवज में लिया जाने वाला कर्ज 39 फीसदी भारी-भरकम तेजी के साथ बढ़ा है। हालांकि, कुल पर्सनल लोन में इसकी हिस्सेदारी केवल 0.8 फीसदी ही है। इससे पता चलता है कि लोग घंटों में मिल रहे कर्ज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल, सोने के एवज में कर्ज तुरंत मिल जाता है और इसका ब्याज पर्सनल लोन के ही आस-पास होता है।
कृषि पर कर्ज 18.1 फीसदी बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर वृद्धि के बावजूद कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों को दिए जाने वाले कर्ज में 18.1 फीसदी की तेजी आई है। कुल कर्ज 21.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। उद्योग को दिए जाने वाले कर्ज में 13.7 फीसदी की बढ़त आई है।
होम लोन की मांग सबसे कम
आंकड़े बताते हैं कि होम लोन की मांग सबसे कम है। इसकी रफ्तार इस दौरान केवल 12.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। कुल होम लोन का आकार अब 28 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। तमाम आंकड़े बताते हैं कि हाल के समय में शीर्ष 8 शहरों में मकानों की कीमतों में बेतहाशा बढ़त हुई है। हालांकि, बिक्री भी अच्छी खासी हुई है। बावजूद इसके होम लोन की मांग की दर कम ही रही है।