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RBI MPC: चालू वित्तीय वर्ष की आखिरी एमपीसी बैठक के बाद जीडीपी और महंगाई पर क्या बोले गवर्नर मल्होत्रा? जानिए

Fri, 07 Feb 2025 01:54 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 07 Feb 2025 01:54 PM IST
सार

RBI MPC: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहली बार केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों का एलान किया। एमपीसी के नए एलानों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगले वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।आरबीआई गवर्नर को खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी नरमी रहने की उम्मीद है।

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RBI MPC: Guv says, Indian economy will grow at a rate of 6.7% in next FY, this is what he said on inflation
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहली बार केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों का एलान किया। एमपीसी के नए एलानों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगले वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह आंकड़ा 31 मार्च, 2025 को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनुमानित 6.4 प्रतिशत से अधिक है। साथ ही, आरबीआई गवर्नर ने खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी की उम्मीद के बीच अगले वित्त वर्ष (2025-26) में खुदरा महंगाई दर 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। और चालू वित्त वर्ष में इसके 4.8 प्रतिशत के अनुमान को बरकरार रखा।

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जीडीपी वृद्धि दर पर क्या बोले गवर्नर संजय मल्होत्रा?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष के लिए आखिरी और अपनी पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रबी फसल की अच्छी संभावनाओं और औद्योगिक गतिविधियों में अपेक्षित सुधार से 2025-26 में आर्थिक वृद्धि को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मांग पक्ष के प्रमुख चालकों में एक केंद्रीय बजट 2025-26 में कर राहत है, इस एलान के बाद घरेलू खपत मजबूत रहने की उम्मीद है।

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7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारत निश्चित रूप से 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर सकता है और देश को इसकी आकांक्षा रखनी चाहिए। एमपीसी के फैसलों की घोषणा के बाद प्रेसवार्ता के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था के और अधिक तेजी से बढ़ने की संभावना है, उन्होंने कहा, "मैं पूरी ईमानदारी से कहना चाहूंगा कि निश्चित रूप से भारत 7 प्रतिशत या इससे अधिक की विकास दर हासिल कर सकता है। हमें निश्चित रूप से इसकी आकांक्षा करनी चाहिए।"

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आयकर में छूट दिए जाने से नहीं बढ़ेगी महंगाई

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट प्रस्तावों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आयकर में छूट से मुद्रास्फीति नहीं बढ़ेगी, बल्कि विकास को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक महामारी के बाद अर्थव्यवस्था के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद बजट 2025-26 में उपभोग को बढ़ावा देने के लिए मध्यम वर्ग को अबतक की सबसे बड़ी आयकर छूट प्रदान करने की घोषणा की है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 की जुलाई-सितंबर अवधि में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर सात तिमाहियों के निचले स्तर 5.4 प्रतिशत पर आ गई थी, जबकि आरबीआई ने स्वयं सात प्रतिशत का अनुमान लगाया था।

पूंजीगत व्यय पर जोर दिए जाने से निवेश में सुधार की उम्मीद

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि उच्च क्षमता उपयोग स्तर, वित्तीय संस्थानों व कंपनियों के बेहतर बही-खाते और सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर दिए जाने से स्थिर निवेश में सुधार की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अर्थव्यवस्था के अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 7.0 प्रतिशत और तीसरी तथा चौथी तिमाही में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। जोखिम दोनों ओर समान रहेगा।’’

संसद में पिछले सप्ताह पेश आर्थिक समीक्षा में अनुमान लगाया गया था कि मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी बातों के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, हालांकि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक व विवेकपूर्ण नीति प्रबंधन की आवश्यकता होगी। चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर 6.4 प्रतिशत पर आने का अनुमान है, जो दशकीय औसत के करीब है।

आरबीआई गवर्नर ने महंगाई पर क्या कहा?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि आपूर्ति के मार्चे पर किसी झटके की आशंका नहीं है। इसके साथ, खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर रहने, जाड़े में सब्जियों के दाम में नरमी तथा रबी फसलों को लेकर अनुकूल संभावनाओं को देखते हुए खाद्य मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय कमी आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति बढ़ने का अनुमान है, लेकिन यह मध्यम स्तर पर रहेगी। मल्होत्रा ने कहा कि दूसरी तरफ ऊर्जा के दाम में अस्थिरता और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी अनिश्चितता को देखते हुए मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, 2024-25 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष में 4.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

अगले साल मानसून सामान्य रहने का अनुमान

मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अपनी पहली बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, ‘‘अगले साल मानसून सामान्य रहने के अनुमान के साथ 2025-26 में सीपीआई मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में इसके 4.5 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 4.0 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने की संभावना है।’’

आरबीआई ने अपनी पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में 2024-25 के लिए सकल मुद्रास्फीति 4.8 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। चौथी तिमाही में इसके 4.5 प्रतिशत पर रहने की संभावना जतायी गयी थी। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत तथा दूसरी तिमाही में चार प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।



उल्लेखनीय है कि खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में घटकर चार महीने के निचले स्तर 5.22 प्रतिशत पर आ गई है। इसका मुख्य कारण सब्जियों सहित खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी आना है। नवंबर में यह 5.48 प्रतिशत पर थी। जुलाई-अगस्त के दौरान यह औसतन 3.6 प्रतिशत थी। उसके बाद सितंबर में 5.5 प्रतिशत और अक्टूबर, 2024 में 6.2 प्रतिशत हो गई। चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक कुल मुद्रास्फीति में सब्जियों और दालों का योगदान 32.3 प्रतिशत था।

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