Inflation: आरबीआई बुलेटिन में दावा- मौद्रिक नीति का दिख रहा असर, महंगाई में पर्याप्त कमी
केंद्रीय बैंक के ताजा बुलेटिन में कहा गया है कि मौद्रिक नीति के तहत उठाए गए कदमों से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित (सीपीआई) महंगाई इस साल मार्च में घटकर आरबीआई के 6 फीसदी के संतोषजनक दायरे से नीचे आ गई और 5.66 फीसदी रह गई।
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उच्च महंगाई पर काबू पाने में आरबीआई के मौद्रिक नीति का असर दिख रहा है। असरदार मौद्रिक नीति की वजह से महंगाई में पर्याप्त कमी आई है। केंद्रीय बैंक के ताजा बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक वाले लेख में कहा गया है कि महंगाई को चार फीसदी के लक्ष्य तक या उसके करीब लाने तक सख्ती जारी रहेगी।
लेख में कहा गया है कि मौद्रिक नीति के तहत उठाए गए कदमों से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित (सीपीआई) महंगाई इस साल मार्च में घटकर आरबीआई के 6 फीसदी के संतोषजनक दायरे से नीचे आ गई और 5.66 फीसदी रह गई। यह दिसंबर, 2021 के बाद खुदरा महंगाई का निचला स्तर है। अप्रैल, 2022 में सीपीआई महंगाई 7.8 फीसदी पर पहुंच गई थी। लेख के मुताबिक, महंगाई में आगे और कमी आएगी। 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में इसके 5.2 फीसदी पर रहने का अनुमान है। एजेंसी
जनवरी-फरवरी में 6% से ज्यादा रही थी सीपीआई
केंद्रीय बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए मई, 2022 से ब्याज दर में 2.50 फीसदी की वृद्धि की है। हालांकि, इस माह की शुरुआत में रेपो दर में वृद्धि नहीं की गई। सरकार ने आरबीआई को जिम्मेदारी दी है कि खुदरा महंगाई 2% घट-बढ़ के साथ चार फीसदी पर रहे।
- नवंबर-दिसंबर, 2022 में खुदरा महंगाई के अस्थायी रूप से 6 फीसदी के दायरे में आने से राहत मिली थी।
- लेकिन, जनवरी-फरवरी, 2023 में यह फिर बढ़कर 6 फीसदी के संतोषजनक स्तर से ऊपर पहुंच गई थी।
वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा की अगुवाई में लिखे लेख में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक स्थिति अत्यधिक अनिश्चितता से घिरी हुई है। वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।
बेहतर फसल और निवेश बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत
लेख के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है। भारत में सकल मांग की स्थिति मजबूत बनी हुई है। मांग को होटल जैसे संपर्क से जुड़े सेवा क्षेत्रों से समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, रबी फसल अच्छी होने की उम्मीद, बुनियादी ढांचे पर जोर और चुनिंदा क्षेत्रों में कॉरपोरेट निवेश बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत हैं।
2024 की शुरुआत में रेपो दर में कटौती कर सकता है केंद्रीय बैंक : विश्लेषक
विश्लेषकों की मानें तो आरबीआई इस वर्ष नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का रुख कायम रख सकता है। 2024 की शुरुआत में दरों में कटौती की जा सकती है।
- एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने कहा, हमारा अनुमान है कि आरबीआई 2023 में भी दरों में कोई परिवर्तन नहीं करेगा। मार्च, 2024 में खत्म होने वाली तिमाही में दरों में 0.25 फीसदी की कटौती हो सकती है।
- कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि अप्रैल की बैठक के ब्योरे से महंगाई परिदृश्य को लेकर सदस्यों की चिंता झलकती है।
- नोमुरा का अनुमान है कि अक्तूबर, 2023 से प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती हो सकती है।