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RBI: बैंकों की ओर से लोन डिफाल्ट होने पर दंडात्मक ब्याज लगाने पर रोक, एक जनवरी 2024 से प्रभावी होगा नियम
Fri, 18 Aug 2023 11:52 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 18 Aug 2023 11:52 AM IST
सार
Reserve Bank of India: आरबीआई की ओर से जारी संशोधित नियम में कहा गया है कि दंडात्मक शुल्क की मात्रा किसी विशेष ऋण/उत्पाद श्रेणी के भीतर भेदभाव किए बिना ऋण अनुबंध के भौतिक नियमों और शर्तों के "उचित और गैर-अनुपालन के अनुरूप" होनी चाहिए।
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : Social Media
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए नियमों ने करोड़ों लोगों को बड़ी राहत दी है। आरबीआई ने लोन खातों में पेनाल्टी और ब्याज दरों को लेकर नियमों में बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने ऋण खाते पर जुर्माना लगाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही आरबीआई ने बताया है कि नए नियम अगले साल से लागू हो जाएंगे। आरबीआई का यह नया नियम सभी बैंकों पर लागू होगा। नए नियम कमर्शियल, एनबीएफसी, कोऑपरेटिव बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी, नाबार्ड, सिडबी जैसे सभी बैंकों पर लागू होंगे
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बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की ओर से राजस्व बढ़ाने के साधन के रूप में दंडात्मक ब्याज या पेनाल्टी का इस्तेमाल करने की परंपरा से चिंतित रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को संशोधित नियम जारी किए। अब ऋण चुकाने में चूक के मामले में बैंक केवल 'उचित' दंडात्मक शुल्क ही लगा सकेंगे।
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रिजर्व बैंक ने 'ऋण खातों में उचित ऋण प्रथा-दंड शुल्क' पर अपनी अधिसूचना में कहा कि बैंकों और अन्य ऋणदाता संस्थानों को एक जनवरी 2024 से दंडात्मक ब्याज लगाने की अनुमति नहीं होगी। रिजर्व बैंक ने एक अधिसूचना में कहा, 'कर्जदार की ओर से ऋण अनुबंध के नियमों और शर्तों का अनुपालन नहीं करने पर यदि जुर्माना वसूला जाता है तो उसे 'दंडात्मक शुल्क' माना जाएगा और इसे 'दंडात्मक ब्याज' के रूप में नहीं लगाया जाएगा जो अग्रिमों पर लगाए जाने वाले ब्याज की दर में जोड़ा जाता है।
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आरबीआई की ओर से जारी संशोधित नियम में कहा गया है कि दंडात्मक शुल्क की मात्रा किसी विशेष ऋण/उत्पाद श्रेणी के भीतर भेदभाव किए बिना ऋण अनुबंध के भौतिक नियमों और शर्तों के "उचित और गैर-अनुपालन के अनुरूप" होनी चाहिए। इसके अलावा, दंड शुल्क का कोई पूंजीकरण नहीं होगा- इस तरह के आरोपों पर आगे ब्याज की गणना नहीं की जाएगी।
आरबीआई ने कहा कि हालांकि, ये निर्देश क्रेडिट कार्ड, बाहरी वाणिज्यिक उधार, व्यापार क्रेडिट और संरचित दायित्वों पर लागू नहीं होंगे, जो उत्पाद-विशिष्ट निर्देशों के तहत आते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि कई बैंक और एनबीएफसी कर्जदार की ओर से चूक या अनुपालन नहीं करने के मामले में लागू ब्याज दरों के अलावा दंडात्मक ब्याज दरों का इस्तेमाल करते हैं।
केंद्रीय बैंक ने कहा, दंडात्मक ब्याज/शुल्क लगाने का इरादा अनिवार्य रूप से ऋण अनुशासन की भावना पैदा करना है और इस तरह के शुल्क का उपयोग अनुबंधित ब्याज दर के अलावा राजस्व बढ़ाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। संशोधित मानदंड जारी करते हुए आरबीआई की ओर से कहा गया है कि हालांकि पर्यवेक्षी समीक्षाओं से पता चला है कि इकाइयों द्वारा विनियमित इकाइयों के बीच दंडात्मक ब्याज/शुल्क लगाने के संबंध में अलग-अलग तरीके व्यवहार में हैं, जिससे ग्राहकों की शिकायतें बढ़ रही हैं और विवाद उत्पन्न होते हैं।