Rare Earth Mineral: रेयर अर्थ मैग्नेट व महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन, सामने आया यह प्लान
भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बताया कि सरकार घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रही है। इस बीच केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल मिशन से देश में इन खनिजों की खोज और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रही है। भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कहा कि चीन की पकड़ वाले इस क्षेत्र में हाल के आपूर्ति व्यवधानों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: SBI: FSIB ने एसबीआई के एमडी पद के लिए रवि रंजन का नाम सुझाया, अंतिम निर्णय पीएम के नेतृत्व वाली समिति लेगी
उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार का लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि सरकार एक ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत उद्योग को पूंजीगत और संचालन खर्च दोनों के लिए लक्षित सहायता दी जाएगी। इसका मकसद लागत के अंतर को कम करना, प्रमुख उपकरणों पर लगने वाले भारी टैरिफ से राहत देना और बढ़ती वैश्विक पाबंदियों के बीच आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करना है।
इससे पहले जुलाई में मंत्री ने कहा था कि भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन को सब्सिडी देने के लिए 1,345 करोड़ रुपये की योजना के लिए परामर्श चल रहा है। इसमें दो चुनिंदा निर्माताओं को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है।
चीन की ओर से प्रमुख धातुओं के निर्यात पर हाल ही में लगाए गए प्रतिबंध के कारण भारत सहित कई देशों में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर चिप्स के विनिर्माण में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हो गया है।
क्रिटिकल मिनरल मिशन से महत्वपूर्ण खनिजों की क्षेत्र को गति मिली
इस बीच केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल मिशन देश में इन खनिजों की खोज और उत्पादन को नई गति देगा।
रेड्डी ने बताया कि भारत सरकार ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य देश और विदेश दोनों में खनिजों की खोज और खनन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही विभिन्न देशों से इनके आयात की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए सरकार ने आयात पर शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के लिए 32,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
भारत सरकार ने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हेतु एक मजबूत ढांचा स्थापित करने के लिए 2025 में राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) की शुरुआत की। इस मिशन के अंतर्गत, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) को 2024-25 से 2030-31 तक 1,200 अन्वेषण परियोजनाओं का संचालन करने का कार्य सौंपा गया है।