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CRISIL: घर में पकने वाली थाली की कीमत एक साल में 13% घटी; आलू, टमाटर-प्याज के भाव घटने का नवंबर में दिखा असर

Tue, 09 Dec 2025 04:54 AM IST
पवन पांडेय अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 09 Dec 2025 04:54 AM IST
सार

CRISIL Report: एक साल में घर बनने वाले खाने की थाली की कीमत में करीब 13 फीसदी कमी देखने मिली है। नवंबर 2024 में शाकाहारी थाली की कीमत 32.7 रुपये थी जो इस साल घटकर 28.4 रुपये रह गई। वहीं मांसाहारी थाली की कीमत 61.5 रुपये से 53.8 रुपये पहुंच गई।

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Price of home-cooked meals fell 13% in one year, CRISIL report on prices of potatoes, tomatoes, onions, pulses
फूड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Istock

विस्तार

सब्जियों और दालों के भाव घटने से घर में पकने वाली शाकाहारी और मांसाहारी थाली एक साल में 13 फीसदी तक सस्ती हो गई। क्रिसिल रेटिंग के अनुसार, नवंबर में शाकाहारी थाली की कीमत 28.4 रुपये रह गई जो नवंबर, 2024 में 32.7 रुपये थी। इसी दौरान मांसाहारी थाली का दाम 61.5 रुपये से घटकर 53.8 रुपये पर आ गया।
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अक्तूबर में क्या रही थाली की कीमत?
क्रिसिल के अनुसार, मासिक आधार पर अक्तूबर में मांसाहारी थाली की कीमत 54.4 रुपये और शाकाहारी थाली की कीमत 27.80 रुपये रही थी। घर पर थाली बनाने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में कीमतों के आधार पर की जाती है। आलू व टमाटर की कीमतों में क्रमशः 5 और फीसदी की वृद्धि हुई। इससे थालियों की कुल लागत में वृद्धि हुई। अन्य प्रमुख वस्तुओं की कीमतें लगभग स्थिर रहीं।
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टमाटर के दाम सबसे अधिक घटे
अधिक आपूर्ति के कारण टमाटर की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 17 फीसदी की गिरावट आई। उच्च आधार के कारण आलू के दाम इस दौरान 29 फीसदी घट गए। पिछले रबी सीजन से अधिक स्टॉक की उपलब्धता और कमजोर निर्यात के कारण प्याज की कीमतों में 53 फीसदी की कमी आई है। स्टॉक में वृद्धि से चालू वित्त वर्ष में दालों की कीमतों में 17 फीसदी की गिरावट आई है। इसकी वजह आयात में तेजी है।

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वनस्पति तेलों के भाव बढ़े
त्योहारी सीजन में ज्यादा मांग के चलते वनस्पति तेल और गैस सिलिंडर की कीमतें 6 फीसदी बढ़ीं। इससे थालियों की कुल लागत में गिरावट सीमित हो गई। मांसाहारी थाली की कीमत में गिरावट चिकन की कीमतों में 12 फीसदी की कमी के कारण आई है जो इसकी कुल लागत का लगभग 50 फीसदी है। सब्जियों और दालों की कम कीमतों ने भी इस गिरावट में योगदान दिया है।

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