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शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशक: सितंबर में ₹20,974 करोड़ निकाले; इस साल ₹2.45 लाख करोड़ की बिकवाली
Sun, 20 Sep 2026 02:22 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 20 Sep 2026 02:22 PM IST
सार
सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 20,974 करोड़ रुपये की निकासी की है। अमेरिकी ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड, महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और भू-राजनीतिक तनाव के बीच एफपीआई का रुख एक बार फिर सतर्क हुआ है। वर्ष 2026 में अब तक कुल निकासी 2.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
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एफपीआई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर होते रुपये के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) एक बार फिर सतर्क हो गए हैं। विदेशी निवेशकों ने सितंबर महीने में 18 तारीख तक भारतीय इक्विटी (शेयर बाजार) से 20,974 करोड़ रुपये की भारी निकासी की है। सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड) के आंकड़ों के मुताबिक, यह बिकवाली ऐसे समय में आई है जब इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लौटे थे। जुलाई में विदेशी निवेशकों ने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
सितंबर की इस हालिया बिकवाली के साथ, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की कुल निकासी से भी कहीं अधिक है। हालांकि, आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि इस महीने प्राइमरी मार्केट के जरिए विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहा है।
बिकवाली के तीन मुख्य कारण
चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ ने विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के लिए तीन प्रमुख वजहों को जिम्मेदार बताया है-
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रुपया भी दबाव में है और पिछले सप्ताह इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जो चार महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। रुपया डॉलर के मुकाबले 95.92-95.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था और कारोबार के दौरान इसने 96 का स्तर भी पार कर लिया था।
कच्चे तेल और डॉलर का असर
निवेश प्लेटफॉर्म 'ट्रैक' के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते ने कहा कि सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली 'कच्चे तेल और डॉलर' की कहानी है, न कि भारत की। जब कच्चे तेल के दाम चढ़ते हैं और अमेरिकी यील्ड मजबूत होती है, तो हर उभरते बाजार से पैसा बाहर निकलता है। भारत के साथ भी यही हो रहा है।
वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि आगे चलकर विदेशी निवेशकों का रुख ईरान-अमेरिका विवाद और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। कच्चा तेल महंगा होना और 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5 प्रतिशत पर रहना भारतीय शेयर बाजार और विदेशी निवेश के लिए नकारात्मक है। हालांकि, मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था और बेहतर आय वृद्धि की उम्मीदें बाजार के लिए सकारात्मक पहलू हैं।
डेट मार्केट से भी निकाले पैसे
शेयर बाजार के अलावा विदेशी निवेशकों ने समीक्षाधीन अवधि में डेट मार्केट से भी पैसे निकाले हैं। उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) से 10,296 करोड़ रुपये, वॉलंटरी रिटेंशन रूट (वीआरआर) के रास्ते 1,817 करोड़ रुपये और जनरल रूट के तहत 1,068 करोड़ रुपये की निकासी की है।
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सितंबर की इस हालिया बिकवाली के साथ, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की कुल निकासी से भी कहीं अधिक है। हालांकि, आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि इस महीने प्राइमरी मार्केट के जरिए विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहा है।
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बिकवाली के तीन मुख्य कारण
चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ ने विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के लिए तीन प्रमुख वजहों को जिम्मेदार बताया है-
- अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और मजबूत बॉन्ड यील्ड
- भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल के ऊंचे भाव
- भारतीय रुपये में लगातार आती कमजोरी
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रुपया भी दबाव में है और पिछले सप्ताह इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जो चार महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। रुपया डॉलर के मुकाबले 95.92-95.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था और कारोबार के दौरान इसने 96 का स्तर भी पार कर लिया था।
कच्चे तेल और डॉलर का असर
निवेश प्लेटफॉर्म 'ट्रैक' के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते ने कहा कि सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली 'कच्चे तेल और डॉलर' की कहानी है, न कि भारत की। जब कच्चे तेल के दाम चढ़ते हैं और अमेरिकी यील्ड मजबूत होती है, तो हर उभरते बाजार से पैसा बाहर निकलता है। भारत के साथ भी यही हो रहा है।
वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि आगे चलकर विदेशी निवेशकों का रुख ईरान-अमेरिका विवाद और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। कच्चा तेल महंगा होना और 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5 प्रतिशत पर रहना भारतीय शेयर बाजार और विदेशी निवेश के लिए नकारात्मक है। हालांकि, मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था और बेहतर आय वृद्धि की उम्मीदें बाजार के लिए सकारात्मक पहलू हैं।
डेट मार्केट से भी निकाले पैसे
शेयर बाजार के अलावा विदेशी निवेशकों ने समीक्षाधीन अवधि में डेट मार्केट से भी पैसे निकाले हैं। उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) से 10,296 करोड़ रुपये, वॉलंटरी रिटेंशन रूट (वीआरआर) के रास्ते 1,817 करोड़ रुपये और जनरल रूट के तहत 1,068 करोड़ रुपये की निकासी की है।