SEBI: ब्लॉक डील नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, न्यूनतम ऑर्डर साइज 25 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव
सेबी ने प्रस्ताव रखा है कि ब्लॉक डील विंडो में ट्रेड निष्पादन के लिए न्यूनतम ऑर्डर साइज 25 करोड़ रुपये होना चाहिए। फिलहाल इसकी मौजूदा सीमा 10 करोड़ रुपये है। परामर्श पत्र में ब्लॉक डील विंडो के संचालन समय का भी उल्लेख किया गया है।
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विस्तार
बाजार नियाक सेबी ब्लॉक जील फ्रेमवर्क में संशोधन पर विचार कर रहा है। इसमें न्यूनतम ऑडर आकार को मौजूदा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। मौजूदा सीमा 2017 से लागू थी।
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ब्लॉक डील से क्या समझते हैं?
ब्लॉक डील शेयर बाजार में एक बड़ा सौदा होता है, जो किसी खरीदार और विक्रेता के बीच एक ही लेन-देन के जरिए पूरा किया जाता है। इसे केवल शेयर बाजारों द्वारा दिन में दो बार उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष 15 मिनट की विंडो के दौरान ही अंजाम दिया जा सकता है।
न्यूनतम ऑर्डर सीमा 25 करोड़ रखने का प्रस्ताव
अपने परामर्श पत्र में सेबी ने प्रस्ताव रखा है कि ब्लॉक डील विंडो में ट्रेड निष्पादन के लिए न्यूनतम ऑर्डर साइज 25 करोड़ रुपये होना चाहिए। इसके अलावा, ब्लॉक डील विंडो में किया गया हर सौदा डिलीवरी आधारित होना चाहिए और उसे न तो स्क्वायर ऑफ किया जा सकेगा और न ही रिवर्स किया जा सकेगा।
प्राइसिंग व्यवस्था की हो समीक्षा
उच्च सीमा तय करने के साथ ही सेबी ने ऐसे सौदों की प्राइसिंग व्यवस्था की समीक्षा करने का प्रस्ताव भी रखा है। नियामक गैर-डेरिवेटिव शेयरों के लिए प्राइस बैंड को बढ़ाकर अधिकतम 3 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रहा है, जबकि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) स्क्रिप्स के लिए मौजूदा 1 प्रतिशत बैंड को बरकरार रखा जाएगा। इस कदम से बाजार में हेरफेर की आशंका कम होने की उम्मीद है। फिलहाल, ऐसे सौदे केवल पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस के दोनों ओर 1 प्रतिशत के दायरे में ही किए जा सकते हैं।
ब्लॉक डील विंडो के संचालन समय
परामर्श पत्र में ब्लॉक डील विंडो के संचालन समय का भी उल्लेख किया गया है। सुबह का सत्र 8:45 बजे से 9 बजे तक चलेगा, जिसमें सौदे पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस पर होंगे। दोपहर का सत्र 2:05 बजे से 2:20 बजे तक रहेगा और इसमें सौदे कैश सेगमेंट में 1:30 बजे से 2 बजे के बीच हुई डील्स के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) को रेफरेंस प्राइस मानकर किए जाएंगे।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सेबी का कदम
इन विंडोज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि खरीदारों और विक्रेताओं को पहले से तय बड़ी शेयर डील्स को अंजाम देने का प्लेटफॉर्म मिल सके। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सेबी ने कहा है कि स्टॉक एक्सचेंज उसी दिन बाजार बंद होने के बाद स्क्रिप का नाम, क्लाइंट का नाम, शेयरों की संख्या और ट्रेडेड प्राइस जैसी जानकारी सार्वजनिक करेंगे। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इन प्रस्तावों पर जनता से 15 सितंबर तक टिप्पणियां मांगी हैं।