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Budget 2025: पीएम मोदी अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से मिले; बजट 2025-26 पर किया विचार-विमर्श, लिए सुझाव
Tue, 24 Dec 2024 03:48 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 24 Dec 2024 03:48 PM IST
सार
Budget 2025: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी बजट के लिए अपने विचार और सुझाव जानने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से मिले। बैठक में सीतारमण, नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम, मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन और सुरजीत भल्ला व डीके जोशी समेत कई जाने-माने अर्थशास्त्री शामिल हुए। आइए इस बारे में और जानें।
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अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक में पीएम मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।
- फोटो : ANI
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी बजट के लिए अपने विचार और सुझाव जानने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से मुलाकात की। आगामी बजट पर उनके विचार और सुझाव जानने के लिए हुई बैठक में पीएम मोदी ने रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता तथा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजी जुटाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। नीति आयोग में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थशास्त्रियों तथा विशेषज्ञों के 2025-26 के बजट को लेकर उनके विचारों और सुझावों को सुना।
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बैठक में उपस्थित जाने-माने अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों में सुरजीत एस भल्ला, अशोक गुलाटी, सुदीप्तो मंडल, धर्मकीर्ति जोशी, जन्मेजय सिन्हा, मदन सबनवीस, अमिता बत्रा, रिधम देसाई, चेतन घाटे, भरत रामास्वामी, सौम्य कांति घोष, सिद्धार्थ सान्याल, लवीश भंडारी, रजनी सिन्हा, केशब दास, प्रीतम बनर्जी, राहुल बाजोरिया, निखिल गुप्ता और शाश्वत आलोक शामिल थे। आगामी बजट पर उनके विचार और सुझाव जानने के लिए हुई बैठक में रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता तथा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजी जुटाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
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नीति आयोग में हुई इस बैठक में शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार बाजार की उभरती जरूरतों के साथ जोड़ने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और स्थायी ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने, निजी निवेश को आकर्षित करने तथा आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने को लेकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कोष जुटाने पर भी सुझाव दिए गए।
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यह बैठक आर्थिक वृद्धि में आई सुस्ती के बीच हुई है। बता दें कि देश की आर्थिक वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर 5.4 प्रतिशत रही जबकि जून तिमाही में यह 6.7 प्रतिशत थी। हाल ही में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को सात प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। इसका कारण निजी निवेश और घरों की मांग में उम्मीद से कम वृद्धि है।