फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Only 10 per cent of the loan amount could be recovered in IBC

संसदीय समिति की रिपोर्ट: आईबीसी में वसूली जा सकी कर्ज की सिर्फ 10 फीसदी राशि

Wed, 04 Aug 2021 07:45 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 04 Aug 2021 07:45 AM IST
सार

स्थायी समिति ने कहा है कि कर्जदाताओं को मूल राशि का 95% तक छोड़ना पड़ता है, जिसका उन्हें भारी नुकसान होता है। आईबीसी बोर्ड को अधिकतम हेयरकट को लेकर कानून बनाने चाहिए।
 

विज्ञापन
Only 10 per cent of the loan amount could be recovered in IBC
संसद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

डिफॉल्टर कंपनियों से कर्ज वसूली के लिए बना दिवालिया एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) अपने मूल उद्देश्यों से भटक गया है। आईबीसी पर बनी संसद की वित्तीय स्थायी समिति ने मंगलवार को पेश अपनी रिपोर्ट कहा है कि इस कानून के तहत कर्ज समाधान में न सिर्फ ज्यादा समय लग रहा, बल्कि कर्ज की राशि का 95% तक हेयरकट करना पड़ता है।

विज्ञापन


समिति के अनुसार, आईबीसी में अब तक हुए कर्ज समाधान के तहत मूल राशि की 10 फीसदी ही वसूली की जा सकी है। कानून में बार-बार हुए बदलावों की वजह से इसका मूल स्वरूप और उदृदेश्य दोनों खत्म हो रहा है। आईबीसी के तहत दिवालिया कंपनियों के कर्ज समाधान को 180 दिन में पूरा करना होता है।
विज्ञापन


हकीकत ये है कि अभी 13 हजार मामले लंबित हैं, जिनकी समाधान प्रक्रिया 180 दिन से अधिक समय से चल रही है। इन मामलों में करीब 9 लाख करोड़ रुपये फंसे हैं। यह कानून के तहत आए कुल मामलों का करीब 71 फीसदी है, जो समाधान में हो रही लेटलतीफी की वास्तविक तस्वीर पेश करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


समाधान पेशेवर की नियुक्ति का बने नियम
स्थायी समिति ने कहा है कि कर्जदाताओं को मूल राशि का 95% तक छोड़ना पड़ता है, जिसका उन्हें भारी नुकसान होता है। आईबीसी बोर्ड को अधिकतम हेयरकट को लेकर कानून बनाने चाहिए।

इसके अलावा कई अनुभवहीन और फ्रेशर्स को समाधान पेशेवर नियुक्त कर दिया जाता है। इनकी नियुक्ति व चयन के लिए भी बोर्ड को मानक बनाना चाहिए। ज्यादा कुशल और पेशेवरों की बड़ी संख्या की भी जरूरत है।

हालिया संशोधन से एमएसएमई को फायदा
आईबीसी संशोधन 2021 के जरिये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए पहले से तैयार समाधान ढांचा पेश किया जाएगा। इसका लाभ महामारी से प्रभावित एमएसएमई क्षेत्र को मिल सकता है।


समिति ने कहा, बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटे उद्यमों से कर्ज वसूली आसान रहती है। इसमें कर्जदाताओं को ज्यादा हेयरकट की गंुजाइश भी नहीं होती। हालिया संशोधन में पहले से ही समाधान का ढांचा और उसकी राशि आदि तय कर दी जाएगी। इस पर कर्जदाता, उद्यम और पेशेवरों की सलाह के बाद फैसला आसान होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed