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नीति आयोग का दावा, आगामी वर्षों में दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी भारतीय अर्थव्यवस्था
Mon, 07 Dec 2020 04:14 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Mon, 07 Dec 2020 04:14 PM IST
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भारतीय अर्थव्यवस्था शेयर बाजार
- फोटो : pixabay
देश की अर्थव्यवस्था सुधरने लगी है और इसे लेकर एक अच्छी खबर आई है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी। सभी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का उपयोग किया जाएगा।
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नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2021-22 के अंत यानी मार्च 2022 तक देश की आर्थिक वृद्धि दर कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी से पहले के स्तर पर ही पहुंच जाने की संभावना जताई है। इससे पहले रविवार को कुमार ने कहा था कि आर्थिक वृद्धि को लेकर यह उम्मीद चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की संकुचन दर आठ फीसदी से कम रहने की संभावना के चलते जगी है।
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Indian economy will be among top economies in the world in next few years using science, technology, & innovation in all sectors, bouncing back soon from after-effects of COVID-19: NITI Aayog Vice Chairman Rajiv Kumar (file photo) pic.twitter.com/IfrxLSlAmP
— ANI (@ANI) December 7, 2020
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तेजी से रिकवरी कर रही है अर्थव्यवस्था
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी चालू वित्त वर्ष (2020-21) के संशोधित पूर्वानुमान में आर्थिक वृद्धि दर के माइनस 7.5 फीसदी रहने की संभावना जाहिर की है, जबकि पहले इसके माइनस 9.5 फीसदी रहने का पूर्वानुमान जताया गया था। भारतीय अर्थव्यवस्था सितंबर तिमाही में लगाए गए अनुमान के मुकाबले ज्यादा तेजी से रिकवरी कर रही है। इसका एक कारण विनिर्माण के क्षेत्र में उछाल आना है, जो जीडीपी को 7.5 फीसदी के कम सिकुड़न वाले स्तर पर पहुंचने में मदद कर रहा है और आगे बेहतर उपभोक्ता मांग के लिए उम्मीदें पैदा कर रहा है।
संपत्ति मुद्रीकरण को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राजीव कुमार ने कहा कि, यह जारी प्रक्रिया है और इसने उच्च स्तर पर बहुत सारा आकर्षण हासिल किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, हम लगातार इसे आगे बढ़ाते रहेंगे और इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि संपत्ति मुद्रीकरण का लक्ष्य हासिल हो जाए।
विनिवेश को लेकर ये है सरकार की योजना
बता दें कि सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान विनिवेश के जरिए 2.10 लाख करोड़ रुपये की रकम उगाहना चाहती है। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (सीपीएसई) भी शामिल हैं, जिनकी 1.20 लाख करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बेची जाएगी। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री से 90 हजार करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।
रसायन मुक्त खेती के कार्यक्रमों को मिलेगा बढ़ावा
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने भारतीय कृषि क्षेत्र को लेकर कहा कि नीति आयोग अब रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूती से आगे बढ़ाएगा, जो कृषि उत्पादन की लागत को नाटकीय तरीके से कम करने की क्षमता रखते हैं और पर्यावरण पर भी प्राकृतिक प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा, प्राकृतिक खेती को पूरे देश में फैलने से भारतीय कृषि क्षेत्र ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक बनेगा और यह किसानों की आय पर भी महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव डालने का वादा करेगा।