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Global Economy: 2022 से कठिन होगा नया साल, मंदी में फंसेगी दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था

Tue, 03 Jan 2023 01:17 AM IST
Amit Mandal एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: Amit Mandal Updated Tue, 03 Jan 2023 01:17 AM IST
सार

आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि दुनिया की तीनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं चाहे वह अमेरिका हो या यूरोपीय देश या चीन...सभी एक साथ धीमे हो रहे हैं। इसका असर काफी गहरा होने वाला है।

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New year will be tougher than 2022, one-third of the world's economy will be stuck in recession
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीना जॉर्जीवा - फोटो : Social Media

विस्तार

नए साल की शुरुआत के साथ ही मंदी की आहट तेज होने लगी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी विपरीत हालात और वित्तीय अनिश्चितता के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर आगाह किया है। आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था में नरमी की आशंका के कारण 2022 के मुकाबले नया साल यानी 2023 ज्यादा कठिन होगा। इस साल दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था मंदी के भंवर में फंस जाएगी।

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उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है, जब 10 महीने बाद भी रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई, उच्च ब्याज दर और चीन में ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से कोरोनो संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि दुनिया की तीनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं चाहे वह अमेरिका हो या यूरोपीय देश या चीन...सभी एक साथ धीमे हो रहे हैं। इसका असर काफी गहरा होने वाला है। चिंता की बात यह है कि जो देश मंदी की चपेट में नहीं है, वहां भी करोड़ों लोगों को इसका असर महसूस होगा।  
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प्रमुख वजह...जिनसे और मुश्किल होंगे हालात

  • रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग पूरी दुनिया के लिए और मुश्किलें पैदा कर रही है।
  • महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में आक्रामक तरीके से इजाफा किया है। 
  • चीन ने अपनी जीरो कोविड पॉलिसी को खत्म कर दिया है, लेकिन कोरोना अभी काबू में नहीं है।
  • शी जिनपिंग ने अर्थव्यवस्था को खोलना शुरू कर दिया है। चीन के इस कदम से दुनियाभर में फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं। 
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वृद्धि अनुमान : 21 साल में सबसे कम 
मुद्रा कोष ने कहा कि 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6 फीसदी रही थी। 2022 में इसके 3.2 फीसदी और 2023 में 2.7 फीसदी रहने का अनुमान है। वैश्विक वित्तीय संकट और कोरोना महामारी के दौर को छोड़ दें तो यह 2001 के बाद 21 साल में सबसे कम वृद्धि अनुमान है। 


-वैश्विक संस्था ने पिछले साल अक्तूबर में 2023 के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर अनुमान में कटौती की थी। 

चीन का होगा सबसे बुरा हाल
जॉर्जीवा ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के लिए 2023 की शुरुआत सबसे खराब होगी। कोरोना ने वहां की फैक्ट्रियों में भी दस्तक दे दी है। इससे देश के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। चीन की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, जिसका नकारात्मक असर क्षेत्रीय और वैश्विक वृद्धि पर पड़ेगा। 

  • हाल में आए आंकड़ों के मुताबिक, 2022 अंत में चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। 
  • दिसंबर के लिए पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) में लगातार तीसरे महीने गिरावट दर्ज की गई।
  • वहां के 100 शहरों में मकानों की कीमत दिसंबर में लगातार छठे महीने घटी है। 

भारत...अंधेरे में उजाला
जॉर्जीवा ने सीधे तौर पर भारत के बारे में कोई अनुमान नहीं जताया है। हालांकि, अक्तूबर में उन्होंने कहा था कि भारत 2023 में पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ेगा। वह इस 'अंधेरे में उजाला' की तरह है क्योंकि वह एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। इसके अलावा, भारत संरचनात्मक सुधारों में आगे है और डिजिटलीकरण में एक अद्भुत सफलता हासिल की है।

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