CII: अब संपत्ति बेचने पर होगा अधिक मुनाफा, सरकार के फैसले के बाद देना होगा कम टैक्स, जानें क्या है मामला
सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक को बढ़ा दिया है। इससे करदाताओं को अपनी पुरानी संपत्ति को बेचने पर ज्यादा मुनाफा होगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सीआईआई का स्तर 363 था, जिसे अब बढ़ाकर 376 कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि आपको कैसे होगा लाभ।
विस्तार
सरकार ने उन करदाताओं को बड़ी राहत दी है जो दीर्घकालिक निवेश जैसे जमीन, मकान या शेयर को बेचने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड (सीबीडीटी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) को बढ़ाकर 376 कर दिया है। इससे लंबी अवधि की संपत्तियों की बिक्री पर करदाता अब पहले से अधिक टैक्स राहत का लाभ उठा सकेंगे। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सीआईआई का स्तर 363 था, जिसे अब बढ़ाकर 376 कर दिया गया है।
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क्या होता है सीआईआई?
लागत मुद्रास्फीति सूचकांक, का उपयोग आयकर में, किसी परिसंपत्ति की लागत में मुद्रास्फीति के कारण होने वाली वार्षिक वृद्धि का आकलन करने के लिए किया जाता है। आसान भाषा में समझे तो किसी परिसंपत्ति की खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार एडजस्ट किया जाता है।
उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति ने 15 साल पहले किसी मकान को 12 लाख रुपये में खरीदा था और अब वह 24 लाख रुपये में बिक रही है, तो सीआईआई के जरिए उस 12 लाक की खरीद कीमत को बढ़ाकर महंगाई के हिसाब से बदला जाएगा। इससे टैक्स कम देना पड़ता है।
नए नियम और सीमाएं
हालांकि, सरकार ने पूंजीगत लाभ कर से जुड़े नियमों को सरल बनाने के लिए वित्त अधिनियम 2024 में कुछ बदलाव किए हैं। अगर संपत्ति 23 जुलाई 2024 से पहली खरीदी गई है और व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) द्वारा बेचा गया है।
- ऐसे मामलों में वे 20% टैक्स दर के साथ इंडेक्सेशन का विकल्प चुन सकते हैं।
- 12.5% की फ्लैट टैक्स बिना इंडेक्सेशन की सुविधा की होगी।
किनके लिए उपलब्ध नहीं है ये विकल्प?
हालांकि, यह विकल्प गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई), कंपनियों या सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) के लिए उपलब्ध नहीं है। इन्हें अनिवार्य रूप से नई फ्लैट टैक्स प्रणाली का पालन करना होगा।
कब से लागू होगा नियम?
यह संशोधित सूचकांक वित्त वर्ष 26 और कर निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए लागू होगा, जब वित्त वर्ष 26 में अर्जित आय के लिए कर रिटर्न दाखिल किया जाएगा।
नए सीआईआई का उद्देश्य
इस पद्धति का उपयोग करने के पीछे उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों को महंगाई से राहत मिले। उन लोगों के लिए फायदेमंद हो जो अपनी पुरानी संपत्ति को बेचने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, पूंजीगत लाभ कर केवल वास्तविक लाभ पर लगाया जाए, न कि मुद्रास्फीति के कारण होने वाले लाभ पर।