मीडिया रिपोर्ट गलत: केयर्न मामले में सरकार ने कहा बैंकों को विदेशी मुद्रा खाते से धन निकालने को नहीं कहा
केयर्न को लेकर जारी कानूनी विवाद के बीच सरकार ने मीडिया रिपोर्ट को गलत बताया है। इन खबरों में कहा गया था कि सरकार ने बैंकों को विदेशी मुद्रा खाते से धन निकालने का कहा है।
विस्तार
वित्त मंत्रालय ने रविवार को उन झूठी मीडिया रिपोर्ट की निंदा की, जिसमें केयर्न मामले में सरकारी बैंकों को विदेशों में स्थित विदेशी मुद्रा खातों से धन निकालने का आदेश देने का दावा किया गया है।
केंद्र सरकार ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व इस तरह के आदेश की खबर फैला रहे हैं। केयर्न को लेकर जारी कानूनी विवाद में इन खातों को जब्त किए जाने किए जाने की आशंका के चलते यह आदेश देने की बात कही गई थी। सरकार ने इसे गलत बताते हुए इसकी निंदा की है।
GoI condemns false reporting in certain media by some vested interests claiming GoI purportedly asked state-owned banks to withdraw funds from foreign currency accounts abroad in anticipation of potential seizure of such accounts in regard to Cairn legal dispute: Finance Ministry pic.twitter.com/gRIl37NiwT
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 23, 2021
क्या कहा गया था मीडिया रिपार्टों में
हाल ही में ऐसी खबरें आईं थीं जिनमें दावा किया गया था कि केयर्न के साथ कानूनी विवाद में सरकारी बैंकों के विदेशी मुद्रा खातों के जब्त होने की आशंका को देखते हुए सरकार ने इन खातों से धन निकालने को कहा है। मीडिया में सूत्रों के अनुसार दी गई इन खबरों को भारत सरकार ने झूठा बताया। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से गलत तथ्यों पर आधारित हैं। भारत सरकार ने कहा कि ऐसा लगता है कि इसमें शामिल कुछ पक्ष ऐसे भ्रम फैलाने वाली रिपोर्टिंग की योजना बनाई है।
मध्यस्थता अदालत में चल रहा मामला
सरकार और ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी कंपनी के बीच एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में विवाद चल रहा है। इसका निर्णय केयर्न के पक्ष में गया है। मध्यस्थता अदालत ने कंपनी पर भारत सरकार द्वारा पिछली तिथि से प्रभावी कानून संशोधन के माध्यम से लगाए गए कर को निरस्त कर दिया है और सरकार को केयर्न एनर्जी का 1.2 अरब डॉलर चुकाने का आदेश दिया था।
केंद्र सरकार का कहना है कि किसी सरकार द्वारा लगाया गया कर उसके सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसे निजी मध्यस्थता अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। केयर्न ने पूर्व में कहा था कि यह फैसला बाध्यकारी है और वह विदेशों में भारतीय संपत्तियों को जब्त कर सकती है।
बाडमेर में तेल भंडार खोजा था
बता दें, केयर्न ने 1994 में भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश किया था। एक दशक बाद कंपनी ने राजस्थान में बड़ा तेल भंडार खोजा था। ब्रिटिश कंपनी 2006 में सूचीबद्ध हुई थी। पांच साल बाद सरकार ने पिछली तारीख के कर कानून के आधार पर केयर्न से पुनर्गठन के लिए 10,247 करोड़ रुपये का कर मय ब्याज और जुर्माना अदा करने को कहा था। केयर्न ने इसे हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी थी।