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टाटा संस: एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी आरबीआई ने की खारिज, क्या शेयर बाजार में लिस्ट होगी कंपनी?

Sat, 12 Sep 2026 07:28 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 12 Sep 2026 07:28 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस का एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का आवेदन खारिज कर दिया है। जानिए आरबीआई के इस फैसले से शेयर बाजार में टाटा संस की लिस्टिंग पर क्या असर पड़ेगा। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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RBI Rejects Tata Sons' Bid to Surrender NBFC Licence; Mandatory Public Listing Imminent
टाटा संस की लिस्टिंग - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश के नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले सबसे बड़े कारोबारी घराने, टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। शनिवार को सामने आए इस घटनाक्रम के बाद अब शेयर बाजार में टाटा संस की लिस्टिंग अनिवार्य और लगभग तय मानी जा रही है।

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रिजर्व बैंक ने टाटा संस का आवेदन क्यों खारिज किया?

मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रिजर्व बैंक की ओर से कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को शनिवार को एक पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र में आरबीआई ने स्पष्ट किया कि टाटा समूह सरेंडर के लिए आवश्यक निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता है। 

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इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने मार्च 2024 में डी-रजिस्ट्रेशन यानी एनबीएफसी लाइसेंस रद्द करने के लिए दिए गए आवेदन को खारिज करने का फैसला सुनाया। टाटा संस ने खुद को एनबीएफसी श्रेणी से बाहर करने के उद्देश्य से यह आवेदन दायर किया था।

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आरबीआई के इस फैसले का टाटा संस की लिस्टिंग पर क्या असर पड़ेगा?

आरबीआई द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अब अपरिहार्य हो गई है। 

  • अपार-लेयर एनबीएफसी दर्जा: टाटा संस अब आरबीआई के नियमों के तहत 'अपार-लेयर एनबीएफसी' के रूप में वर्गीकृत है।
  • लिस्टिंग की अनिवार्यता: केंद्रीय बैंक के नियमों के मुताबिक, अपर-लेयर श्रेणी में आने वाली एनबीएफसी कंपनियों को अपने कारोबार और शेयर को सार्वजनिक शेयर बाजार में सूचीबद्ध यानी लिस्ट कराना अनिवार्य होता है। 

इस फैसले से बाजार के उन कयासों पर विराम लग गया है, जिनमें माना जा रहा था कि टाटा संस एनबीएफसी दर्जा सरेंडर करके सार्वजनिक लिस्टिंग से बच सकती है।

इस बड़े फैसले पर टाटा संस और रिजर्व बैंक का क्या कहना है?

खबर लिखे जाने तक इस पूरे घटनाक्रम पर दोनों पक्षों का आधिकारिक रुख पूरी तरह साफ नहीं हो सका है:

  • आरबीआई का रुख: मीडिया द्वारा टिप्पणी मांगे जाने पर भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
  • टाटा संस का रुख: इस फैसले पर टाटा संस की तरफ से भी तुरंत कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा?

आरबीआई के इस कड़े रुख ने टाटा समूह के सामने एक स्पष्ट विनियामक स्थिति खड़ी कर दी है। एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने की योजना विफल होने के बाद, अब अपार-लेयर एनबीएफसी के मानकों का पालन करते हुए टाटा संस को भारतीय पूंजी बाजार में कदम रखना होगा। आने वाले समय में टाटा संस द्वारा लिस्टिंग की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर निवेशकों और पूरे कॉरपोरेट जगत की नजरें टिकी रहेंगी।

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