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मार्च आ गया...अभी तक नहीं की कर बचत प्लानिंग तो एकमुश्त 1.5 लाख रुपये निवेश के हैं चार विकल्प

Mon, 09 Mar 2020 04:05 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 09 Mar 2020 04:05 AM IST
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March has come, not yet tax saving planning, four options for one time investment of 1.5 lakh rupees
निवेश

आकलन वर्ष 2019-20 की समाप्ति का आखिरी महीना चल रहा है मार्च। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपकी कंपनी के एचआर विभाग की ओर से कर बचत के लिए निवेश दस्तावेज जमा कराने की सूचना भी आ गई होगी।  कई लोग ऐसे होंगे जिन्होंने अभी तक कोई निवेश नहीं किया और कर बचत के लिए जल्दबादी में इसकी योजना बना रहे होंगे।

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कम समय में ज्यादा कर बचत की तैयारी करना चाहते हैं तो निवेश के चार ऐसे विकल्प आपके सामने हैं, जहां एकमुश्त 1.5 लाख रुपये जमा कर सकते हैं। इस विकल्पों में पैसे लगाने से न सिर्फ टैक्स की बचत होगी, बल्कि निश्चित रिटर्न का तोहफा भी मिलेगा।
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निवेशकों की पहली पसंद है एफडी

जल्दबादी में गलत जगह निवेश करने से बेहतर है कि आप अपने पैसे को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में जमा कराएं। एफडी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको निवेश की शुरुआत में ही बता दिया जाता है कि मेच्योरिटी पर आपको कितना फायदा होगा। इसमें कोई जोखिम नहीं है। किसी भी स्थिति में न तो उससे ज्यादा पैसा मिलता है और न ही कम।

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टैक्स सेविंग एफडी में  पांच साल के लिए निवेश करने पर आपको आयकर में भी छूट मिलती है। इसमें जमा मूलधन के साथ ही ब्याज पर भी आपको कोई टैक्स नहीं देना होता। हालांकि, यदि आपकी एफडी पर किसी एक वित्तीय वर्ष में कमाया गया ब्याज 10 हजार रुपये से ज्यादा है तो उस अतिरिक्त राशि पर 10 फीसदी के हिसाब से टीडीएस देना होगा।

यदि आपने पैन (परमानेंट अकाउंट नंबर) नहीं दिया है तो 20 फीसदी की दर से टैक्स काटा जा सकता है। पूंजी की सुरक्षा और निश्चित ब्याज दर के अलावा एफडी के साथ लिक्विडिटी भी रहती है। यानी, जरूरत पर इन्हें कभी भी तुड़वाया जा सकता है। आप चाहें तो एफडी को मेच्योरिटी तक जारी रखे सकते हैं या इस अवधि से पहले भी इसे भुनाया जा सकता है।

निश्चित रिटर्न देता है पीपीएफ

पूंजी बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशक में अपने पैसों की सुरक्षा को लेकर डर और अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में सुरक्षित निवेश और निश्चित रिटर्न का सबसे बेहतर जरिया बन सकता है पब्लिक प्रोविडंट फंड। यहां निवेशक एकमुश्त डेढ़ लाख रुपये की रकम जमा कर सकता है।

इस योजना में अभी बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा ब्याज मिल रहा है। साथ ही रिटर्न की गारंटी भी एफडी की तरह ही होती है। पीपीएफ अकाउंट का मेच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है, जिसे निवेशक चाहे तो 5 साल के लिए आगे बढ़ा सकता है। पीपीएफ पर अभी 7.9 फीसदी का ब्याज मिल रहा है, जिसकी गणना कम्पाउंडिंग आधार पर होती है।

एक व्यक्ति के नाम से एक ही पीपीएफ खाता खोला जा सकता है। अगर निवेशक चाहे तो 10 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर भी पीपीएफ खाता खोल सकते हैं, लेकिन उसके बालिग होने तक इसकी जिम्मेदारी अभिभावक की होगी और दोनों खातों में निवेश की गई राशि में से 1.5 लाख रुपये पर ही ब्याज मिलेगा।

 सुकन्या समृद्धि योजना : कर बचत के साथ संवारें बेटी का भविष्य

मोदी सरकार की ओर से शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश के तीन सबसे बड़े फायदे हैं। एक तरफ तो आपको एकमुश्त 1.50 लाख रुपये लगाने की छूट मिलती है, तो आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ दिलाती है। दूसरा इसमें 8.40 फीसदी के आकर्षक ब्याज पर निश्चित रिटर्न मिलता है और तीसरा आपकी बेटी का भविष्य भी इस योजना से सुरक्षित हो जाता है।

सुकन्या योजना के तहत निवेशक अपनी दो बेटियों के नाम पर अलग-अलग खाते खोल सकता है और दोनों पर टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। इस खाते को बैंक या डाकघर में खुलवाया जा सकता है, जिसके आवश्यक दस्तावेजों में अभिभावक की केवाईसी मांगी जाती है। वैसे तो इस योजना की मेच्योरिटी बेटी के 21 साल पूरे होने पर ही होती है, लेकिन अगर जरूरत है तो शिक्षा और इलाज के लिए बीच में भी राशि निकाली जा सकती है। बेटी के 18 साल पूरे होने पर 50 फीसदी राशि निकाल सकते हैं।

 कर बचत के साथ मुनाफे का सौदा है ईएलएसएस

कर बचत के लिए एममुश्त 1.50 लाख रुपये निवेश का विकल्प खोज रहे हैं तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) के भरोसेमंद और मुनाफे का सौदा हो सकता है। इस फंड का ज्यादातर हिस्सा इक्विटी में निवेश होता है, जहां आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। इस योजना में तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है, लेकिन फंड डायवर्सिफाइड होने से जोखिम कम रहता है।

इसमें सिप के जरिये निवेश का भी विकल्प होता है। निवेशक अगर इस योजना का ज्यादा लाभ उठाना चाहते हैं तो उन्हें लंबी अवधि के लिए पैसे लगाने चाहिए। इस फंड मेें से अधिकतर पैसे इक्विटी में लगाए जाते हैं, जिससे इसका निवेश भी बाजार पूंजी पर आधारित हो जाता है। ऐसे में देखा जाए तो एक साल के लिए किए गए निवेश पर महज 2.18 फीसदी का रिटर्न का मिला। वहीं, तीन या पांच अथवा सात साल के निवेश पर रिटर्न करीब 11 फीसदी रहा है। 

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