इस बजट में आपको कुछ मिला भी या नहीं, ऐसे समझिए अपना नफा-नुकसान
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
फरवरी 2019 में अंतरिम बजट आया था। हालांकि वह केवल नाम का अंतरिम बजट था, उसमें की गईं घोषणाएं भयंकर किस्म की लोकलुभावन थीं। दशकों पुरानी टैक्स स्लैब बढ़ाने की मांग भी उसमें सुनी गई थी। हालांकि कम शब्दों में यह कह सकते हैं कि वह चुनावों को मद्देनजर बनाया गया बजट था। लेकिन अब पांच महीने बाद जब पूर्ण आम बजट आया तो इसमें लोकलुभावनता कम दिखी।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फरवरी 2019 में अंतरिम बजट आया था। हालांकि वह केवल नाम का अंतरिम बजट था, उसमें की गईं घोषणाएं भयंकर किस्म की लोकलुभावन थीं। दशकों पुरानी टैक्स स्लैब बढ़ाने की मांग भी उसमें सुनी गई थी। हालांकि कम शब्दों में यह कह सकते हैं कि वह चुनावों को मद्देनजर बनाया गया बजट था। लेकिन अब पांच महीने बाद जब पूर्ण आम बजट आया तो इसमें लोकलुभावनता कम दिखी।
इसमें गरीब, किसान, करदाता, व्यापारी, अमीर, कंपनियां या यूं कहें कि अर्थव्यवस्था के हर पुर्जे के लिए कुछ न कुछ प्रावधान किया गया। हालांकि एक नजर में यह भी कहा जा सकता है कि इस बजट में आम आदमी (मध्यमवर्गीय) को कुछ भी नहीं मिला। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों नहीं मिला। इसलिए नहीं मिला कि सरकार ने जो छूट दी है वो ऐसे वस्तुओं और सुविधाओं पर दिया है, जो मध्य वर्ग उपयोग ही नहीं करता है। फिर आप पूछेंगे, भला वो कैसे।
इलेक्ट्रिक कारें
तो जनाब, यह सोचिए कि आम आदमी जो कि चार लाख रुपये तक कि पेट्रोल कार भी आसानी से नहीं खरीद पाता है, वो इलेक्ट्रिक कार कैसे खरीदेगा। दूसरी बात यह कि आखिर इलेक्ट्रिक कार कितने शहरों में मिल रही है। कितनी कंपनियां बेच रही हैं। इसके लिए कितने चार्जिंग पॉइंट बनाए गए हैं। तो क्या आप ऐसी कार के लिए लोन लेकर उस पर मिलने वाली छूट का लाभ लेंगे। मध्यम वर्गीय व्यक्ति एक्सचेंज पर भी सामान खरीता है। तो क्या अब तक किसी कार कंपनी ने ऐसी कोई स्कीम शुरू की है, जिसमें आपकी मौजूदा पेट्रोल या डीजल कार लेकर बदले में इलेक्ट्रिक कार मिले।
होम लोन
ऐसा ही हाल होम लोन पर मिली छूट का भी है। दरअसल, 45 लाख तक का घर खरीदने पर डेढ़ लाख का अतिरिक्त ब्याज कर मुक्त करना मध्यम वर्ग के लिए राहत नहीं है। किसी भी बड़े महानगर में 45 लाख रुपये में फ्लैट भी मिलता है। बैंक भी मकान की लागत का 100 फीसदी ऋण नहीं देते हैं। अधिकतम 80 से 85 प्रतिशत लोन राशि दी जाती है। उस पर भी पुराने चल रहे कर्ज की वजह से यह प्रतिशत कई बार घट भी जाता है। तो अगर आपको 45 लाख रुपये में घर मिल जाए तो उस पर 85 फीसदी की दर से आपको लोन के रूप में अधिकतम 39 लाख रुपये ही स्वीकृत होंगे।
पांच लाख रुपये तक की छूट
महंगा पेट्रोल-डीजल
पांच साल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 लाख करोड़ खर्च करेगी सरकार
इन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को गति मिलेगी
- आवास: वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 2022 तक सभी के लिए आवास का लक्ष्य रखा है। 2019-20 से 2022 तक 1.95 करोड़ मकानों का निर्माण किया जाएगा। इनमें टॉयलेट, बिजली और रसोई गैस कनेक्शन दिए जाएंगे। घर तैयार करने का लक्ष्य 314 से घटाकर 114 दिन किया गया है।
- सड़क: गांव-गांव तक रोड कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अगले पांच साल में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 1.25 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा। इस पर 80 हजार 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 97% लोगों को हर मौसम में सड़क मिलेगी।
- रेलवे: इस साल स्टेशनों का आधुनिकीकरण शुरू होगा। 2018 से 2030 के बीच रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में 50 लाख करोड़ निवेश की जरूरत होगी। कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल से विकास और यात्री भाड़े से जुड़ी सेवाओं को विकसित किया जाएगा। 2018-19 में 300 किमी मेट्रो लाइन को मंजूरी दी गई। अब छोटे शहरों में पीपीपी मॉडल के जरिए मेट्रो लाइन बिछाई जाएंगी। सरकार नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड शुरू करेगी। रेलवे और अन्य ट्रांसपोर्ट संसाधनों के टिकट बुक करना आसान होगा।
- वॉटर-वे: सरकार आने वाले चार सालों में गंगा नदी में कार्गो शिप का आवागमन बढ़ाएगी। देश में वॉटरवे की संख्या में वृद्धि करने पर जोर दिया जाएगा।