JRD Tata: फ्रेंच सेना छोड़ी तो बची जान, 34 की उम्र में टाटा के मुखिया बने फिर किया ऐसा काम कि बने 'भारतरत्न'
जेआरडी ने दिसंबर 1925 में एक अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में टाटा समूह ज्वाइन किया था। 22 साल की उम्र में उनके पिता के निधन के तुरंत बाद वे टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के बोर्ड में शामिल हो गए थे। महज 34 साल की उम्र में साल 1938 में टाटा संस के चेयरमैन बने और साल 1991 तक इस पद पर बने रहे।
विस्तार
भारत के सबसे बड़े उद्योग समूह टाटा की कमान सबसे कम उम्र में चेयरमैन बनने वाले जेआरडी टाटा का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 29 जुलाई 1904 को फ्रांस के पेरिस शहर में हुआ था। देश के अग्रणी औद्योगिक घराने की कमान संभालने वाले जेआरडी टाटा ग्रुप का मुखिया बनने से पहले फ्रांसिसी सेना में शामिल हुए थे। कहा जाता है कि जेआरडी अंग्रेजी से बढ़िया फ्रेंच बोला करते थे।
फ्रांस, जापान और इग्लैंड जैसे देशों में हुई जेआरडी की शिक्षा
अपने पिता आरडी टाटा के चार बच्चों में दूसरे नंबर थे जेआरडी। जेआरडी टाटा की शुरुआती शिक्षा फ्रांस, जापान और इग्लैंड जैसे देशों में हुई थी। उसके बाद जेआरडी फ्रांस की सेना में शामिल हो गए। उन दिनों फ्रांस में एक साल के लिए युवाओं को अनिवार्य रूप से सेना में शामिल होने का नियम था।
बाल-बाल बची थी जान, फिर लिखी सफलता की इबारत
एक साल के बाद जेआरडी इस अवधि को बढ़ाना चाहते थे क्योंकि वे सेना में रहकर एक प्रसिद्ध घुड़सवारी स्कूल में भाग लेने का मौका पाना चाहते थे। पर, ऐसा करने से उनके पिता ने मना कर दिया। मजबूरी में जेआरडी को सेना छोड़नी पड़ी। हालांकि, उनके इस फैसले से उनकी जान बच गई क्योंकि उसके थोड़े दिनों बाद ही मोरक्कों में एक अभियान के दौरान जिस रेजीमेंट में जेआरडी शामिल थे उसका खात्मा हो गया। यह घटना जेआरडी के जीवन का टर्निंग प्वाइंट था। उसके बाद जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी टाटा ने अपने जीवन की आगे की यात्रा में वो इबारत लिखी जिसने उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न दिलाया। जेआरडी टाटा अपने जीवन काल में देश के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान टाटा संस के 53 वर्षों तक चेयरमैन रहे।
टाटा समूह में अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में शामिल हुए
जेआरडी ने दिसंबर 1925 में एक अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में टाटा समूह ज्वाइन किया था। 22 साल की उम्र में उनके पिता के निधन के तुरंत बाद वे टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के बोर्ड में शामिल हो गए थे। महज 34 साल की उम्र में साल 1938 में टाटा संस के चेयरमैन बने और साल 1991 तक इस पद पर बने रहे। जेआरडी टाटा के कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप का 50 गुना तक ग्रोथ हुआ। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप की 14 कंपनियों की नींव रखी जिनमें टाटा मोटर्स, ग्लोबल बेवरेजेज, टाइटन और एयर इंडिया जैसी सफल कंपनियां शामिल हैं।
हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस पाने वाले पहले भारतीय थे जेआरडी
जेआरडी टाटा को भारत में सिविल एविएशन उद्योग का जनक माना जाता है। देश में पहली बार 1929 में हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस भी जेआरडी को मिला था। साल 1932 में उन्होंने टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी जिसे साल 1946 में बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। साल 1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया। हलांकि, इसी साल जनवरी महीने में टाटा ग्रुप ने एक बार फिर एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लिया है। इस बार एयर इंडिया का दोबारा टाटा ग्रुप में शामिल होना जेआरडी के जन्मदिन पर उनके लिए बर्थडे गिफ्ट जैसा है।
आठ घंटे की ड्यूटी तय करने का श्रेय भी जेआरडी को
आज पूरे देश में लगभग सारी कंपनियों में कर्मचारियों के लिए आठ घंटे की शिफ्ट का प्रचलन है। इसकी शुरुआत जेआरडी ने ही टाटा ग्रुप में की थी। उन्होंने ही सबसे पहले कर्मचारियों के लिए फ्री मेडिकल सुविधा और भविष्य निधि की घोषणा की थी। किसी हादसे का शिकार होने पर कर्मचारियों को मुआवजा देने की पहल भी जेआरडी टाटा ने ही की थी। जेआरडी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की तर्ज पर टाटा ग्रुप में लीडरशिप को तराशने के लिए टाटा प्रशासनिक सेवा (TAS) की शुरुआत की थी
साल 1992 में मिला भारतरत्न
अपने जीवन काल में जेआरडी सार्वजनिक जीवन में अपने योगदान के कारण कई पुरस्कारों और सम्मान से नवाजे गए। वर्ष 1954 में उन्हें फ्रांस का सर्वोच्च नागरिकता पुरस्कार लीजन ऑफ द ऑनर से नवाजा गया। वर्ष 1955 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वर्ष 1992 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वर्ष 1992 में ही उन्हें भारत में जनसंख्या नियंत्रण में अहम योगदान देने के लिए यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। 89 वर्ष की उम्र में 29 नवंबर 1993 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में उनका निधन हुआ।