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Investment: घाटे का सौदा साबित हो रहा है छोटी योजनाओं और सोने में निवेश, शेयर बाजार पर कर सकते हैं भरोसा

Mon, 19 Sep 2022 01:53 AM IST
देव कश्यप अजीत सिंह, नई दिल्ली।
अजीत सिंह, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 19 Sep 2022 01:53 AM IST
सार

आरबीआई जहां इस महीने के अंत में चौथी बार ब्याज दरों में इजाफा करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर सरकार इस महीने के अंत में छोटी योजनाओं की समीक्षा करेगी। इससे निवेशकों को उम्मीद है कि इस बार कुछ राहत मिल सकती है, बावजूद इसके उनको घाटा ही होगा। ऐसे में आगे भी महंगाई की तुलना में निवेशकों को घाटा होने का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट। 

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Investment in Gold and Small schemes are proving to be a loss-making deal
निवेश (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : iStock

विस्तार

इस पूरे साल में अभी तक निवेशकों को करीबन सभी साधनों से घाटा हुआ है। शेयर बाजार से लेकर सोने के निवेश या फिर सरकार की छोटी बचत योजनाएं हों, सभी ने महंगाई की तुलना में कम ही फायदा दिया है। आश्चर्य यह है कि लगातार सात फीसदी से ऊपर महंगाई दर बने रहने, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा तीन बार में ब्याज दरों में 1.40 फीसदी की वृद्धि करने के बाद भी छोटी योजनाओं की ब्याज दरें अपरिवर्तित हैं।

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ऐसा माना जा रहा है कि सरकार लघु योजनाओं की ब्याज दरों में मामूली वृद्धि तो करेगी, लेकिन ब्याज दरों और महंगाई के स्तर की तुलना में वह काफी कम होगा, क्योंकि  जून, 2020 से इन योजनाओं की ब्याज दरें स्थिर हैं। शेयर बाजार की बात करें तो जनवरी में सेंसेक्स जरूर ऊपर था, लेकिन यह मार्च में 58,568 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को भी यह 58,840 पर बंद हुआ। यानी इसमें भी निवेशकों को कोई बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिला है। हालांकि, इस दौरान आरबीआई द्वारा रेपो रेट में आक्रामक वृद्धि के बाद बैंकों ने जमा में मामूली इजाफा तो किया, पर महंगाई की तुलना में वह अभी भी काफी कम है।  
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सोने में भी घाटा 
सोने की कीमतों में हाल के समय में जमकर गिरावट आई है। इस साल जनवरी में सोने की कीमत प्रति दस ग्राम 49,100 रुपये थी। इस समय भी यह इससे मामूली ज्यादा है। यानी किसी ने अगर सोने में निवेश किया होगा तो आठ महीने में भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ है। फरवरी में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ तो उस समय सुरक्षित माने जाने वाले इस साधन में लोगों ने जमकर निवेश किया। इससे इसकी कीमतें एक बार तो 53,000 रुपये को पार कर गईं। लेकिन इसी हफ्ते अमेरिकी फेडरल बैंक फिर से ब्याज दरों में ज्यादा इजाफा करने के  पक्ष में है। 
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अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और भारत में एक साथ दरें बढ़ने की आशंका
अमेरिका के साथ ही बैंक ऑफ जापान, भारत और बैंक ऑफ इंग्लैंड भी अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाले हैं, जिसमें दरों के बढ़ने की उम्मीद है। इससे सोने की कीमतों में भारी गिरावट आ रही है। सोने की कीमतें इस समय साल 2020 के स्तर पर चली गई हैं। पिछले हफ्ते इसकी कीमत 2.4 फीसदी गिरी थी। पांच हफ्तों में यह चौथा हफ्ता है, जब सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।   

छोटी योजनाओं पर 7.40 फीसदी का ब्याज
छोटी योजनाओं में शामिल सुकन्या समृद्धि योजना, सावधि जमा, रिकरिंग जमा जैसे साधनों पर अधिकतम 7.40 फीसदी का ब्याज मिल रहा है। जबकि न्यूनतम यह 4 फीसदी पर है। सबसे ज्यादा सुकन्या योजना पर है जो 7.40 फीसदी है। 10 साल के बॉन्ड की ब्याज दर अप्रैल, 2022 से 7 फीसदी के ऊपर है। जून से अगस्त के दौरान इसका औसत 7.31 फीसदी रहा है। ऐसे में सरकार इसे देखते हुए ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला ले सकती है। 

ऐसे तय होती है छोटी योजनाओं की ब्याज दरें 
छोटी ब्याज दरों को तय करने का सरकार का एक अलग ही नियम है। 28 मार्च, 2016 को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, पीपीएफ पर सरकारी प्रतिभूतियों की औसत 3 महीने की ब्याज दर से 0.25 फीसदी ब्याज ज्यादा दिया जाना चाहिए। इस आधार पर 7.31 के साथ इस 0.25 फीसदी को जोड़ दिया जाए तो पीपीएफ पर इस बार 7.56 फीसदी ब्याज मिलना चाहिए। फिलहाल 7.1 फीसदी ब्याज मिलता है।  

सुकन्या समृद्धि पर 8.3 फीसदी ब्याज मिलना चाहिए
सुकन्या समृद्धि पर अभी ब्याज 7.6 फीसदी है जो 8.3 फीसदी होना चाहिए। सरकार के नियम के मुताबिक, इस पर औसत तीन महीने के बाद 0.75 फीसदी ज्यादा ब्याज देना चाहिए। इस तरह से 7.6 और 0.75 के बाद ब्याज 8.3 फीसदी होना चाहिए। हालांकि, सरकार इस नियम को तुरंत लागू नहीं करती है। 


शेयर बाजार पर करें भरोसा
शेयर बाजार लंबे समय में निवेशकों को अच्छा रिटर्न देता है और इसका यह इतिहास भी रहा है। ऐसे में निवेशकों को इस समय शेयर बाजार पर भरोसा करना चाहिए। थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव संभव है, फिर भी लंबे समय में इसमें दो अंकों से ज्यादा का फायदा मिल सकता है। - किशोर ओस्तवाल, सीएमडी, सीएनआई रिसर्च

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