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Dollar vs Rupee: रुपये की आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले कैसी रहेगी चाल? बीओबी ने अपनी रिपोर्ट में बताया
Tue, 18 Feb 2025 12:02 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 18 Feb 2025 12:02 PM IST
सार
Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया (आईएनआर) निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले 86.5 से 87.5 प्रति अमेरिकी डॉलर के दायरे में रह सकता है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से अपने हस्तक्षेप को सीमित रखने की संभावना है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में रुपये की चाल पर क्या टिप्पणी की है, आइए जानें।
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डॉलर बनाम रुपया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रुपया (आईएनआर) निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले 86.5 से 87.5 प्रति अमेरिकी डॉलर के दायरे में कारोबार कर सकता है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से अपने हस्तक्षेप को सीमित रखने की संभावना है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
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रिपोर्ट कहा गया है कि मौजूदा समय में जब घरेलू स्तर पर तरलता की स्थिति तंग है, विदेशी मुद्रा बाजार में आरबीआई का हस्तक्षेप सीमित रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "कठिन घरेलू तरलता स्थिति को देखते हुए आरबीआई का हस्तक्षेप सीमित रहने की संभावना है। हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में रुपये का कारोबार 86.5-87.5/डॉलर के दायरे में होगा।"
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वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच 6 फरवरी, 2025 को भारतीय रुपये में 87.58 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक तेज गिरावट देखी गई। हालांकि, पिछले सप्ताह कुछ वैश्विक चिंताओं के कम होने के कारण मुद्रा में लगातार सुधार हुआ।
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अमेरिकी चुनावों के बाद रुपये पर दबाव शुरू हुआ, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल में शुरू की गई नीतियों, विशेष रूप से टैरिफ और करों से जुड़े फैसले ने डॉलर को मजबूत किया। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई, जिसका सीधा असर उभरते बाजार (ईएम) मुद्राओं पर पड़ा, जिसमें रुपया भी शामिल हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती उथल-पुथल के बावजूद अमेरिका की ओर से टैरिफ पर अपने रुख को नरम करने के बाद रुपया कुछ मजबूती हासिल करने में कामयाब रहा, इससे वैश्विक बाजारों को भी राहत मिली। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रुपये की चाल काफी हद तक अमेरिकी डॉलर की चाल से तय होगी।
दूसरी ओर, बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक टैरिफ युद्ध में कोई भी वृद्धि या अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख में बदलाव एक बार फिर रुपये पर दबाव डाल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक चुनौतियों के अलावा, घरेलू इक्विटी में निरंतर कमजोरी के साथ-साथ एक निराशाजनक आर्थिक दृष्टिकोण भी रुपये पर भारी पड़ रहा है। ऐसी भी उम्मीदें हैं कि आरबीआई मुद्रा को अधिक स्वतंत्र रूप से मूल्यह्रास करने की अनुमति देगा, क्योंकि घरेलू तरलता की स्थिति तंग बनी हुई है।
आरबीआई ने 5 साल के लंबे अंतराल के बाद अपनी नीतिगत दर में भी कमी की है, और दरों में और कटौती की उम्मीद भी है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब फेड की ओर से दरों में और कटौती की संभावना कम हो गई है। घरेलू तरलता की तंग स्थितियों के कारण आरबीआई के हस्तक्षेप की गुंजाइश भी सीमित है। आने वाले हफ्तों में बाजार सहभागियों, कारोबारियों और नीति निर्माताओं की ओर से रुपये की चाल पर बारीकी से रखेगा।