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एम्ब्रेयर-महिंद्रा की बड़ी तैयारी: 80 विमानों की डील मिली तो नागपुर में बनेगा सी-390; क्या है पूरा प्लान?

Fri, 02 Oct 2026 02:09 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 02 Oct 2026 02:09 AM IST
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Eyeing multi-billion-dollar IAF deal, Embraer and Mahindra shortlist Nagpur for C-390 assembly line
एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने पिछले साल अक्तूबर में रणनीतिक सहयोग समझौता किया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/महिंद्रा ग्रुप
भारत के अरबों डॉलर के सौदे पर एम्ब्रेयर और महिंद्रा ग्रुप की नजर है। भारत करीब 80 मध्यम परिवहन विमान (एमटीए) खरीदने की योजना बना रहा है। ऐसे में एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर और महिंद्रा ग्रुप ने नागपुर को संभावित विनिर्माण केंद्र के रूप में चुना है। यहां सी-390 मिलेनियम की असेंबली लाइन लगाई जा सकती है। यह तभी होगा, जब इस सौदे का ठेका उन्हें मिलता है।
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दोनों कंपनियां भारत में स्थानीय उत्पादन और समर्थन केंद्र (सपोर्ट हब) बनाने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए शुरुआती काम तेजी से चल रहा है।

भारतीय वायुसेना (आईएएफ) करीब 80 सैन्य परिवहन विमान खरीदने की योजना बना रही है। इन विमानों से पुराने सोवियत दौर के एएन-32 और आईएल-76 विमानों की जगह ली जाएगी।
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सी-390 मिलेनियम के अलावा इस सौदे के लिए दो और बड़े दावेदार हैं। इनमें एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का ए-400एम विमान और लॉकहीड मार्टिन का सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस शामिल है। भारतीय वायुसेना के पास पहले से 12 सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान हैं। 
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महिंद्रा ग्रुप और एम्ब्रेयर ने कहा कि वे भारत में सी-390 मिलेनियम के लिए औद्योगिक और समर्थन प्रणाली तैयार करने को लेकर बातचीत और योजना पर काम कर रहे हैं। दोनों कंपनियां भारतीय वायुसेना के मध्यम परिवहन विमान (एमटीए) कार्यक्रम के लिए मिलकर काम कर रही हैं।

कंपनियों ने एक बयान में कहा कि तैयारियों के तहत महिंद्रा और एम्ब्रेयर महाराष्ट्र सरकार के साथ काम कर रहे हैं। दोनों ने भारत में एम्ब्रेयर सी-390 मिलेनियम विमानों के उत्पादन के लिए संभावित फाइनल असेंबली लाइन के लिए नागपुर को चुना है।

प्रस्तावित सुविधा में भारत में विमान की स्थानीय असेंबली और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। हालांकि, यह तभी होगा जब भारत सरकार सी-390 मिलेनियम को चुनेगी। साथ ही, भारतीय वायुसेना के एमटीए कार्यक्रम के तहत ऑर्डर दिया जाना भी जरूरी होगा।

कंपनियों ने कहा कि वे महाराष्ट्र सरकार के साथ जुड़े जरूरी काम पूरे करने के लिए करीब से काम कर रही हैं। इसका मकसद यह है कि अगर यह कार्यक्रम साझेदारी को मिलता है, तो जरूरी औद्योगिक ढांचे पर तेजी से काम शुरू किया जा सके।

महिंद्रा ग्रुप की ग्रुप एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य विनोद सहाय ने कहा कि महिंद्रा भारत में दुनिया के स्तर का एयरोस्पेस सिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ऐसी विनिर्माण और तकनीकी क्षमता बनाना चाहती है, जो देश के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान दे। उन्होंने कहा कि एम्ब्रेयर के साथ सी-390 मिलेनियम पर काम करते हुए कंपनी बड़े स्तर पर कार्यक्रम को संभालने के लिए जरूरी औद्योगिक सिस्टम तैयार कर रही है।

उन्होंने कहा कि नागपुर ऐसी क्षमता के लिए एक अच्छा अवसर देता है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने नागपुर में जमीन जल्द उपलब्ध कराने और उससे जुड़ी जरूरतों में मदद की है।

सहाय ने कहा कि ये सभी तैयारियां भारत सरकार की ओर से सी-390 मिलेनियम को चुने जाने और भारतीय वायुसेना का ऑर्डर मिलने पर निर्भर हैं।

वहीं, एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी के अध्यक्ष और सीईओ बोस्को दा कोस्टा जूनियर ने कहा कि एम्ब्रेयर महिंद्रा के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने से खुश है। दोनों कंपनियां सी-390 मिलेनियम के उत्पादन से जुड़ी सुविधाएं भारत में लाने की तैयारी कर रही हैं।  

उन्होंने कहा कि असेंबली सुविधा के लिए संभावित जगह के तौर पर नागपुर की पहचान करना एक अहम कदम है। इससे भारत में मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला एयरोस्पेस सिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्ब्रेयर अपने साझेदारों के साथ मिलकर भारत की घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए काम करना चाहती है। हालांकि, यह सी-390 मिलेनियम के भारतीय वायुसेना के कार्यक्रम के लिए चुने जाने पर निर्भर है।

कंपनियों ने कहा कि नागपुर में प्रस्तावित उत्पादन केंद्र भारत में आधुनिक तकनीक से बनी सुविधा होगी। इसमें विमान असेंबली, सिस्टम को जोड़ने, मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग और स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करने जैसी जानकारी और क्षमता भारत में लाई जाएगी।

बयान में कहा गया कि अगर इस कार्यक्रम का ठेका मिलता है, तो साझेदारी धीरे-धीरे भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों को सी-390 मिलेनियम के सिस्टम से जोड़ेगी। इसमें विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), बिक्री के बाद की सेवाएं, प्रक्षिक्षण और विमान के पूरे जीवनकाल तक समर्थन शामिल होगा। यह भारत सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुसार होगा।

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एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने पिछले साल अक्तूबर में रणनीतिक सहयोग समझौता किया था। इसका मकसद भारतीय वायुसेना के एमटीए कार्यक्रम के लिए सी-390 मिलेनियम को आगे बढ़ाना था। यह समझौता फरवरी 2024 में हुए पहले समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर आधारित था।


इस समझौते में भारत में औद्योगिक उत्पादन, स्थानीय विनिर्माण, असेंबली, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) विकसित करने और एमआरओ यानी रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल से जुड़े काम में सहयोग की बात है।

फरवरी 2026 में दोनों कंपनियों ने भारत में सी-390 मिलेनियम के लिए एमआरओ क्षमता बनाने की दिशा में काम करने की योजना भी बताई थी। यह भी एमटीए कार्यक्रम के तहत विमान के चुने जाने पर निर्भर है।

 
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