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Oil And Gas: भारत ने खोले अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग के द्वार, समुद्री क्षेत्र में की जाएगी तेल-गैस की खोज

Wed, 09 Jul 2025 07:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 09 Jul 2025 07:42 AM IST
सार

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह परियोजना भारतीय समुद्री सीमा के पूर्वी व पश्चिमी अपतटीय क्षेत्रों  में डीपवॉटर हाइड्रोकार्बन खोज के रूप में शुरू की जा रही है। यह क्षेत्र अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है और वैज्ञानिक सर्वेक्षणों से यहां तेल व प्राकृतिक गैस की संभावनाएं उजागर हुई हैं।

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India started campaign to explore oil and gas in sea area Taking big step towards energy self-sufficiency
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए समुद्र के भीतर 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तेल व गैस की खोज व उत्पादन का अभियान शुरू किया है। इस रणनीतिक परियोजना के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग के द्वार खोले हैं और कई देशों के साथ साझेदारी पर बातचीत जारी है।

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पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह परियोजना भारतीय समुद्री सीमा के पूर्वी व पश्चिमी अपतटीय क्षेत्रों  में डीपवॉटर हाइड्रोकार्बन खोज के रूप में शुरू की जा रही है। यह क्षेत्र अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है और वैज्ञानिक सर्वेक्षणों से यहां तेल व प्राकृतिक गैस की संभावनाएं उजागर हुई हैं। डीपवाटर का मतलब समुद्र की वह गहराई जहां पारंपरिक कम गहराई वाले क्षेत्रों से आगे जाकर तेल-गैस की खोज होती है। यह कार्य 500 मीटर से अधिक गहरे क्षेत्रों में किया जाता है।  
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सरकार ने विदेशी तेल कंपनियों व तकनीकी विशेषज्ञ संस्थाओं को किया आमंत्रित
परियोजना के अंतर्गत ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) व ऑयल इंडिया जैसी सरकारी कंपनियां मुख्य भूमिका निभा रही हैं। सरकार ने विदेशी तेल कंपनियों व तकनीकी विशेषज्ञ संस्थाओं को भी इस अभियान में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। नॉर्वे, रूस और अमेरिका जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों के साथ सहयोग हेतु मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर विचार जारी है। सरकार ने मल्टी-क्लाइंट सेस्मिक डेटा अधिग्रहण, 3डी सब-सर्फेस मैपिंग व अत्याधुनिक डीपवॉटर ड्रिलिंग तकनीकों के लिए वैश्विक निविदा जारी किए हैं। इन तकनीकों के जरिये समुद्र की गहराई में 3,000 मीटर तक खुदाई कर भंडारों का परीक्षण किया जाएगा। ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी ऐसी नीति है, जिसके तहत कंपनियां हाइड्रोकार्बन जैसे तेल व गैस की खोज के लिए सरकार की औपचारिक नीलामी की प्रतीक्षा किए बिना पसंदीदा क्षेत्रों का चयन कर सकती हैं।

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कच्चे तेल के आयात पर 13 लाख करोड़ खर्च
भारत ने वर्ष 2023-24 में कच्चे तेल के आयात पर 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। यह भारी आयात बिल भारत के चालू खाता घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बनाता है। 

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