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CPI Inflation: खाने-पीने की चीजों ने बिगाड़ा बजट, अप्रैल में 3.48% पर पहुंची महंगाई दर

Tue, 12 May 2026 04:34 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 12 May 2026 04:34 PM IST
सार

खाने-पीने की चीजों के महंगे होने से अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत हुई। महंगाई दर आरबीआई के 4% के लक्ष्य से अभी भी नीचे है, लेकिन टमाटर और पर्सनल केयर उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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India's Retail Inflation Edges Up to 3.48% in April as Food Prices Firm Up
खुदरा महंगाई दर - फोटो : ANI

विस्तार

भारत में आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर हल्का झटका लगा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे पिछले महीने यानी मार्च में यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत पर था। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों, विशेषकर रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की कीमतों में आया उछाल है। हालांकि, अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात यह है कि समग्र महंगाई दर अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के लक्ष्य के काफी नीचे है।

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खाद्य महंगाई और सब्जियों की कीमतों का हाल 

अर्थव्यवस्था के इन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लोगों के रसोई का बजट मुख्य रूप से बिगड़ा है। खाद्य महंगाई दर मार्च के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.20 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसमें ग्रामीण इलाकों की खाद्य महंगाई दर शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ी है। 

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सब्जियों की कीमतों की बात करें तो बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला है:

  • टमाटर ने किया लाल: टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर 35.28 प्रतिशत का भारी उछाल आया है।
  • आलू-प्याज से राहत: दूसरी तरफ, आलू और प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट (क्रमशः -23.69 प्रतिशत और -17.67 प्रतिशत) दर्ज की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
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पर्सनल केयर उत्पादों में भारी उछाल

महंगाई का असर केवल राशन तक सीमित नहीं है। अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा महंगाई पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं की श्रेणी में देखी गई, जिसने 17.66 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की। इसके विपरीत, ईंधन से जुड़ी कीमतों में नरमी के कारण ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई दर -0.01 प्रतिशत पर लगभग सपाट रही, जिससे माल ढुलाई और यात्रा लागत में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई।


महंगाई दर में मामूली वृद्धि हुई है, फिर भी सरकार और आरबीआई के लिए स्थिति नियंत्रण में है। भारत ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के पांच वर्षों के लिए अपनी खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य 4 प्रतिशत (2% से 6% के दायरे में) पर बरकरार रखा है।


एक सर्वे में खुदरा महंगाई के 3.8 प्रतिशत तक जाने का अनुमान जताया गया था, ऐसे में मौजूदा 3.48 प्रतिशत का आंकड़ा अनुमानों से काफी बेहतर है। हालांकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भविष्य में ऊर्जा और खाद्य लागत बढ़ने का जो जोखिम पैदा हुआ है, उस पर आगामी मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक की पैनी नजर रहेगी।

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