एआई: 2031 तक हर साल चाहिए 6 ट्रिलियन डॉलर का बाजार, तभी वसूल हो पाएगी इस पर खर्च हो रही भारी-भरकम राशि
एआई बाजार को 2031 तक करीब $6 ट्रिलियन सालाना तक पहुंचना होगा। जानिए बैन की रिपोर्ट में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, नए राजस्व स्रोत और भारत की चुनौती के बारे में क्या कहा गया है।
विस्तार
एआई पर दुनिया जितना बड़ा निवेश कर रही है, उतनी ही बड़ी चुनौती अब उसके सामने खड़ी हो रही है- इस निवेश की कमाई कहां से आएगी? बेन एंड कंपनी की नई रिपोर्ट के मुताबिक, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले भारी खर्च को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए वैश्विक एआई बाजार को 2031 तक बढ़कर करीब 6 ट्रिलियन डॉलर सालाना होना होगा। यानी आने वाले वर्षों में AI को सिर्फ कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीक से आगे बढ़कर नए कारोबार और नए राजस्व स्रोत तैयार करने होंगे।
2031 तक एआई पर कितना खर्च हो सकता है?
बैन एंड कंपनी की 7वीं वार्षिक ग्लोबल टेक्नोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर हर साल करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च हो सकता है। इसमें नए डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और मौजूदा जीपीयू, मेमोरी और नेटवर्किंग उपकरणों के अपग्रेड शामिल हैं।
रिपोर्ट ने अनुमान लगाया है कि अगर किसी उद्योग का पूंजीगत खर्च उसके राजस्व का करीब 25 फीसदी रहता है, तो 1.5 ट्रिलियन डॉलर के सालाना इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बनाए रखने के लिए एआई बाजार का आकार करीब छह ट्रिलियन डॉलर सालाना होना जरूरी होगा।
क्या मौजूदा एआई कारोबार से यह पैसा आ पाएगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, केवल मौजूदा एआई एप्लिकेशन इस जरूरत को पूरा नहीं कर पाएंगे।
- कंज्यूमर एआई: सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन से 2031 तक 200-400 अरब डॉलर
- एंटरप्राइज एआई: सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सेल्स, मार्केटिंग, कस्टमर सर्विस और एआई ऑपरेशंस से 1-1.4 ट्रिलियन डॉलर
इन दोनों स्रोतों को जोड़ने पर भी करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर का राजस्व अंतर रह जाता है। इसे भरने के लिए AI को नए बाजार और नए उपयोग विकसित करने होंगे।
यह 4.2 ट्रिलियन डॉलर कहां से आएगा?
बैन ने चार प्रमुख संभावित क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें सर्च और विज्ञापन से 100-200 अरब डॉलर का अवसर शामिल है। AI मॉडल पारंपरिक सर्च इंजन की जगह ले सकते हैं और चैटबॉट में विज्ञापन को जोड़ सकते हैं।
दूसरा बड़ा क्षेत्र ऑटोनॉमस व्हीकल, ट्रक, ड्रोन और औद्योगिक ऑटोमेशन है, जहां करीब 400 अरब डॉलर का अवसर बन सकता है।
तीसरा क्षेत्र फिजिकल एआई है। इसमें सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें शामिल हैं। बैन के अनुसार, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस-डिफेंस जैसे क्षेत्रों में इसका बाजार करीब 900 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
चौथा क्षेत्र उन नए उत्पादों और सेवाओं का है, जो अभी अस्तित्व में ही नहीं हैं। एआई आधारित दवा खोज, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और ऊर्जा उत्पादन इसके उदाहरण हो सकते हैं।
क्या सिर्फ कर्मचारी उत्पादकता से एआई का खर्च निकल जाएगा?
बैन के ग्लोबल टेक्नोलॉजी प्रैक्टिस के चेयरमैन डेविड क्रॉफर्ड के मुताबिक, एआई की चर्चा फिलहाल कर्मचारी उत्पादकता पर ज्यादा केंद्रित है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की अर्थव्यवस्था को देखते हुए उत्पादकता लाभ से कहीं ज्यादा नए राजस्व की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को टिकाऊ तरीके से फंड करने के लिए वैश्विक जीडीपी की सालाना वृद्धि में करीब 1 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
बड़ी टेक कंपनियां एआई पर कितना खर्च कर रही हैं?
एआई निवेश का पैमाना समझने के लिए हाइपरस्केलर्स का खर्च महत्वपूर्ण है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन, मेटा और ऑरेकल जैसी प्रमुख कंपनियों का कुल पूंजीगत खर्च 2026 में 780 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। के अनुसार, यह तीन साल पहले के स्तर से करीब पांच गुना है।
इस निवेश का असर हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2026 के बीच हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर शेयरों की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर 24 फीसदी रही, जबकि सॉफ्टवेयर की वृद्धि दर 6 फीसदी रही।
भारत के लिए एआई में अगली चुनौती क्या है?
बैन के पार्टनर और इंडिया हेड ऑफ एआई, इनसाइट एंड सॉल्यूशन प्रैक्टिशन गुरपीआर सिबिया के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 90 फीसदी कंपनियां अभी एआई टूल और सीमित उपयोग के मामलों को लागू करने पर केंद्रित हैं, न कि काम करने के तरीके को पूरी तरह बदलने पर।
उनके अनुसार, भारत में भी यही अंतर दिखाई देता है। अब केवल एआई तक पहुंच महत्वपूर्ण नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ेगा कि कंपनियां कितनी तेजी से अपने वर्कफ्लो को बदलती हैं, डेटा और निर्णय लेने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाती हैं और एआई को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं।
बैन की रिपोर्ट का मुख्य संकेत यह है कि एआई का अगला चरण केवल ज्यादा शक्तिशाली मॉडल बनाने का नहीं, बल्कि उनसे नए और बड़े आर्थिक मूल्य का निर्माण करने का होगा। 2031 तक 6 ट्रिलियन डॉलर के सालाना बाजार का लक्ष्य पूरा करने के लिए एआई को मौजूदा उत्पादकता लाभ से आगे बढ़कर नए उद्योग, सेवाएं और राजस्व मॉडल पैदा करने होंगे।