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Tata Row: 'टाटा संस की लिस्टिंग से बदल जाएगा 150 साल पुराना बिजनेस मॉडल', नोएल आईपीओ का विरोध कर क्या बोले?

Tue, 29 Sep 2026 08:47 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 29 Sep 2026 08:47 PM IST
सार

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा है कि टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग से समूह का 150 साल पुराना निवेश और सामाजिक विकास मॉडल बुनियादी रूप से बदल जाएगा। जानिए आरबीआई के नियमों, टाटा संस के पुनर्गठन प्रस्ताव और इस विवाद के पीछे के सभी कारणों की पूरी रिपोर्ट। पूरी खबर पढ़ें।

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Listing Tata Sons Would Fundamentally Change Group's 150-Year Investment Model says Noel Tata
एनचंद्रशेखरन का टाटा संस से इस्तीफा - फोटो : amarujala.com (AI Assisted)

विस्तार

टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' की सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर समूह के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान हुए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा कि टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग से समूह का 150 साल पुराना दीर्घकालिक निवेश और सामाजिक-विकास मॉडल बुनियादी तौर पर बदल जाएगा। उनके अनुसार, सार्वजनिक लिस्टिंग के बाद होल्डिंग कंपनी को अपने सामाजिक उद्देश्यों और तिमाही वित्तीय रिटर्न मांगने वाले सार्वजनिक निवेशकों की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाना होगा, जिससे एक नया विरोधाभास पैदा होगा।

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टाटा संस की लिस्टिंग से 150 साल पुराना बिजनेस मॉडल क्यों बदल जाएगा?

नोएल टाटा के अनुसार, टाटा समूह ऐतिहासिक रूप से देश की जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं में निवेश करता आया है, जैसा कि जेआरडी टाटा के दर्शन में निहित था। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स का मुख्य दायरा स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। 

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यदि टाटा संस एक सार्वजनिक कंपनी बन जाती है, तो सार्वजनिक निवेशक तिमाही-दर-तिमाही आधार पर अपने निवेश की वृद्धि की मांग करेंगे। इस स्थिति में कंपनी के 150 साल पुराने दीर्घकालिक दृष्टिकोण और शेयरधारकों को त्वरित वित्तीय रिटर्न देने की मांग के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। वर्तमान में टाटा संस के लाभांश से ट्रस्ट्स की आय बनी रहती है, जिसका कॉर्पस बीते 30-35 वर्षों में लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है।

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टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है?

यह पूरा विवाद सितंबर 2026 में तब तेज हुआ जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस की अपर लेयर एनबीएफसी श्रेणी से हटने की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य बना रहा। 


इसके बाद टाटा संस के बोर्ड ने 4-1 के बहुमत से एन चंद्रशेखरन को तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए कार्यकारी चेयरमैन पुनर्नियुक्त किया और लिस्टिंग नियमों के अनुपालन की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स का प्रतिनिधित्व कर रहे नोएल टाटा ने इस फैसले के खिलाफ वोट दिया और बोर्ड के इस निर्णय को गैर-कानूनी करार देते हुए सार्वजनिक लिस्टिंग का विरोध किया। उल्लेखनीय है कि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66 प्रतिशत, शापूरजी पालोनजी ग्रुप की 18.37 प्रतिशत और टाटा ग्रुप की कंपनियों की लगभग 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

लिस्टिंग से बचने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने क्या वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है?

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस को एक रणनीतिक पुनर्गठन का प्रस्ताव भेजा है, जिसे आरबीआई (आरबीआई) के साथ साझा करके लिस्टिंग से बचा जा सके। 

ऑपरेटिंग बिजनेस को शामिल करना: इस प्रस्ताव के तहत 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स' जैसी समूह की कुछ परिचालन कंपनियों को टाटा संस में शामिल करने की योजना है।

  • पुरानी संरचना की बहाली: यह कदम टाटा संस की उस पुरानी संरचना को बहाल करेगा जिसमें होल्डिंग कंपनी के पास ऑपरेटिंग और इन्वेस्टमेंट दोनों तरह के बिजनेस होते थे (जैसे वर्ष 2004 में डिमर्ज और लिस्ट होने से पहले टीसीएस टाटा संस का एक विभाग था)।
  • एनबीएफसी स्थिति में बदलाव: ऑपरेटिंग बिजनेस जोड़ने से टाटा संस कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) या एनबीएफसी की श्रेणी से बाहर हो जाएगी, जिससे लिस्टिंग की बाध्यता खत्म हो सकती है।

आगे क्या हो सकता है और इसका समूह पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस से आग्रह किया है कि वह इस पुनर्गठन प्रस्ताव की समीक्षा करे, इसमें आवश्यक संशोधन करे और रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ बातचीत करे। यदि आरबीआई इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो टाटा संस अपनी प्राइवेट कंपनी की स्थिति बनाए रख सकेगी और अपने दीर्घकालिक सामाजिक व औद्योगिक निवेश मॉडल को बिना किसी बाजार दबाव के जारी रख सकेगी। हालांकि, बोर्ड और ट्रस्ट्स के बीच बना यह गतिरोध आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, जिस पर पूरे भारतीय कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं।

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