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Zero Carbon Emission: भारत की क्लाइमेट टेक क्रान्ति, निवेश का अभूतपूर्व अवसर
Fri, 27 Dec 2024 04:46 PM IST
अनिल वैश्य
रजत वर्मा, नई दिल्ली
रजत वर्मा, नई दिल्ली
Published by: अनिल वैश्य
Updated Fri, 27 Dec 2024 04:46 PM IST
सार
भारत 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में देश ऐतिहासिक बदलाव के मोड़ पर है। काउन्सिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेन्ट एण्ड वॉटर के अनुसार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 10.1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता है। आइए इस बारे में और विस्तार से जानें।
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रजत वर्मा
- फोटो : लोहम
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विस्तार
भारत 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में देश ऐतिहासिक बदलाव के मोड़ पर है। काउन्सिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेन्ट एण्ड वॉटर के अनुसार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 10.1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता है। भारत को जलवायु परिवर्तन में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए फाइनैंशियल, तकनीकी एवं सामाजिक बदलावों की ज़रूरत है, जो निवेशकों को अच्छे रिटर्न के अवसर देंगे।
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यह निवेश बहुत अधिक भी नहीं है,। चूंकि पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के बिगड़ते प्रभावों से जूझ रही है, ऐसे में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है- न सिर्फ इसलिए कि भारत सबसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, बल्कि इसलिए भी कि दुनिया की सबसे संवेदनशील आबादी इसी देश में रहती है। विकार्बोनीकरण की योजनाओं की बात करें तो इससे कई पहलु जुड़े हैं जैसे नवीकरणीय उर्जा, स्थायी परिवहन, हरित हाइड्रोजन, ओद्यौगिक रूपान्तरण और आधुनिक स्टोरेज समाधान। इनमें से हर पहलु मायने रखता है, जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम कर भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान दे सकता है।
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हरित रूपान्तरण
भारत के हरित रूपान्तरण में पावर सेक्टर का योगदान महत्वपूर्ण है, जिसके लिए निवेश के एक बड़े हिस्से -11.2 ट्रिलियन डॉलर- की ज़रूरत है। इसमें नवीकरणीय उर्जा- सोलर, विंड, बायोमास और हाइड्रोपावर पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इसमें से 7.1 ट्रिलियन डॉलर का उपयोग सोलर फार्म और ऑफशोर विंड टरबाईन में किया जाएगा। 3.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि उर्जा के सुगम प्रवाह को सुनिश्चित करने हेतु संचरण, वितरण तथा आधुनिक तकनीकों जैसे हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करेंट सिस्टम तथा स्मार्ट ग्रिड्स के लिए तय की गई है।
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यह बदलाव गति पकड़ने लगा है। 2023 में भारत ने अतिरिक्त 15 गीगावॉट नवीकरणीय उर्जा क्षमता इंस्टॉल की, इसमें सबसे ज़्यादा योगदान सोलर एनर्जी का रहा। हालांकि 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के लिए निरंतर निवेश एवं नीतिगत सहयोग की आवश्यकता है।
भारत के मोबिलिटी सेक्टर का विद्युतीकरण
आज परिवहन क्षेत्र भी बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, एक अनुमान के अनुसार स्थायी परिवहन समाधानों में रूपान्तरण के लिए 277 बिलियन डॉलर निवेश की आवश्यकता है। इस रूपान्तरण का केन्द्र बिन्दु इलेक्ट्रिक वाहन हैं। अफॉर्डेबल दोपहिया वाहनों से लेकर हाई परफोर्मेन्स कारों तक, ईवी सिस्टम तेज़ी से विकसित हो रहा है। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे फास्ट चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार भी इस अडॉप्शन को गति प्रदान कर रहा है।
हाइड्रोजन फ्यूल सैल और वैकल्पिक ईंधन जैसे बायोएथेनॉल की लोकप्रियता भी बढ़ रही है, जो हैवी-ड्यूटी ट्रांसपोर्ट और लम्बी दूरी की ट्रकिंग के लिए स्थायी समाधान उपलब्ध कराते हैं। भारत ने 2030 तक ईवी की पहुंच को 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, ऐसे में तकनीकी इनोवेशन और आर्थिक विकास की दृष्टि से इस सेक्टर में अपार अवसर हैं।
हरित हाइड्रोजन- अगला बड़ा कदम
संभवतया भारत के शुद्ध शून्य लक्ष्यों में हरित हाइड्रोजन सबसे ज़्यादा मायने रखती है, जो भविष्य का ईंधन होगी। 2.1 ट्रिलियन के अनुमानित निवेश के साथ, भारत ने हाइड्रोजन उत्पादन में ग्लोबल लीडर बनने का लक्ष्य तय किया है। नवीकरणीय उर्जा से पावर्ड इलेक्ट्रोलाइसिस से उत्पन्न हरित हाइड्रोजन में, स्टील, सीमेंट और अमोनिया उत्पादन जेसे जटिल उद्योगों के विकार्बोनीकरण की क्षमता है।
2021 में लॉन्च किया गया नेशनल हाइड्रोजन मिशन पहले से, उत्पादन और निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर रहा है। इसकी पूर्ण क्षमता का लाभ उठाने के लिए हाइड्रोजन संग्रहन, परिवहन और वितरण के बुनियादी ढाचें का विकास करना होगा। साथ ही नई मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करना होगा।
भविष्य की ओरः एनर्जी स्टोरेज और ग्रिड का आधुनिकीकरण
न्वीकरणीय उर्जा स्रोतों जैसे सोलर और विंड एनर्जी के अस्थायी होने के कारण इनके लिए सशक्त स्टोरेज सिस्टम बनाने की ज़रूरत है। मांग एवं आपूर्ति के बीच तालमेल बनाने के लिए आधुनिक बैटरी टेक्नोलॉजी जैसे लिथियम आयन और फ्लो बैटरियों तथा पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज की आवश्यकता है।
स्मार्ट ग्रिड भी उतने ही मायने रखते हैं। नेक्स्ट जनरेशन का यह नेटवर्क ग्रिड को प्रत्यास्थ बनाता है उर्जा के इस्तेमाल को अनुकूलित करता है तथा नवीकरणीय उर्जा को अधिक प्रभाविता के साथ समेकित करता है। इन क्षेत्रों में निवेश न सिर्फ भारत के नवीकरणीय लक्ष्यों को समर्थन दे सकता है बल्कि विद्युत की भरोसेमंद एवं प्रभावी आपूर्ति को भी सुनिश्चित कर सकता है।
ओद्यौगिक विकार्बोनीकरणः मैनुफैक्चरिंग का नया दौर
भारत का ओद्यौगिक सेक्टर ग्रीन हाउस गैसों में उत्सर्जन में बड़ा योगदान देता है, ऐसे में जलवायु के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए इसमें सुधार की आवश्यकता है। कार्बन कैप्चर एण्ड सीक्वेस्ट्रेशन टेक्नोलॉजी, उर्जा प्रभावी सिस्टम तथा ओद्यौगिक प्रक्रियाओं का विद्युतीकरण इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सीमेंट, रसायन और स्टील जैसे उद्योगों के लिए ये इनोवेशन न सिर्फ अनुपालन को सुनिश्चित करते हैं बल्कि कम कार्बन के प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देकर इन्हें विश्वस्तरीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी भी बनाते हैं। इस निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलता है, साथ ही उर्जा की बचत और कार्बन क्रेडिट इसकी उपयोगिता को और अधिक बढ़ा देते हैं।
निवेश के लिए अनुकूल माहौल
भारत के क्लाइमेट टेक सेक्टर में निवेश की गति को नकारा नहीं जा सकता। 2023 में देश ने क्लाइमेट टेक फंडिंग में 116 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया, इसमें ट्रांसपोर्टेशन 18.6 बिलियन डॉलर के साथ अग्रणी स्थिति पर रहा। नवीकरणीय उर्जा परियोजनाओं खासतौर पर सोलर एनर्जी में बढ़ता निवेश, भारत की हरित अर्थव्यवस्था में विश्वस्तरीय निवेशकों के बढ़ते भरोसे की पुष्टि करता है।
सरकारी नीतियां इसे और अधिक गति प्रदान कर रही हैं। कई योजनाएं जैसे सोलर मोड्यूल मैनुफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेन्टिव तथा ईवी बैटरी प्रोडक्शन ने देशी और विदेशी निवेशकों को लुभाया है। नेशनल हाइड्रोजन मिशन तथा हरित हाइड्रोजन के लिए इन्सेन्टिव इस सिस्टम को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
चुनौतियों से निपटना
इतनी प्रगति के बावजूद कई चुनौतियां हैं। विनियामक अनिश्चितताएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर की बाधाएं और दुनिया भर में आर्थिक हलचल के चलते निवेश सतर्क रूख अपना रहे हैं। हालांकि इस सेक्टर को मिल रहे नीतिगत सहयेग और तकनीकी इनोवेशन के चलते यह निवेश आकर्षित करने में सफल रहा है। एक अनुमान के अनुसार 2024 में फंडिंग का स्तर 2023 के आंकड़े को पार कर जाएगा। ऐसे में यह सेक्टर निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है।
आगे का मार्ग
भारत का क्लाइमेट टेक रूपान्तरण न सिर्फ पर्यावरण स्थायित्व में योगदान दे रहा है बल्कि आर्थिक अवसर उत्पन्न कर अपनी ग्लोबल लीडरशिप को भी मजबूत बना रहा है। नवीकरणीय उर्जा से लेकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हाइड्रोजन और ओद्यौगिक विकार्बोनीकरण तक यह सेक्टर निवेशकों के लिए लुभावने अवसर उत्पन्न कर रहा है।
पूरी दुनिया हरित भविष्य की ओर रूख कर रही है। ऐसे में भारत के क्लाइमेट टेक सिस्टम में अपार संभावनाएं हैं। निवेशकों के लिए सवाल यह है कि वे किस तरह से इस तेज़ी से बदलते सिस्टम में योगदान दें। आज लिए गए फैसले पर आने वाला कल निर्भर होगा। समय आ गया है कि हम आज निवेश कर अपने आने वाले कल को सुरक्षित बनाएं।
आलेख: रजत वर्मा, संस्थापक और सीईओ, लोहम