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Import Ban: क्या लैपटॉप, टैबलेट व पीसी के आयात पर रोक मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने की कवायद है? जानें मायने

Thu, 03 Aug 2023 08:40 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 03 Aug 2023 08:40 PM IST
सार

Import Ban: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात जिसमें लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कंप्यूटर शामिल हैं, अप्रैल से जून की अवधि में 19.7 अरब डॉलर था, जो पिछले साल की तुलना में 6.25 प्रतिशत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कंप्यूटर भारत के कुल वार्षिक आयात का लगभग 1.5 प्रतिशत है, जिसमें से लगभग आधे चीन से आयात होता है।

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India restricts import of laptop, tablets and servers what does it mean
लैपटॉप आयात पर बैन - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत सरकार ने लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर और सर्वर के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, गुरुवार को सरकार की ओर से एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) की अधिसूचना में कहा गया है कि इन सभी आयातों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऐसे किसी भी आयात के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होगी अपवाद के रूप में प्रति खेप केवल एक ऐसे उत्पाद के आयात के लिए छूट दी जाएगी। सरकार के इस कदम से एपल, डेल और सैमसंग जैसी कंपनियों को झटका लगेगा और उन्हें भारत में अपना विनिर्माण बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। भारत में मौजूदा नियम कंपनियों को स्वतंत्र रूप से लैपटॉप आयात करने की अनुमति देते हैं, लेकिन नया नियम इन उत्पादों के लिए एक विशेष लाइसेंस को अनिवार्य करेगा जैसा की 2020 में देश में टीवी के शिपमेंट के निर्यात पर लगाया गया था।

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डीजीएफटी की ओर से जारी की गई लैपटाॅप, टैबलेट और पीसी के आयात पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ी अधिसूचना

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लैपटॉप - फोटो : Microsoft

हर नए मॉडल के लिए ग्राहकों को करना पड़ सकता है लंबा इंतजार

भारतीय बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि लाइसेंसिंग व्यवस्था का मतलब होगा कि हर नए लैपटॉप और टैबलेट के मॉडल के लिए अब ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। बता दें कि भारत में अगले कुछ महीनों में फेस्टिव सीजन शुरू हो जाएगा जब इन उत्पादों की बिक्री आमतौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में आयात पर रोक का असर कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ प्रोडक्ट्स महंगे भी हो सकत हैं। डीजीएफटी की ओर से जारी अधिसूचना में हालांकि इस कदम का कोई कारण नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपनी "मेक इन इंडिया" योजना के तहत स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना चाहती है इसलिए आयात पर सख्ती बरती जा रही है। अगर स्थानीय स्तर पर सरकार की मंशा के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का विनिर्माण शुरू हो जाता है तो देर से ही सही पर कीमतों में नरमी से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

अप्रैल से जून के बीच देश का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात 19.7 अरब डॉलर रहा

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात जिसमें लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कंप्यूटर शामिल हैं अप्रैल से जून की अवधि में 19.7 अरब डॉलर था, जो पिछले साल की तुलना में 6.25 प्रतिशत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कंप्यूटर भारत के कुल वार्षिक आयात का लगभग 1.5 प्रतिशत है, जिसमें से लगभग आधे चीन से आयात होता है। बता दें कि एपल के कई आईपैड और डेल के लैपटॉप स्थानीय रूप से निर्मित होने के बजाय देश में आयात किए जाते हैं। एमके ग्लोबल की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के अनुसार ऐसा लगता है कि सरकार के इस फैसले का मकसद भारी मात्रा में आयात किए जाने वाले उत्पादों के स्थान पर स्थानीय तौर पर उत्पादित प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देता है। सरकार के इस फैसले पर हालांकि एपल, डेल और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियों ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत में जिन कंपनियों के सबसे ज्यादा लैपटॉप और कंप्यूटर आयात किए जाते हैं उनमें उपरोक्त तीनों कंपनियों के अलावे एसर, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, लेनोवो और एचपी जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

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लैपटॉप - फोटो : istock

विशेषज्ञों को उम्मीद- सरकार के इस कदम से देश में विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग निकाय एमएआईटी के पूर्व महानिदेशक अली अख्तर जाफरी के अनुसार सरकार का यह कदम झटका नहीं बल्कि देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने की कवायद है। उन्होंने कहा, "इस कदम का मकसद भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देना है।" उनके अनुसार इस कदम से डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को फायदा होने की उम्मीद है। कंपनी के शेयरों में सरकार के इस फैसले के बाद 7 फीसदी से अधिक की तेजी दिखी।

सरकार के फैसले का एक कारण डेटा चोरी से बढ़ी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करना भीः सूत्र

सरकार से जुड़े एक सूत्र के अनुसार स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के अलावा इस कदम का उद्देश्य चीन से आपूर्ति को रोकना है, क्योंकि उसे ऐसे उत्पादों के जरिए हो रही डेटा चोरी से सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। एक सूत्र के अनुसार प्रतिबंध से भारत को केवल "विश्वसनीय भागीदारों" से ऐसे हार्डवेयर आयात करने में मदद मिलेगी। भारत की ओर से प्रतिबंधित उत्पादों में से आधे चीन से आते हैं, जिसके साथ दिल्ली के संबंधों में 2020 में सीमा संघर्ष के बाद से खटास आ गई है। उसके बाद भारत ने ड्रैगन (चीन) से निवेश और व्यापार को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। 

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टैबलेट - फोटो : HP

सरकार ने प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन करने की समय सीमा बढ़ाई

भारत सरकार ने आईटी हार्डवेयर विनिर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए कंपनियों के लिए दो अरब डॉलर के प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन करने की समय सीमा बढ़ा दी है जिसमें लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर और सर्वर जैसे उत्पाद शामिल हैं। यह योजना वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला में एक पावरहाउस बनने की भारत की महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने  इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में 2026 तक 300 अरब डॉलर के वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल फोन जैसे उत्पादों पर पहले भी उच्च कर लगाने जैसे कदम उठाए हैं।

2021-22 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का आयात 32% बढ़कर 43 अरब डॉलर हुआः सरकार

दिसंबर में संसद में साझा किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में तैयार इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात मूल्य 2021-22 में 32% बढ़कर 43 अरब डॉलर पर पहुंच गया जो 2019-20 में 32 अरब डॉलर था। उस दौरान सरकार की ओर से बताया गया था कि स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पेश किए गए प्रोत्साहनों और योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक सामानों के कुल आयात में आयातित तैयार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं (घटकों सहित) का हिस्सा 2019-20 के 69% की तुलना में घटकर 2021-22 में 64 प्रतिशत रह गई। हांगकांग स्थित मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट का अनुमान है कि 30 की पहली छमाही के दौरान भारत भेजे गए लगभग 35-30% लैपटॉप और 2023% टैबलेट स्थानीय स्तर पर निर्मित किए गए थे। हांगकांग स्थित मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट का अनुमान है कि 2023 की पहली छमाही के दौरान भारतीय बाजार में मौजूद 30-35% लैपटॉप और 30% टैबलेट स्थानीय स्तर पर बने हैं।

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