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आईएमएफ की रिपोर्ट: वैश्विक झटकों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक उड़ान, 2025 में 7.6% विकास दर का अनुमान
Tue, 14 Apr 2026 07:47 PM IST
Kumar Vivek
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kumar Vivek
Updated Tue, 14 Apr 2026 07:47 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है। 2025 में 7.6% और 2026 में 6.5% विकास दर का अनुमान। महंगाई और ऊर्जा संकट पर पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष।
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार अपनी मजबूती का प्रदर्शन कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने बताया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अस्थिरता के बावजूद भारत की विकास दर स्थिर बनी हुई है। यह रिपोर्ट उन चिंताओं को काफी हद तक कम करती है जिनमें कहा जा रहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत जैसी तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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विकास दर के मजबूत और सकारात्मक आंकड़े
भारत, जापान, यूएई, नीदरलैंड और चिली के पत्रकारों के साथ एक साक्षात्कार के दौरान गौरींचस ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की सराहना की। आईएमएफ के अनुसार, वित्त वर्ष के आधार पर 2025 में भारत का आर्थिक विकास 'बहुत ही शानदार' रहा है, जिसे 7.6 प्रतिशत आंका गया है। यह सकारात्मक गति यहीं रुकने वाली नहीं है, बल्कि अगले साल भी इसके जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
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मुख्य अर्थशास्त्री ने जानकारी दी है कि आईएमएफ ने 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत रखा है, जो उनके पिछले अनुमानों की तुलना में थोड़ा अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व युद्ध का अर्थव्यवस्था पर कुछ नकारात्मक प्रभाव जरूर पड़ रहा है, लेकिन 2025 से मिली मजबूत आर्थिक गति इस नुकसान की आसानी से भरपाई कर रही है।
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महंगाई और ऊर्जा निर्भरता की बड़ी चुनौतियां
एक तरफ जहां विकास दर के आंकड़े उत्साहजनक हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत के सामने मुद्रास्फीति (महंगाई) एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। आईएमएफ का अनुमान है कि 2026 में भारत की महंगाई दर बढ़कर 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। गौरींचस ने इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल और भारत में 2026 की शुरुआत में खाने-पीने की चीजों (खाद्य पदार्थों) की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार बताया है।
इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक माहौल में भारत की ऊर्जा और कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता एक बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है। यह संरचनात्मक निर्भरता आने वाले समय में अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए कुछ नई बाधाएं खड़ी कर सकती है।
सुधरते व्यापारिक संबंध और भारत की वैश्विक भूमिका
इन तमाम चुनौतियों के बीच एक बड़ी राहत अमेरिका और भारत के बीच सुधरते व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच हालिया व्यापारिक चर्चाओं से न केवल टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर अनिश्चितता कम हुई है, बल्कि टैरिफ का स्तर भी घटा है। ऐसे समय में जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी और अनिश्चितता से जूझ रही हैं, आईएमएफ का यह आकलन भारत को वैश्विक विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में स्थापित करता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया संघर्ष वैश्विक आर्थिक विकास को धीमा कर सकता है और महंगाई को बढ़ा सकता है। ऊर्जा बाजार और व्यापार आपूर्ति में आ रही बाधाओं ने हालात को और जटिल बना दिया है।
आईएमएफ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बो ली ने कहा कि मौजूदा स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'असाधारण अनिश्चितता' में डाल दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अब लगभग सभी संभावनाएं 'ऊंची कीमतें और धीमी विकास दर' की ओर इशारा कर रही हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने मजबूत घरेलू मांग, शानदार निवेश, नीतिगत स्थिरता और एक लचीले निजी क्षेत्र के दम पर अपनी तेज विकास दर को बनाए रखा है। मध्य पूर्व संकट के कारण हालांकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और कमोडिटी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन इसका व्यापक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह वैश्विक झटका कितने समय तक और कितनी तीव्रता के साथ बना रहता है। कुल मिलाकर, आईएमएफ की यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि भारत की वर्तमान विकास यात्रा उसकी 6.5 प्रतिशत की दीर्घकालिक क्षमता के बिल्कुल अनुरूप है।
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