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Mumbai: गणपति की बड़ी प्रतिमाएं समुद्र में, छोटी प्रतिमाओं का तालाबों में होगा विसर्जन; हाईकोर्ट में सरकार

Wed, 23 Jul 2025 07:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 23 Jul 2025 07:36 PM IST
सार

Mumbai: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक हलफनामा देकर बताया है कि एक निश्चित ऊंचाई की घरेलू गणेश मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, घरेलू प्रतिमाओं का विसर्जन तालाबों में होगा। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दिए एक हलफनामे में यह बात कही है।

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Immersion of large Ganesh idols to take place in sea; Maharashtra govt in Bombay HC
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक हलफनामा देकर बताया है कि एक निश्चित ऊंचाई की घरेलू गणेश मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, घरेलू प्रतिमाओं का विसर्जन तालाबों में होगा। सरकार की ओर से एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई है। सरकार की ओर से कहा गया है कि पर्यावरण की जिम्मेदारी के साथ परंपरा को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यह फैसला लिया गया है।

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सरकार के अनुसार, सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों की बड़ी मूर्तियों को सभी आवश्यक पर्यावरणीय सावधानियों के साथ पारंपरिक तरीके से समुद्र में विसर्जित किया जाएगा। इस कदम से बड़ी गणेश मूर्तियों के समुद्र में विसर्जन का रास्ता साफ हो जाएगा। 
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पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) पर प्रतिबंध से लाखों मूर्तिकारों की आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और एक प्रमुख पारंपरिक उद्योग की अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ गई है। इस मसले पर महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने राजीव गांधी विज्ञान व प्रौद्योगिकी आयोग से एक गहन अध्ययन करने का आग्रह किया था। प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर के नेतृत्व में एक पैनल का गठन किया गया था, पॉप-अप ऑइल के उपयोग और उसके पर्यावरणीय प्रभाव की जांच की और सरकार को प्रमुख सिफारिशें प्रस्तुत कीं।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा न्यायालय को यह रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, पीओपी पर प्रतिबंध हटा लिया गया। इसके बाद न्यायालय ने राज्य सरकार को बड़ी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसा सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक हलफनामा दिया है कि वह सभी घरेलू गणपति मूर्तियों का विसर्जन केवल कृत्रिम तालाबों में ही करने की अनुमति देगी। सरकार के अनुसार, गणेशोत्सव मंडलों की बड़ी मूर्तियों को उनकी 100 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा के अनुसार समुद्र में विसर्जित किया जाएगा।

हलफनामे के अनुसार, राज्य सरकार ने समुद्र में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कई उपचारात्मक उपाय करने का भी प्रस्ताव दिया था। हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में यह भी कहा गया है कि यह निर्णय वरिष्ठ वैज्ञानिक अनिल काकोडकर की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के बाद लिया गया। विज्ञप्ति के अनुसार, इस मामले की सुनवाई कल बॉम्बे उच्च न्यायालय में होगी।

इससे पहले 10 जुलाई को 100 वर्ष से अधिक पुरानी परंपरा वाले सार्वजनिक गणेशोत्सव को आधिकारिक तौर पर "महाराष्ट्र राज्य महोत्सव" घोषित किया गया था। यह घोषणा राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने विधानसभा में की।


विधानसभा में बयान देते हुए मंत्री आशीष शेलार ने कहा, "सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत महाराष्ट्र में 1893 में लोकमान्य तिलक ने की थी। यह त्योहार सामाजिक, राष्ट्रीय और भाषाई गौरव के साथ-साथ स्वतंत्रता और स्वाभिमान से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह आज भी उसी भावना से जारी है। यह महाराष्ट्र के लिए गर्व और सम्मान की बात है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र सरकार इस त्योहार के सांस्कृतिक महत्व और वैश्विक उपस्थिति को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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