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दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्त: भारत की रफ्तार 7% कैसे? आईएमएफ ने बढ़ाया अनुमान, समझें वजह
Tue, 13 Oct 2026 08:59 AM IST
राकेश कुमार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 13 Oct 2026 08:59 AM IST
सार
आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान 2026 और 2027 के लिए बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र को भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बताया गया है। महंगे कच्चे तेल और दुनिया में जारी संघर्षों के बावजूद भारत के सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने का अनुमान है। दूसरी ओर, चीन, रूस और कुछ अन्य देशों की धीमी रफ्तार के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं की कुल विकास दर का अनुमान घटाया गया है।
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आईएमएफ ने बढ़ाया भारत के विकास दर का अनुमान
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अच्छी खबर दी है। आईएमएफ का अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 और 2027 में सात प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। खास बात यह है कि आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया है। जुलाई में उसने वर्ष 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया था। अब इसे बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है। वर्ष 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत किया गया है।
क्या है भारत की विकास दर बढ़ने की वजह?
आईएमएफ के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। देश में लोगों की ओर से सामान और सेवाएं खरीदने की मांग मजबूत बनी हुई है। सेवा क्षेत्र में भी अच्छी गतिविधियां हो रही हैं। इसके अलावा, भारत का बड़ा घरेलू बाजार, आबादी की अनुकूल स्थिति और आर्थिक सुधार भी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। आईएमएफ का मानना है कि इन वजहों से भारत की अर्थव्यवस्था में आगे भी तेजी बने रहने की संभावना है।
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यह भी पढ़ें: बिजनेस डायरी: डॉलर के मुकाबले 94.50 के स्तर पर जा सकता है रुपया; कार्ल्सबर्ग को फैक्टरी बंद करने का आदेश
युद्ध के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत?
रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण दुनिया में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। इसके बावजूद आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया है। एजेंसी के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की वजह से महंगे तेल के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95.74 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। यह 2025 के मुकाबले करीब 41 प्रतिशत ज्यादा होगी। हालांकि, 2027 में तेल की औसत कीमत घटकर 87.39 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
भारत के मुकाबले दुनिया की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ेगी?
आईएमएफ के मुताबिक, भारत की विकास दर दुनिया की औसत विकास दर से काफी ज्यादा रहेगी। 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। जुलाई में यह अनुमान 3 प्रतिशत था। वहीं, 2027 के लिए दुनिया की विकास दर 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा गया है।
कुछ विकसित देशों की विकास दर के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं। जर्मनी की अर्थव्यवस्था 2026 में 1.3 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। जुलाई में इसके 0.7 प्रतिशत रहने का अनुमान था। ब्रिटेन की विकास दर का अनुमान भी एक प्रतिशत से बढ़ाकर 1.3 प्रतिशत किया गया है। कुल मिलाकर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2026 में 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहले यह अनुमान 1.7 प्रतिशत था।
चीन और रूस की विकास दर का अनुमान क्यों घटा?
भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ने के बावजूद उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की कुल विकास दर का अनुमान घटाया गया है। आईएमएफ के मुताबिक, 2026 में इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं 3.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती हैं। जुलाई में यह अनुमान 3.8 प्रतिशत था। इसकी मुख्य वजह चीन, रूस और ब्राजील समेत पश्चिम एशिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि या गिरावट की आशंका है।
पिछले महीने एशियाई विकास बैंक (एडीबी), आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) और एस एंड पी तथा फिच जैसी एजेंसियों ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान करीब सात प्रतिशत तक बढ़ाया था। इन एजेंसियों ने मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में तेजी को इसकी प्रमुख वजह बताया था।
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क्या है भारत की विकास दर बढ़ने की वजह?
आईएमएफ के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। देश में लोगों की ओर से सामान और सेवाएं खरीदने की मांग मजबूत बनी हुई है। सेवा क्षेत्र में भी अच्छी गतिविधियां हो रही हैं। इसके अलावा, भारत का बड़ा घरेलू बाजार, आबादी की अनुकूल स्थिति और आर्थिक सुधार भी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। आईएमएफ का मानना है कि इन वजहों से भारत की अर्थव्यवस्था में आगे भी तेजी बने रहने की संभावना है।
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युद्ध के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत?
रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण दुनिया में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। इसके बावजूद आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया है। एजेंसी के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की वजह से महंगे तेल के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95.74 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। यह 2025 के मुकाबले करीब 41 प्रतिशत ज्यादा होगी। हालांकि, 2027 में तेल की औसत कीमत घटकर 87.39 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
भारत के मुकाबले दुनिया की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ेगी?
आईएमएफ के मुताबिक, भारत की विकास दर दुनिया की औसत विकास दर से काफी ज्यादा रहेगी। 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। जुलाई में यह अनुमान 3 प्रतिशत था। वहीं, 2027 के लिए दुनिया की विकास दर 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा गया है।
कुछ विकसित देशों की विकास दर के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं। जर्मनी की अर्थव्यवस्था 2026 में 1.3 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। जुलाई में इसके 0.7 प्रतिशत रहने का अनुमान था। ब्रिटेन की विकास दर का अनुमान भी एक प्रतिशत से बढ़ाकर 1.3 प्रतिशत किया गया है। कुल मिलाकर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2026 में 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहले यह अनुमान 1.7 प्रतिशत था।
चीन और रूस की विकास दर का अनुमान क्यों घटा?
भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ने के बावजूद उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की कुल विकास दर का अनुमान घटाया गया है। आईएमएफ के मुताबिक, 2026 में इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं 3.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती हैं। जुलाई में यह अनुमान 3.8 प्रतिशत था। इसकी मुख्य वजह चीन, रूस और ब्राजील समेत पश्चिम एशिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि या गिरावट की आशंका है।
पिछले महीने एशियाई विकास बैंक (एडीबी), आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) और एस एंड पी तथा फिच जैसी एजेंसियों ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान करीब सात प्रतिशत तक बढ़ाया था। इन एजेंसियों ने मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में तेजी को इसकी प्रमुख वजह बताया था।