बदलाव: ईपीएफओ ने सितंबर 2026 का पीएफ जमा करने की समयसीमा बढ़ाई, जानें नियोक्ताओं को कैसे राहत
ईपीएफओ ने सितंबर 2026 के लिए पीएफ जमा और ईसीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्तूबर 2026 तक बढ़ा दी है। वेतन सीमा संशोधन से आई दिक्कतों के बाद यह फैसला लिया गया।
विस्तार
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सितंबर 2026 के वेतन महीने के लिए पीएफ अंशदान जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब नियोक्ता और संबंधित प्रतिष्ठान 31 अक्तूबर 2026 तक इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल कर सकेंगे। यह फैसला कंपनियों को आ रही तकनीकी और प्रशासनिक परेशानियों को देखते हुए लिया गया है। पहले यह समयसीमा 15 अक्तूबर 2026 निर्धारित थी।
ईपीएफओ के अनुपालन प्रभाग ने 13 अक्तूबर 2026 को एक परिपत्र जारी कर यह जानकारी दी। संगठन ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत वेतन सीमा में संशोधन के बाद यह कदम उठाया है। यह संशोधन 17 सितंबर 2026 से लागू हुआ था। इस बदलाव के कारण कंपनियों को अपने पेरोल प्रणाली, वेतन विवरण और पीएफ सहित अन्य वैधानिक अंशदान की गणना में जरूरी बदलाव करने पड़ रहे थे। कई नियोक्ताओं ने ईसीआर तैयार करने और जमा करने में आ रही दिक्कतों की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि संशोधित वेतन सीमा के कारण उनके पेरोल और अनुपालन से जुड़े तंत्र में बदलाव करना पड़ रहा है। इससे सितंबर 2026 के वेतन महीने के लिए रिटर्न तैयार करने में विशेष परेशानी आ रही थी। ईपीएफओ ने इन समस्याओं पर विचार करने के बाद समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया।
तारीख क्यों बढ़ाई गई?
वेतन सीमा में संशोधन के बाद कंपनियों को अपने वेतन गणना प्रणाली को अपडेट करना पड़ा। उन्हें कर्मचारियों के वेतन और पीएफ अंशदान की सही गणना करने में दिक्कतें आ रही थीं। ईपीएफओ का उद्देश्य प्रतिष्ठानों को इन बदलावों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देना है। यह सुनिश्चित करना भी है कि नियोक्ता अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन कर सकें। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त की शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
ईसीआर क्या होता है और यह किन पर लागू होगा?
ईसीआर (इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न) एक ऑनलाइन विवरण है। इसके माध्यम से नियोक्ता कर्मचारियों के पीएफ से संबंधित जानकारी जमा करते हैं। साथ ही, वे निर्धारित अंशदान का भुगतान भी करते हैं। यह छूट केवल सितंबर 2026 के वेतन महीने के ईसीआर दाखिल करने पर लागू होगी। इसे अन्य महीनों के लिए सामान्य समयसीमा विस्तार नहीं माना जाएगा। यह फैसला ईपीएफओ के दायरे में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों और नियोक्ताओं पर लागू होगा।
क्या कर्मचारियों के लिए भी कोई बदलाव है?
इस परिपत्र में कर्मचारियों की पीएफ निकासी, ब्याज दर या पेंशन से जुड़े नियमों में कोई बदलाव नहीं बताया गया है। यह केवल सितंबर 2026 के वेतन महीने के ईसीआर दाखिल करने और संबंधित अनिवार्य अंशदान जमा करने की समयसीमा बढ़ाने से संबंधित है। इस छूट से नियोक्ताओं की कानून और संबंधित योजनाओं के तहत अन्य जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होंगी। ईपीएफओ ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को इस फैसले की जानकारी नियोक्ताओं तक पहुंचाने को कहा है। इस निर्णय से उन कंपनियों को राहत मिलेगी, जिन्हें संशोधित वेतन सीमा के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।