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Vehicle Insurance: गाड़ी पर दो से अधिक चालान तो भरना होगा ज्यादा प्रीमियम, 20 फीसदी तक हो सकती है बढ़त

Mon, 21 Apr 2025 05:28 AM IST
अजीत सिंह Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 21 Apr 2025 05:28 AM IST
सार

अगर आप गाड़ी के कटे चालान का निपटारा नहीं करते हैं तो आने वाले समय में ज्यादा बीमा प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है। बीमा प्रीमियम की रकम कम रखने के लिए समय पर चालान जरूर भरें। इसका पूरा गणित बताती रिपोर्ट-

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If you have more than two challans on your vehicle then you will have to pay more motor insurance premium
चालान (सांकेतिक) - फोटो : Freepic

विस्तार

नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है। लोग सोच रहे हैं कि क्या इस बार उन्हें अधिक मोटर बीमा प्रीमियम का भुगतान करना होगा, यदि उनके पास पिछले वित्त वर्ष के दो से अधिक लंबित, भुगतान न किए गए चालान हैं। हालांकि, वर्तमान प्रस्ताव अभी तक लागू नहीं हुआ है और यह मसौदा चरण में है। पॉलिसी जारी होने के बाद चालान की स्थिति को ट्रैक करना व्यावहारिक और प्रणालीगत चुनौतियों का सामना करना होगा है। ऐसे में सड़क परिवहन मंत्रालय, राज्य यातायात विभाग और बीमा कंपनियों के बीच एक सुरक्षित और निरंतर डाटा को साझा करने वाले तंत्र की जरूरत है। हालांकि, इसे लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम के तहत कई गोपनीयता और अनुपालन चिंताओं को सुलझाना होगा।

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20 फीसदी तक बढ़ सकता है प्रीमियम
प्रस्तावित नियम में ऐसा मॉडल है, जहां एक वित्त वर्ष में दो लंबित चालान पर बीमा प्रीमियम में 10 से 20 फीसदी तक की बढ़त हो सकती है। बीमा कंपनियां पॉइंट आधारित प्रणाली अपना सकती हैं, जो प्रीमियम दर निर्धारित करती है। प्रीमियम का मूल्य निर्धारण मुख्य रूप से टेलीमैटिक्स आधारित मूल्य निर्धारण तंत्र के जरिये किया जाएगा।  

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  • अगर बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी का प्रस्ताव कई लंबित चालानों के कारण होता है, तो प्रीमियम की गणना गलतियों को ठीक करने के बाद समायोजित की जाएगी, लेकिन इसे संभालने का तरीका अभी भी स्पष्ट नहीं है। इसमें गलत शुल्कों का सबूत देना या बीमा प्रीमियम को अंतिम रूप दिए जाने से पहले रिकॉर्ड को सही करने के लिए अधिकारियों को अपील प्रस्तुत करना शामिल हो सकता है।
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राज्यस्तरीय डाटा बेस जुटाना प्रमुख समस्या
प्राथमिक बाधा राज्यस्तरीय डाटाबेस को एकीकृत करना है। भारत के डाटा संरक्षण अधिनियम के कारण यह और भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है। बीमा कंपनियों के लिए इसे लागू करने में सरकारी ई-चालान प्रणालियों तक प्रत्यक्ष और वास्तविक समय में पहुंच चाहिए। इस प्रस्ताव में यह भी है कि तीन महीने के भीतर ट्रैफिक ई-चालान का भुगतान न करने पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिया जाए। यह प्रस्ताव भी अभी तक लागू नहीं हो पाया है।      

  • कई राज्यों में ई-चालान सिस्टम को बीमा प्रीमियम के साथ एकीकृत करने का काम चल रहा है। दिल्ली जैसे राज्य तो केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के जरिये ट्रैफिक पुलिस और बीमा कंपनियों के बीच डाटा साझा करने का परीक्षण कर रहे हैं।

कोई व्यक्ति वित्त वर्ष में दो से अधिक बकाया या लंबित चालान आगे बढ़ाता है, तो मसौदे के अनुसार उसे अगले साल वाहन की बीमा पॉलिसी के लिए अधिक प्रीमियम का भुगतान करना पड़ सकता है। इस नियम से यह फायदा होगा कि जिन भी चालान का वर्षों तक नहीं भुगतान होता है, उनका तुरंत भुगतान होगा। -मधुसूदन राय, वित्तीय सलाहकार

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