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PMI: एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई नवंबर में छह महीने के निचले स्तर पर पहुंचा, विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती के संकेत

Sat, 22 Nov 2025 01:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 22 Nov 2025 01:21 PM IST
सार

HSBC Flash PMI: भारत की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार नवंबर में थोड़ी धीमी पड़ गई है। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है, यह आंकड़ा विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती और कमजोर मांग की ओर इशारा करता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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HSBC Flash PMI: India's Economic Growth Slows to 59.9 in November
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

एसएंडपी ग्लोबल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स नवंबर में 59.9 पर आ गया, यह अक्तूबर में 60.4 था। छह महीने में यह सबसे निचला स्तर है। हालांकि सूचकांक अब भी तटस्थ 50.0 अंक से काफी ऊपर है, जो समग्र व्यावसायिक गतिविधि में इजाफे का संकेत देता है।

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यह सूचकांक विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के संयुक्त उत्पादन में महीने-दर-महीने बदलाव को मापता है। रिपोर्ट बताती है कि नए ऑर्डर और व्यावसायिक गतिविधि में विस्तार जारी है, लेकिन मई के बाद से गति सबसे धीमी रही। कमजोर मांग और देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश विकास को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहे।
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एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में गिरावट आई है, हालांकि परिचालन स्थितियों में सुधार अच्छा बना हुआ है। नए निर्यात ऑर्डरों में वृद्धि अक्तूबर के बराबर रही, लेकिन कुल नए ऑर्डर कम आए, यह दर्शाता है कि जीएसटी-प्रेरित वृद्धि अपने चरम पर पहुंच चुकी है। लागत का दबाव कम हुआ है और कीमतें भी घटी हैं।”
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नवंबर में एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 57.4 पर आ गया, यह अक्तूबर के 59.2 से गिरकर नौ महीनों में परिचालन स्थितियों में सबसे धीमी सुधार का संकेत है। निर्माताओं ने उत्पादन और नए ऑर्डरों में कम वृद्धि दर्ज की, जबकि सेवा क्षेत्र में मांग मामूली रूप से सुधरी।

रिपोर्ट के अनुसार, बिक्री में धीमी वृद्धि के कारण रोजगार सृजन भी प्रभावित हुआ। रोज़गार में लगातार 42वें महीने वृद्धि हुई, लेकिन यह डेढ़ साल से अधिक समय में सबसे कम दर रही। कीमतों के मोर्चे पर राहत मिली है। इनपुट लागत मुद्रास्फीति लगभग साढ़े पाँच साल के निचले स्तर पर रही, जबकि आउटपुट चार्ज मुद्रास्फीति आठ महीने के न्यूनतम स्तर पर आ गई।


भविष्य को लेकर कंपनियां आशावादी बनी हुई हैं, लेकिन समग्र व्यावसायिक विश्वास जुलाई 2022 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका कारण कमजोर मांग की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं।

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