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Trade: हूती हमलों के कारण भारत से यूरोप में डीजल भेजने की लागत बढ़ी, अब पश्चिम की बजाए पूर्व की ओर जा रहे जहाज
Tue, 20 Feb 2024 11:35 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 20 Feb 2024 11:35 AM IST
सार
ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित वोर्टेक्स लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के पहले दो हफ्तों में यूरोप में भारत आने वाले ईंधन की आवक औसतन 18,000 बैरल प्रति दिन रही, जिसमें जनवरी के औसत की तुलना में 90% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
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अंंतरराष्ट्रीय कारोबार।
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत से यूरोप में डीजल का शिपमेंट इस महीने अब तक 2022 के बाद से सबसे कम हो गया है। मर्चेंट शिपिंग पर हो रहे हूती हमलों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित हो रहे हैं। लाल सागर में चल रही उथल-पुथल के बीच पश्चिम के बजाय पूर्व में कार्गो भेजना बेहतर हो गया है। इसके कारण यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में कार्गो का प्रवाह काफी कम हो गया है।
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ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित वोर्टेक्स लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के पहले दो हफ्तों में यूरोप में भारत आने वाले ईंधन की आवक औसतन 18,000 बैरल प्रति दिन रही, जिसमें जनवरी के औसत की तुलना में 90% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। स्पार्टा कॉमोडिटीज के एक विश्लेषक जेम्स नोएल-बेसविक के अनुसार, डीजल शिपमेंट में गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम में शिपिंग की लागत का बढ़ना है।
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नोएल-बेसविक ने कहा, "पूर्व में सिंगापुर की ओर निर्यात करने के लिए अर्थशास्त्र पश्चिम की तुलना में बहुत बेहतर रहे। यूरोप या अटलांटिक बेसिन की ओर जाने वाले टैंकरों को हूती खतरे से बचाने के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप को पार करना होता है जिससे यात्रा की लंबाई और लागत बढ़ जाती है। इस कारण शिपमेंट्स की संख्या में कमी आई है।
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आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के पहले दो हफ्तों में यूरोपीय संघ में डीजल-प्रकार के ईंधन का कोई आयात नहीं हुआ और ब्रिटेन में केवल एक शिपमेंट का आयात हुआ। हालांकि, ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित पोर्ट रिपोर्ट और टैंकर-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, मार्लिन सिसिली और मार्लिन ला प्लाटा ने हाल ही में भारत में बैरल लोड किए हैं और रॉटरडैम की ओर बढ़े हैं।