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Home Sales: घरों की बिक्री में 19 फीसदी की भारी गिरावट, महंगाई ने मारा घर खरीदने का सपना

Wed, 16 Apr 2025 12:15 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 16 Apr 2025 12:15 PM IST
सार

अक्तूबर-दिसंबर 2024 की तिमाही में भी पूरे देश में घरों की बिक्री में कमी दर्ज की गई थी। इस समय अवधि में दीपावली और नवरात्रि-दशहरा जैसे त्योहारी सीजन होने के बाद भी घरों की बिक्री में 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी।

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Home Sales: 19 pc drop in home sales, inflation kills the dream of buying a home
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ani

विस्तार

पूरे देश में घरों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। देश के आठ सबसे बड़े शहरों में घरों की बिक्री और नए घरों की लांचिंग में 19 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसे वैश्विक बाजार में रोजगार के अवसरों को लेकर लोगों की अनिश्चितता का परिणाम बताया गया है। महंगे होम लोन के कारण भी निवेशक घर खरीद से पीछे हटने के लिए मजबूर हुए हैं। इसके पहले की तिमाही अक्तूबर-दिसंबर 2024 में भी घरों की बिक्री में 26 फीसदी और नए घरों की लांचिंग में 33 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसका असर निर्माण और रियल स्टेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों के रोजगार पर पड़ सकता है। 

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बंगलूरू और चेन्नई को छोड़कर देश के सभी शहरों में घरों की बिक्री में कमी दर्ज की गई है, जबकि अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे में घरों की खरीद-बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। बंगलूरू में घरों की बिक्री में 13 प्रतिशत और चेन्नई में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कोलकाता में केवल एक फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हैदराबाद और मुंबई में घरों की बिक्री में सबसे ज्यादा 26-26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पुणे में भी घरों की बिक्री में 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 
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प्रॉपटाइगर डॉट कॉम की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जनवरी-मार्च 2025 की पहली तिमाही में देश के सबसे बड़े आठ शहरों में होम सेल्स में 19 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इस दौरान डेवलपर द्वारा नए घरों की उपलब्धता में भी दस फीसदी की गिरावट आई है। घरों की बिक्री में कमी का सबसे बड़ा कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और घरों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को माना गया है। निर्माण क्षेत्र में सीमेंट, स्टील, परिवहन और फर्नीचर जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरों का निर्माण महंगा हुआ है। इससे लोगों की खरीद क्षमता में घरों की उपलब्धता का संकट पैदा हुआ है। इसका असर प्रॉपर्टी और निर्माण क्षेत्र की नौकरियों पर पड़ सकता है। इस सेक्टर में काम कर रहे श्रमिकों को इसका सीधा नुकसान होने की संभावना है। 
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अक्तूबर-दिसंबर 2024 की तिमाही में भी पूरे देश में घरों की बिक्री में कमी दर्ज की गई थी। इस समय अवधि में दीपावली और नवरात्रि-दशहरा जैसे त्योहारी सीजन होने के बाद भी घरों की बिक्री में 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी। इस गिरावट का यह परिणाम हुआ था कि प्रॉपर्टी सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों ने नए प्रोजेक्ट को लांच करने में कटौती कर दी। इस तिमाही में नए प्रोजेक्ट्स की लांचिंग में पिछले वर्ष की इसी समय अवधि की तुलना में 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।  
 
लगातार दो तिमाही में घरों की बिक्री और नए घरों के प्रोजेक्ट्स लांच होने में कमी का असर सीधे तौर पर रोजगार के अवसरों को प्रभावित करता है। नए होम प्रोजेक्ट्स की लांचिंग में कमी से निर्माण क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों के रोजगार पर गहरा नकारात्मक असर छोड़ सकता है। इससे देश की इस बड़े वर्ग के हाथ में पैसे की कमी आवश्यक वस्तुओं की खरीद-बिक्री और उत्पादन को भी प्रभावित कर सकता है। 

आरबीआई के कदम से स्थिति संभलने का अनुमान
रिजर्व बैंक ने लगातार दो बार रेपो दरों में कटौती की है। इससे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, महाराष्ट्र बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी ब्याज दरों में कटौती की है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिजर्व बैंक ने इस तरह का कदम न उठाया होता तो इस तिमाही में रियल स्टेट सेक्टर में और अधिक मंदी आ सकती थी। लेकिन ब्याज दरों के कम होने से कुछ निवेशक घर खरीद को अपनी प्राथमिकता में रख सकते हैं।

सोच समझकर करें निवेश: एक्सपर्ट
हाउसिंग डॉट कॉम के सीईओ ध्रुव अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि पूरी दुनिया में अमेरिका के टैरिफ वॉर के कारण व्यापार में अनिश्चितता पैदा हुई है। इससे लोग अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर आशंकित हुए हैं। इसका सीधा असर आने वाले समय में घरों की बिक्री पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि घर-फ्लैट में निवेश ज्यादातर लोगों के लिए जीवन में एक-दो बार किया जाने वाला भारी निवेश होता है, लिहाजा सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही किसी प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहिए। 

'आय के 10 प्रतिशत से अधिक न हो ईएमआई'   
निवेश एक्सपर्ट अनिल सक्सेना ने अमर उजाला से कहा कि घरों को खरीदना इतना महंगा हो गया है कि बिना बैंक से कर्ज लिए घर खरीदने की बात अब कोई सोच भी नहीं सकता। लेकिन ऐसा करते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि होम लोन के रूप में जाने वाली ईएमआई अपनी मासिक-वार्षिक आय के 15-20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। शेष राशि की नकद व्यवस्था कर लेने के बाद ईएमआई की गणना कर ही घरों की खरीद में आगे जाना चाहिए। 


उन्होंने कहा कि होम लोन लेते समय लंबी अवधि का कर्ज लेना ठीक रहता है। इससे ईएमआई ज्यादा नहीं होती और उसे चुकाना आसान रहता है। बीच में अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करने के बाद होम लोन चुका देना पूरा कर्ज चुकाने का सही तरीका माना जाता है। ईएमआई ज्यादा होने से नौकरी छूटने की स्थिति में लोगों के सामने संकट पैदा हो जाता है। जबकि यदि ईएमआई कम रहती है तो लोग फौरी तौर पर इसकी व्यवस्था कर लेते हैं, बाद में नौकरी लगने पर इसे एडजस्ट कर लेना आसान होता है।  

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